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सीबीआई ने बिहार कैडर के IAS संजीव हंस पर 1 करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी का मामला दर्ज किया

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पटना/नई दिल्ली: बिहार कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी संजीव हंस के खिलाफ सीबीआई ने गंभीर भ्रष्टाचार और साजिश के आरोप में FIR दर्ज की है। एजेंसी का दावा है कि संजीव हंस ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मुंबई के बिल्डर्स को लाभ दिलाने के बदले 1 करोड़ रुपये की रिश्वत ली। इस मामले में उनके करीबी सहयोगियों और बिचौलियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।
जांच के मुताबिक, मामला उस समय का है जब संजीव हंस भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में निजी सचिव के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रेड्रेसल कमीशन (NCDRC) से मुंबई स्थित बिल्डर ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स के पक्ष में आदेश दिलाने और कंपनी की निदेशक की गिरफ्तारी रोकने के लिए राशि ली।
सीबीआई के अनुसार, संजीव हंस ने इस लेन-देन के लिए अपने करीबी विपुल बंसल के माध्यम से बिल्डर प्रमोटर अनुभव अग्रवाल से संपर्क किया। कथित रूप से, गुप्त बैठक में तय हुआ कि 1 करोड़ की राशि के बदले बिल्डर को आयोग से लाभ मिलेगा। इसके बाद संजीव हंस ने अपने ओहदे का प्रयोग कर बिल्डर के पक्ष में तारीखें तय करवाईं और निदेशक की संभावित गिरफ्तारी पर रोक लगवाई।
एजेंसी ने FIR में बताया कि 1 करोड़ रुपये की रकम कई किस्तों और माध्यमों से संजीव हंस तक पहुंचाई गई। इसमें बैंक ट्रांसफर के साथ हवाला नेटवर्क का भी इस्तेमाल हुआ। उदाहरण के तौर पर, 9 अगस्त 2019 को 15 लाख रुपये बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खाते में जमा किए गए, जिन्हें संजीव हंस के करीबी देवेंद्र सिंह आनंद ने संभाला।
बाकी 85 लाख रुपये को ठिकाने लगाने के लिए सहयोगियों जैसे शादाब खान और पुष्पराज बजाज की मदद ली गई। इसमें से 25 लाख नकद और 60 लाख हवाला के जरिए दिल्ली और कोलकाता के सहयोगियों तक भेजे गए। आरोपियों ने आपस में गुप्त ‘कोड वर्ड’ का इस्तेमाल किया ताकि जांच एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके।
FIR में दर्ज नाम और पते इस प्रकार हैं:
विपुल बंसल: रुस्तमजी सीजन्स, मधुसूदन कालेकर मार्ग, बांद्रा पूर्व, मुंबई
अनुभव अग्रवाल: फ्लैट नंबर 601, खटाऊ कंडोमिनियम, जे. मेहता रोड, मालाबार हिल, मुंबई
पुष्पराज बजाज: सीडी-151, साल्ट लेक, बीडी मार्केट, कोलकाता
शादाब खान: फ्लैट नंबर 405, मयूरध्वज को-ऑपरेटिव सोसाइटी, गीता कॉलोनी, दिल्ली
देवेंद्र सिंह आनंद: सी-504, मंत्री इटर्निटी, ओल्ड मुंबई–पुणे हाईवे, पुणे
मुकुल बंसल: 402, चौथा तल, पार्क लेन अपार्टमेंट्स, 26वां रोड, बांद्रा पश्चिम, मुंबई
सीबीआई ने मैसर्स ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स को भी आरोपी के रूप में नामजद किया है और अन्य अज्ञात व्यक्तियों की भूमिका की जांच भी जारी है। पूरे मामले की निगरानी सीबीआई इंस्पेक्टर अमन राणा कर रहे हैं।
जांच से पता चला है कि संजीव हंस और उनके सहयोगी लेन-देन के लिए बैंक ट्रांसफर, हवाला और नकद का मिश्रित इस्तेमाल करते थे। इसके अलावा, गुप्त संदेश और कोड वर्ड का प्रयोग करके वे जांच एजेंसियों की निगरानी से बचने की कोशिश करते थे।
सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक, इस प्रकरण में कई संपन्न बिल्डर और उनके प्रतिनिधि शामिल थे। आरोप है कि संजीव हंस ने अपने पद का गलत इस्तेमाल कर बिल्डर को समय और कानूनी राहत दिलाई।
एजेंसी ने FIR में कहा है कि पूरे नेटवर्क की हर कड़ी की जांच की जा रही है। बैंक अकाउंट, हवाला ट्रांजैक्शन और गुप्त संचार के सभी दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। संजीव हंस और उनके सहयोगियों के खिलाफ भारी-भरकम रकम के लेन-देन और साजिश के सबूत जुटाए जा रहे हैं।
इस मामले में सभी आरोपी और उनके सहयोगी जांच एजेंसियों की निगरानी में हैं। सीबीआई का कहना है कि कोई भी व्यक्ति जांच से बाहर नहीं रहेगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

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