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बिहार में बदला मौसम का मिजाज, कई जिलों में येलो अलर्ट; आंधी, बारिश और वज्रपात से जनजीवन प्रभावित

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सीतामढ़ी से किशनगंज तक तेज हवाओं और बारिश की चेतावनी, किसानों की बढ़ी चिंता; कई जिलों में फसल को नुकसान, हादसों में जनहानि

बिहार में इन दिनों मौसम ने अचानक करवट ले ली है। राज्य के कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और वज्रपात की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। रविवार को उत्तर और पूर्वी बिहार के कई जिलों—सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज—में येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग ने खास तौर पर लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। वज्रपात की घटनाओं को देखते हुए खेतों, खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।

आने वाले दिनों में मौसम और भी ज्यादा खराब हो सकता है। विभाग के अनुसार 26 मार्च को राज्य के करीब 25 जिलों में बारिश और तेज हवाओं को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा 27 मार्च को लगभग पूरे बिहार में आंधी-तूफान, वज्रपात और बारिश की संभावना जताई गई है। इस दौरान प्रशासन और आम लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है।

इस बदलते मौसम का असर कई जिलों में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। जमुई में पिछले तीन दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। शुक्रवार शाम से शुरू हुई बारिश का सिलसिला शनिवार और रविवार तक जारी रहा, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। दिनभर आसमान में काले बादल छाए रहे और तेज पछुआ हवाओं के कारण ठंड का एहसास फिर से बढ़ गया है।

रविवार की सुबह भी कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। इसके साथ ही घना कोहरा भी छाया रहा, जिससे सड़कों पर दृश्यता काफी कम हो गई। वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।

इसी तरह गोपालगंज में भी घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी बेहद कम हो गई है। लोगों को पास की वस्तुएं भी स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही हैं। मौसम के इस अचानक बदलाव ने एक बार फिर सर्दी का एहसास करा दिया है।

बारिश और तेज हवाओं का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। बेमौसम बारिश ने खेतों में तैयार फसलों को नुकसान पहुंचाया है। खासकर गेहूं की फसल, जो पककर तैयार हो चुकी थी, वह बारिश के कारण भीग गई है। कई जगहों पर फसल झुक गई या गिर गई है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

पटना के ग्रामीण इलाकों में भी तेज आंधी और बारिश ने तबाही मचाई है। मसौढ़ी के भगवानगंज क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ में लगी गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।

सब्जी की खेती करने वाले किसान भी इस मौसम से परेशान हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण सब्जियों की फसल खराब हो रही है, जिससे उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है।

इधर, वज्रपात की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। हाल के दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में बिजली गिरने से कई लोगों की जान जा चुकी है। गया में शुक्रवार शाम वज्रपात की चपेट में आने से दो किसानों की मौत हो गई।

वहीं बाढ़ इलाके में बिजली गिरने से आठ मजदूर झुलस गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इसके अलावा अररिया में बारिश के दौरान एक दीवार गिरने से दो मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है।

लगातार हो रही इन घटनाओं ने प्रशासन और लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का असामान्य मौसम जलवायु परिवर्तन का संकेत हो सकता है। मार्च के महीने में जहां आमतौर पर तापमान बढ़ने लगता है, वहीं इस बार बारिश, आंधी और ठंड का मिश्रित असर देखने को मिल रहा है।

प्रशासन ने सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव दल को तैयार रखा गया है। साथ ही, लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

कुल मिलाकर, बिहार में मौसम का यह बदला हुआ रूप लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। जहां एक ओर आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। आने वाले कुछ दिनों तक मौसम के ऐसे ही बने रहने की संभावना को देखते हुए सभी को सतर्क रहने की जरूरत है।

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