:
Breaking News

दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने वाले भारतीयों को ED का नोटिस, क्रेडिट कार्ड से भुगतान बना समस्या

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

नई दिल्ली: दुबई में संपत्ति खरीदने वाले भारतीय नागरिकों की आर्थिक गतिविधियों पर अब कड़ी निगरानी शुरू हो गई है। भारतीय जांच एजेंसी एडीशनल डायरेक्टरेट ऑफ़ एन्फोर्समेंट (ED) ने उन भारतीयों को नोटिस भेजना शुरू किया है जिन्होंने दुबई में प्रॉपर्टी खरीदते समय क्रेडिट कार्ड या ऑनलाइन पेमेंट लिंक का इस्तेमाल किया। एजेंसी का मुख्य उद्देश्य यह पता करना है कि इन लेन‑देन के लिए पैसा कहां से आया और किस माध्यम से भुगतान किया गया।
सूत्रों के अनुसार, फरवरी महीने में ED ने इस मामले में कई भारतीयों को नोटिस भेजे। नोटिस में उनसे स्पष्ट किया गया कि प्रॉपर्टी खरीदने के लिए प्रयुक्त राशि उनका व्यक्तिगत धन था या किसी अन्य स्रोत से लिया गया था। जांच का केंद्रबिंदु पेमेंट का तरीका है, क्योंकि क्रेडिट कार्ड के माध्यम से की गई रकम भारतीय नियमों के अनुसार लोन यानी उधार माना जाता है। भारत में विदेशी संपत्ति खरीदने के लिए भेजी गई राशि केवल व्यक्ति की अपनी कमाई और वैध बैंकिंग चैनलों से होनी चाहिए, न कि उधार पर आधारित।
इस मामले का कानूनी आधार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की Liberalised Remittance Scheme (LRS) है। LRS के तहत कोई भी भारतीय नागरिक सालाना अधिकतम 2.5 लाख डॉलर तक विदेश में संपत्ति खरीद या निवेश कर सकता है। यह राशि केवल वैध बैंकिंग माध्यम से और आवश्यक टैक्स का भुगतान करने के बाद ही भेजी जा सकती है। ED के अनुसार, क्रेडिट कार्ड से भुगतान इस नियम के अंतर्गत स्वीकार्य नहीं है क्योंकि यह ऋण आधारित भुगतान माना जाता है।
जिन लोगों को नोटिस मिला है, उन्हें अपने लेन‑देन को वैध बनाना होगा। इसके लिए वे नई रकम का इस्तेमाल कर भुगतान को सही माध्यम से करना पड़ सकता है। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो प्रॉपर्टी को बेचना पड़ सकता है। दुबई के वर्तमान रियल एस्टेट बाजार की कमजोर स्थिति इसे और चुनौतीपूर्ण बना रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के मामलों में कंपाउंडिंग का विकल्प अपनाया जा सकता है। इसका मतलब है कि गलती को स्वीकार कर जुर्माना देकर मामला समाप्त किया जा सकता है। आमतौर पर जुर्माना 2 लाख रुपये तक का हो सकता है, लेकिन इसके लिए ED की मंजूरी अनिवार्य है। कई मामलों में, खरीदारों को बैंक के माध्यम से लेन‑देन को दोबारा करना पड़ सकता है और पहले भेजी गई राशि वापस भारत लानी पड़ सकती है।
सूत्रों का कहना है कि नोटिस प्राप्त करने वाले भारतीयों में कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने दुबई जाकर क्रेडिट कार्ड स्वाइप किया या ऑनलाइन पेमेंट लिंक के जरिए रकम भेजी। कुछ ने भुगतान को अंश‑अंश में किया। ED की जांच अब इन सभी लेन‑देन के बैंक स्टेटमेंट, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और क्रेडिट कार्ड विवरण की पड़ताल कर रही है।
इस कदम के पीछे एजेंसी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय नागरिक विदेश में संपत्ति खरीदते समय RBI के नियमों का पालन करें। विशेष रूप से यह देखा जा रहा है कि कोई भी विदेशी लेन‑देन अवैध या कर्ज पर आधारित न हो। ED के नोटिस के बाद, कई भारतीय निवेशकों ने अपनी वित्तीय गतिविधियों की समीक्षा शुरू कर दी है और कानूनी सलाह लेने लगे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि दुबई में संपत्ति खरीदते समय भुगतान का सही तरीका बेहद महत्वपूर्ण है। अगर लेन‑देन क्रेडिट कार्ड या ऋण आधारित माध्यम से किया गया, तो ED इसे गैरकानूनी मान सकती है। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि क्या निवेशकों ने बैंकिंग चैनलों के नियमों का पालन किया और विदेशी मुद्रा लेन‑देन में कर अदायगी की गई।
कई वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत सरकार की विदेश निवेश पर निगरानी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे यह संदेश भी जाता है कि विदेशी संपत्ति खरीदते समय नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती। इस दिशा में ED ने पहले भी कई ऐसे मामलों में कार्रवाई की है, जहां भारतीय नागरिकों ने विदेशी निवेश के लिए अनधिकृत माध्यमों का इस्तेमाल किया।
जांच के दौरान पता चला है कि कुछ मामलों में निवेशकों ने क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने की वजह से नियमों का उल्लंघन किया, जबकि उन्हें वैध बैंकिंग माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए था। ED अब इन सभी ट्रांजैक्शन की लेन-देन की सही स्थिति, स्रोत और मंजूरी का आकलन कर रही है।
इसके अलावा, निवेशकों को ध्यान रखना होगा कि अगर लेन‑देन को सही तरीके से नहीं किया गया और नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो प्रॉपर्टी को बेचना पड़ सकता है। इस प्रक्रिया में जुर्माना, राशि की वापसी और पुनः भुगतान जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। ED की कार्रवाई का मकसद केवल नियमों का पालन कराना है और किसी भी प्रकार के अवैध लेन‑देन को रोकना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी संपत्ति खरीदने वाले भारतीय निवेशकों के लिए यह चेतावनी है कि लेन‑देन के हर माध्यम को वैध और पारदर्शी बनाना आवश्यक है। चाहे भुगतान क्रेडिट कार्ड, बैंक ट्रांसफर या ऑनलाइन माध्यम से किया जाए, सभी को RBI और ED के नियमों के तहत होना चाहिए।
इस प्रक्रिया में निवेशकों को लेन‑देन रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट और भुगतान के प्रमाण तैयार रखने की सलाह दी जा रही है। ED की जांच यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी निवेशक नियमों का उल्लंघन न करे और विदेशी संपत्ति के लेन‑देन में पारदर्शिता बनी रहे।
इस प्रकार, दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने वाले भारतीय अब अपने भुगतान माध्यमों की समीक्षा और वैधता की जांच के दायरे में हैं। ED की नोटिस प्रक्रिया जारी है और निवेशकों को कानूनी और वित्तीय मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *