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सिंघिया: मक्का-गेहूं की तबाही, रिंकू सिंह ने पूछा, “क्या समस्तीपुर को सांसद-विधायक विहीन माना जाए?

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सिंघिया प्रखंड में मक्का और गेहूं की फसल आंधी और बेमौसम बारिश से बर्बाद, उप-प्रमुख रिंकू सिंह ने सांसद और विधायक की निष्क्रियता पर जताई नाराजगी, किसानों को मुआवजा देने की तत्काल मांग की।

समस्तीपुर/सिंघिया। सिंघिया प्रखंड के किसानों की हालिया फसलों की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। पिछले दो दिनों (20 और 21 मार्च 2026) में हुई तेज आंधी, ओलावृष्टि और मूसलधार बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खासकर मक्का, गेहूं और धान की फसलें इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आई हैं। किसानों के बीच डर और असहायपन की स्थिति पैदा हो गई है क्योंकि फसलों के नुकसान का अनुमान आर्थिक दृष्टि से बहुत बड़ा है।

इस बीच सिंघिया प्रखंड की उप-प्रमुख रिंकू सिंह ने जनप्रतिनिधियों की बेरुखी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद और विधायक अपनी जिम्मेदारी निभाने में गंभीर रूप से विफल रहे हैं। उप-प्रमुख रिंकू सिंह ने बताया कि सिंघिया प्रखंड में लगभग 60 प्रतिशत मक्का की खेती होती है, जो इस आपदा में पूरी तरह नष्ट हो गई है। गेहूं की फसल, जिसे किसान कटाई के लिए तैयार कर रहे थे, वह भी बारिश की भेंट चढ़ गई है। इससे पहले धान की फसल में भी भारी नुकसान हुआ था, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण प्रभावित किसानों को अब तक कोई मुआवजा नहीं मिल सका।

रिंकू सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि समस्तीपुर की सांसद और रोसरा के विधायक को क्षेत्र भ्रमण के दौरान तुरंत सभी प्रखंडों की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सांसद से DM समस्तीपुर से किसानों के नुकसान का निपटारा करने का आग्रह किया था, लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या समस्तीपुर को अब सांसद-विधायक विहीन समझा जाए?” और चेतावनी दी कि यदि मुआवजे की प्रक्रिया जल्द शुरू नहीं हुई, तो किसानों का असंतोष उग्र रूप ले सकता है।

उप-प्रमुख ने मुख्य रूप से तीन मांगें रखीं:

प्रत्येक प्रखंड में हुई फसल क्षति का त्वरित और निष्पक्ष सर्वेक्षण।

सांसद और विधायक व्यक्तिगत रूप से रूचि लेकर DM के साथ मुआवजे की फाइल आगे बढ़ाएं।

पिछले धान नुकसान और वर्तमान मक्का-गेहूं नुकसान का अविलंब भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

किसानों की चिंता बढ़ी है क्योंकि सिंघिया प्रखंड में यह लगातार दूसरी बार बड़ी फसल क्षति हुई है। छोटे और सीमांत किसान पहले ही पिछली फसल के नुकसान से आर्थिक रूप से कमजोर हो चुके हैं। अब मक्का और गेहूं की फसल के नुकसान से उनकी हालत और अधिक बिगड़ गई है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि यदि राहत और मुआवजा तुरंत नहीं मिला, तो कई परिवार गंभीर आर्थिक संकट में फंस सकते हैं।

इस आपदा को देखते हुए जिला कृषि पदाधिकारी, समस्तीपुर ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ओलावृष्टि और बारिश से प्रभावित रबी फसलों के क्षेत्र और अनुमानित हानि का विवरण तैयार करें। जिला स्तर पर फसल नुकसान का डेटा जुटाया जा रहा है, और रिपोर्ट के आधार पर ही प्रभावित किसानों को सरकारी प्रावधानों के अनुसार राहत या मुआवजे की राशि दी जाएगी।

अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना है कि रिपोर्ट त्वरित और सही हो, ताकि प्रभावित किसानों को नुकसान की भरपाई जल्द से जल्द मिल सके। जिले के किसानों में प्रशासन से उम्मीदें हैं कि उनकी मेहनत को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा और राहत कार्य जल्द शुरू होगा।

किसानों की समस्याएं सिंघिया प्रखंड तक सीमित नहीं हैं। समस्तीपुर जिले के अन्य प्रखंडों में भी रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि बार-बार प्राकृतिक आपदा के कारण उनकी आय पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, और यदि उन्हें समय पर मदद नहीं मिली तो कई किसान ऋण के जाल में फंस सकते हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर रिंकू सिंह ने जोर देते हुए कहा कि यह समय केवल राजनीतिक बयानबाजी का नहीं, बल्कि वास्तविक राहत देने का है। उन्होंने कहा कि सांसद और विधायक को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में व्यक्तिगत रूप से जाकर किसानों की समस्याओं को समझना चाहिए और जिला प्रशासन के साथ मिलकर त्वरित राहत की योजना तैयार करनी चाहिए।

इस बीच किसानों में चिंता की लहर है। कई छोटे और सीमांत किसान अपने खेतों में लगी फसल को देखकर हताश हैं। उनका कहना है कि पिछले धान और अब मक्का-गेहूं की बर्बादी ने उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। कई किसान परिवारों के पास ऋण चुकाने और दैनिक खर्चों के लिए भी पर्याप्त साधन नहीं हैं।

उप-प्रमुख रिंकू सिंह ने कहा कि यदि राहत और मुआवजा प्रक्रिया में देरी हुई तो किसान आंदोलनों के लिए मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि किसानों की सुध लेते हुए तत्काल उपाय किए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता की नाराजगी को अनदेखा करना लंबे समय में सामाजिक और राजनीतिक तनाव पैदा कर सकता है।

जिला प्रशासन ने भी फसल हानि के आंकड़े जुटाने और राहत प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश जारी किया है। जिला कृषि पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारी निर्धारित प्रपत्रों में रिपोर्ट तैयार करेंगे, और जिला कार्यालय को उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद ही प्रभावित किसानों को सरकारी मदद के तहत मुआवजा राशि दी जाएगी।

किसानों की समस्याओं को देखते हुए यह स्पष्ट है कि सिंघिया प्रखंड में हालात गंभीर हैं। स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी अब समय की मांग है। किसानों की आशा है कि उनके नुकसान का न्यायसंगत मुआवजा जल्द मिलेगा, ताकि वे अपनी जिंदगी और खेती की नियमित गतिविधियों को पुनः शुरू कर सकें।

इस संकट की वास्तविक तस्वीर यही है कि सिंघिया प्रखंड के किसान दोहरी मार झेल रहे हैं—एक प्राकृतिक आपदा की और दूसरी जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की सुस्ती की। यदि समय रहते राहत और मुआवजा नहीं दिया गया, तो इसका सामाजिक और आर्थिक असर लंबे समय तक रहेगा।

इस रिपोर्ट के अनुसार सिंघिया प्रखंड में किसानों की हालत बेहद गंभीर है और तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है।

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