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पटना में ‘उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार’ की गूंज, तीन दिवसीय बिहार दिवस समारोह का भव्य आगाज़

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गांधी मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम, सोना मोहपात्रा, शान और पापोन बिखेरेंगे सुरों का जादू; कला, विरासत और महिला सशक्तिकरण पर विशेष फोकस

पटना: बिहार अपने 114वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक बार फिर उत्सव और उमंग में डूबा हुआ है। 22 मार्च से शुरू हुआ बिहार दिवस समारोह इस बार राजधानी को एक भव्य सांस्कृतिक मंच में तब्दील कर रहा है, जहां राज्य की समृद्ध परंपराएं, कला, संगीत और विकास की झलक एक साथ देखने को मिल रही है। ‘उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार’ थीम पर आधारित यह तीन दिवसीय आयोजन 24 मार्च तक चलेगा और इसमें प्रदेश की विरासत के साथ-साथ भविष्य की दिशा को भी प्रदर्शित किया जा रहा है।

राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान इस आयोजन का मुख्य केंद्र बना हुआ है, जहां हर ओर उत्साह और रंगीन माहौल नजर आ रहा है। यह वही स्थान है, जो वर्षों से बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों का साक्षी रहा है, और इस बार भी बिहार दिवस के अवसर पर इसकी भव्यता देखते ही बन रही है।

इस समारोह की सबसे खास बात यह है कि इसमें मनोरंजन के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं को भी बराबर महत्व दिया गया है। कार्यक्रम के मुख्य मंच पर तीनों दिन देश के प्रसिद्ध गायक अपनी प्रस्तुति देंगे। पहले दिन यानी 22 मार्च को सोना मोहपात्रा अपनी आवाज से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी। दूसरे दिन 23 मार्च को शान का लाइव परफॉर्मेंस होगा, जबकि समापन के दिन 24 मार्च को पापोन अपनी सुरीली आवाज से कार्यक्रम को यादगार बनाएंगे।

संगीत के अलावा शास्त्रीय और लोक कलाओं का भी विशेष आयोजन किया गया है। श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में शास्त्रीय संगीत की महफिल सजेगी, वहीं रवींद्र भवन में लोकगीतों की मधुर गूंज सुनाई देगी। यह आयोजन बिहार की सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर लाने का प्रयास है, जहां परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम दिखाई देता है।

गांधी मैदान में इस बार ‘धरोहर दर्शन’ पवेलियन विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करीब 15 हजार वर्गफुट में फैले इस पवेलियन में बिहार की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प को प्रदर्शित किया गया है। यहां लहठी और सुजनी जैसी लोक कलाओं के साथ-साथ ग्रामीण कारीगरों की प्रतिभा को भी सामने लाया गया है। यह पवेलियन न केवल दर्शकों को आकर्षित कर रहा है, बल्कि स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों के लिए भी एक बड़ा मंच साबित हो रहा है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के तहत नाटक और नृत्य-नाटिकाओं का भी आयोजन किया गया है। लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की प्रसिद्ध रचना ‘गबरघिचोर’ का मंचन दर्शकों को ग्रामीण जीवन की झलक दिखाएगा। इसके साथ ही भगवान बुद्ध के जीवन पर आधारित ‘बुद्धचरित’ नृत्य-नाटिका भी प्रस्तुत की जा रही है, जो आध्यात्मिकता और इतिहास को एक साथ जोड़ती है।

इसके अलावा बिहार संग्रहालय में ‘तीसरी कसम’ जैसी क्लासिक फिल्मों की स्क्रीनिंग भी की जा रही है, जिससे दर्शकों को सिनेमा के माध्यम से बिहार की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को समझने का अवसर मिल रहा है।

इस बार बिहार दिवस समारोह में महिला सशक्तिकरण पर भी विशेष जोर दिया गया है। महिला उद्यमियों और जीविका समूहों के लिए अलग से स्टॉल लगाए गए हैं, जहां वे अपने उत्पादों और कार्यों का प्रदर्शन कर रही हैं। महिला एवं बाल विकास निगम के पवेलियन में समाज के वंचित वर्गों की प्रगति और उनके सशक्तिकरण की कहानियों को प्रस्तुत किया जा रहा है।

इसके साथ ही प्रेमचंद रंगशाला में 26 मार्च तक महिला नाट्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह उत्सव महिलाओं की रचनात्मकता, संघर्ष और सामाजिक बदलाव में उनकी भूमिका को दर्शाने का एक महत्वपूर्ण मंच बन रहा है।

कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन शाम साढ़े पांच बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा किया जाएगा। उनके उद्घाटन के साथ ही यह आयोजन और भी अधिक भव्यता के साथ आगे बढ़ेगा।

इतने बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए सुरक्षा और व्यवस्था के भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पटना स्मार्ट सिटी के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से पूरे कार्यक्रम की निगरानी की जा रही है। जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, ताकि किसी भी स्थिति पर तुरंत नजर रखी जा सके।

गांधी मैदान में अस्थायी थाना, चिकित्सा सुविधा के लिए अस्पताल, अग्निशमन के लिए फायर टेंडर और आम लोगों की सुविधा के लिए वाटर एटीएम की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान तैयार किया गया है और पुलिस प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट मोड में रखा गया है।

बिहार दिवस का यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि राज्य की पहचान, उपलब्धियों और संभावनाओं का उत्सव है। यह मंच न केवल कला और संस्कृति को बढ़ावा देता है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ लाकर एकता और विकास का संदेश भी देता है।

तीन दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव यह दिखाता है कि बिहार अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है और साथ ही आधुनिकता की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है। ‘उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार’ की थीम के साथ यह आयोजन राज्य के उज्ज्वल भविष्य की झलक प्रस्तुत कर रहा है, जहां परंपरा और प्रगति दोनों साथ-साथ चल रहे 

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