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आरा में रजिस्ट्री ऑफिस पर दिनदहाड़े फायरिंग, 5 घायल; सीएम दौरे से पहले कानून-व्यवस्था पर

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बिहार के भोजपुर जिले के पीरो अनुमंडल में बुधवार को दिनदहाड़े हुई फायरिंग ने पूरे इलाके में भय और दहशत का माहौल पैदा कर दिया। पीरो रजिस्ट्री कार्यालय में जमीन विवाद को लेकर हुई इस घटना में एक प्रॉपर्टी डीलर समेत पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए। घटना की गंभीरता को बढ़ाता है कि यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा से ठीक एक दिन पहले हुई। इससे स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं और पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, पीरो रजिस्ट्री ऑफिस में लोग जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए पहुंचे थे, तभी हथियारबंद बदमाश अचानक वहां घुस आए और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। कुल पांच राउंड गोलियां चलाई गईं। गोलीबारी के दौरान कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। घटना में प्रॉपर्टी डीलर जीतू यादव और उनके भाई सत्येंद्र यादव सहित तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
घायलों को तुरंत पीरो अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद तीन गंभीर रूप से घायल लोगों को आरा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। घायलों में 30 वर्षीय प्रॉपर्टी डीलर जीतू यादव को गर्दन के दाहिने हिस्से में गोली लगी, उनके छोटे भाई 25 वर्षीय सत्येंद्र यादव को जांघ और घुटने के नीचे, 21 वर्षीय पिंटू यादव को जांघ में, और 35 वर्षीय रितेश दुबे को दाहिने हाथ की कलाई में गोली लगी। सभी घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह घटना जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर हुए पुराने विवाद का परिणाम है। प्रॉपर्टी डीलर जीतू यादव ने बताया कि उनके और आरोपी दिलशाद खान उर्फ लड्डू के बीच पिछले ढाई साल से ढाई-तीन कट्ठा जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। विवाद के दौरान उन्हें कई बार जान से मारने की धमकियां मिलीं। उनकी पत्नी ने भी पहले ही पीरो थाना में सुरक्षा की गुहार लगाई थी, लेकिन धमकियां लगातार जारी रही।
घटना के दौरान आरोपियों ने जानबूझकर सुपारी लेकर फायरिंग की। जीतू यादव के अनुसार, दिलशाद खान ने सूरज नाम के युवक को उन्हें मारने के लिए भेजा। जब जीतू अपने भाई और अन्य लोगों के साथ जमीन की रजिस्ट्री कराने ऑफिस गए, तो सूरज वहां पहुंचा और राइफल से फायरिंग की। कुछ ही देर बाद सूरज अपने साथियों के साथ लौट आया और अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इस दौरान लोग केवल अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते रहे।
घटना ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीएम नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा से ठीक पहले हुई इस वारदात ने यह दिखा दिया कि राज्य में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था में कई कमियां हैं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि यह फायरिंग जमीन विवाद से जुड़ी पुरानी रंजिश का परिणाम है, जिसमें प्रॉपर्टी डीलर जीतू यादव को निशाना बनाया गया। घटना के समय कार्यालय में मौजूद लोग इस हिंसक वारदात से सकते में आ गए और भागते हुए अपने जीवन को खतरे से बचाने की कोशिश करते रहे।
फायरिंग में घायल हुए प्रॉपर्टी डीलर जीतू यादव ने पुलिस को बताया कि उनका और दिलशाद खान का विवाद जमीन को लेकर पिछले ढाई साल से चल रहा है। उन्होंने बताया कि पहले भी उन्हें जान से मारने की धमकियां मिली थीं, और उनकी पत्नी ने कई बार सुरक्षा की गुहार लगाई थी। बावजूद इसके, आरोपी अपने इरादे पर अड़े रहे।
पुलिस ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पीरो एएसपी के.के. सिंह अपने टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घायलों को तत्काल अस्पताल में पहुंचाया। घटना स्थल से शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने फोरेंसिक टीम को बुलाकर जख्म और गोलियों के निशानों की पुष्टि कराई।
घटना के बाद पूरे पीरो अनुमंडल में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। पुलिस ने आसपास के CCTV फुटेज को खंगालना शुरू कर दिया है और आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की तैयारी में है। इसके अलावा, पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें ताकि भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकें।
यह वारदात आरा जिले के पीरो अनुमंडल में मुख्यमंत्री के दौरे से एक दिन पहले हुई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि आने वाले कार्यक्रमों में सुरक्षा की कोई कमी न रहे और जनता सुरक्षित महसूस करे।
बिहार में यह घटना कानून-व्यवस्था की गंभीर चुनौती के रूप में देखी जा रही है। स्थानीय अधिकारी घटना की तह तक जाने के लिए पूरे जिले में तलाशी और जांच अभियान चला रहे हैं। पुलिस की नजर में फिलहाल प्रमुख आरोपी सूरज और उसके साथियों की पहचान सबसे अहम है। उनका जल्द से जल्द पता लगाकर गिरफ्तारी करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
इस घटना ने राज्य में जमीन विवादों को लेकर बढ़ती हिंसा और हथियारों के उपयोग की चिंता को भी उजागर किया है। स्थानीय लोग और पीड़ित परिवार प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और उन्हें कानूनी कार्रवाई के तहत सजा मिले।
फिलहाल घायल लोगों का आरा सदर अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है। अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि घायलों की स्थिति गंभीर है और पूरी सावधानी के साथ उनका इलाज किया जा रहा है।
इस पूरी घटना ने यह साफ कर दिया है कि भूमि विवाद सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके कारण हिंसा और जनसुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ता है। पीरो अनुमंडल में हुए इस हमले ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस के सामने बड़ी चुनौती पेश कर दी है।
घटना के दौरान मौजूद लोग बताते हैं कि हमला अचानक और बेहद हिंसक था। आरोपियों ने राइफल से फायरिंग की और कोई भी नहीं जानता था कि कौन सुरक्षित रहेगा। अफरा-तफरी के बीच कई लोग घायल हो गए और कार्यालय परिसर का माहौल डरावना बन गया।
स्थानीय प्रशासन ने अब घटना की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है और आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान और जल्द गिरफ्तारी उनकी प्राथमिकता है ताकि भविष्य में ऐसे हालात न बनें।
जमीन विवाद को लेकर पीरो अनुमंडल में हुई इस दिनदहाड़े की फायरिंग ने न केवल स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया है, बल्कि यह दिखाया है कि बड़े नेताओं के दौरे से ठीक पहले भी राज्य में हिंसा के हालात बने हुए हैं।

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