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अमेरिका में मेटा दोषी करार, बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ पर लगा 3100 करोड़ का जुर्माना

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अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य से एक अहम कानूनी फैसला सामने आया है, जिसमें सोशल मीडिया कंपनी Meta Platforms को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मामलों में जिम्मेदार ठहराया गया है। करीब सात सप्ताह तक चली सुनवाई के बाद जूरी ने माना कि कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद जोखिमों को लेकर पूरी पारदर्शिता नहीं दिखाई और कई मामलों में मुनाफे को प्राथमिकता दी।
यह मामला वर्ष 2023 में शुरू हुआ था, जब न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल Raúl Torrez ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। आरोप था कि कंपनी ने अपने लोकप्रिय प्लेटफॉर्म—Facebook, Instagram और WhatsApp—पर मौजूद खतरों, खासकर नाबालिगों पर पड़ने वाले प्रभावों को सही तरीके से उजागर नहीं किया।
सुनवाई के दौरान जूरी के सामने कई अहम दस्तावेज और गवाहियां पेश की गईं। इनमें कंपनी के आंतरिक रिकॉर्ड, अधिकारियों के बयान, व्हिसलब्लोअर्स की जानकारी और तकनीकी विशेषज्ञों की राय शामिल रही। इन सबूतों के आधार पर यह संकेत मिला कि कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म्स से जुड़े संभावित खतरों की जानकारी थी, लेकिन उन्हें नियंत्रित करने के प्रयास पर्याप्त नहीं थे।
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अंडरकवर ऑपरेशन भी रहा, जिसमें एजेंट्स ने बच्चों के रूप में फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर प्लेटफॉर्म्स की कार्यप्रणाली का परीक्षण किया। इस दौरान यह परखा गया कि किस तरह संवेदनशील और आपत्तिजनक कंटेंट तक पहुंच बनती है और कंपनी ऐसे मामलों में कितनी तेजी से कार्रवाई करती है। रिपोर्ट में कई मामलों में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पाई गई।
जूरी ने अपने फैसले में कहा कि कंपनी ने उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के बजाय व्यावसायिक हितों को ज्यादा महत्व दिया। साथ ही यह भी माना गया कि कुछ मामलों में भ्रामक जानकारी दी गई और अनुचित व्यापारिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया।
जांच में बड़ी संख्या में उल्लंघनों की पुष्टि होने के बाद जूरी ने करीब 375 मिलियन डॉलर (लगभग 3100 करोड़ रुपये) का जुर्माना तय किया। हालांकि यह राशि अभियोजन पक्ष की मांग से कम है, लेकिन इस फैसले को एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि अब टेक कंपनियों की जवाबदेही तय की जा रही है।
फैसले के बाद भी कंपनी को तुरंत अपने कामकाज में बदलाव करने का निर्देश नहीं दिया गया है। अब आगे की प्रक्रिया में अदालत यह तय करेगी कि क्या कंपनी के प्लेटफॉर्म्स को सार्वजनिक नुकसान का कारण माना जाए और क्या इससे जुड़े प्रभावों के लिए अतिरिक्त कार्रवाई या मुआवजा तय किया जाना चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई मई में प्रस्तावित है।
वहीं, मेटा की ओर से इस फैसले पर असहमति जताई गई है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा है कि वे इस निर्णय के खिलाफ अपील करेंगे। उनका दावा है कि कंपनी अपने प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और हानिकारक कंटेंट को हटाने के लिए तकनीकी उपायों का इस्तेमाल करती है, हालांकि कुछ मामलों में ऐसी सामग्री सिस्टम से बच निकलती है।
इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल सोशल मीडिया एल्गोरिदम की भूमिका को लेकर भी उठाया गया। आरोप है कि कई बार ऐसे कंटेंट को बढ़ावा मिलता है, जो उपयोगकर्ताओं को ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखे, भले ही वह मानसिक रूप से नुकसानदायक हो। जूरी ने यह भी जांचा कि 13 साल से कम उम्र के बच्चों पर प्रतिबंध और किशोरों से जुड़े संवेदनशील कंटेंट को लेकर कंपनी की नीतियां कितनी प्रभावी हैं।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में सोशल मीडिया कंपनियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं और सरकारें इन पर सख्ती बढ़ा रही हैं। न्यू मैक्सिको का यह मामला आने वाले समय में अन्य कानूनी मामलों के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

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