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बाबा केवल धाम मेले में शराब बिक्री का वीडियो वायरल, समस्तीपुर में मचा हड़कंप
- Reporter 12
- 27 Mar, 2026
समस्तीपुर के हलई थाना क्षेत्र स्थित मेले से सामने आई कथित तस्वीर ने प्रशासनिक सतर्कता पर खड़े किए गंभीर प्रश्न, जांच में जुटी पुलिस
समस्तीपुर जिले से एक बार फिर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मामला हलई थाना क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध बाबा केवल धाम में आयोजित दो दिवसीय राजकीय मेले से जुड़ा है, जहां रात के समय कथित तौर पर अवैध शराब की बिक्री होने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल हो रहे इस वीडियो ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में निगरानी और नियंत्रण की व्यवस्था कितनी मजबूत या कमजोर है।
जानकारी के मुताबिक, बाबा केवल धाम में आयोजित राजकीय मेले में दिन के समय धार्मिक आस्था, भीड़, उत्साह और सरकारी उपस्थिति का माहौल था। मेले का शुभारंभ बड़े स्तर पर हुआ और कई जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी ने आयोजन को खास महत्व दिया। लेकिन इसी आयोजन की रात सामने आई एक कथित तस्वीर ने पूरे माहौल को बदल दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ विदेशी शराब की बोतलें खुले तौर पर रखी दिखाई दे रही हैं। इतना ही नहीं, पास में एक ग्लास भी नजर आता है, जिससे यह संदेह और गहरा हो गया कि वहां शराब की बिक्री या सेवन जैसा कुछ हो रहा था।
वीडियो में दिख रही स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे मेले की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि यदि वीडियो सही है, तो यह बिहार की शराबबंदी नीति के लिए बेहद शर्मनाक स्थिति है। बताया जा रहा है कि मेले से लौट रहे कुछ लोगों की नजर इस कथित दृश्य पर पड़ी, जिसके बाद वीडियो बनाया गया। वीडियो में एक युवक को बोतलों के पास खड़ा देखा जा रहा है, जो किसी काम में व्यस्त दिख रहा है। इस दृश्य के सामने आने के बाद सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े और सरकारी दर्जे वाले आयोजन में ऐसी गतिविधि कैसे संभव हुई।
यह भी पढ़ें: बिहार में शराबबंदी कानून लागू है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी सख्ती को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
इस पूरे मामले को और भी गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि दिन में जिस मेले का उद्घाटन बड़े स्तर पर हुआ, उसी मेले में रात के समय इस तरह की कथित गतिविधि का सामने आना प्रशासनिक निगरानी पर सीधे सवाल खड़े करता है। आम तौर पर किसी भी राजकीय मेले, धार्मिक आयोजन या बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, कानून-व्यवस्था और निषिद्ध वस्तुओं की रोकथाम के लिए अलग-अलग स्तर पर पुलिस और प्रशासन की तैनाती की जाती है। ऐसे में यदि किसी सार्वजनिक स्थल पर शराब जैसी प्रतिबंधित चीजें खुले में दिखाई दें, तो यह सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती।
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि यदि मेले जैसे सार्वजनिक और संवेदनशील स्थल पर इस तरह का दृश्य दिख रहा है, तो यह केवल एक अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की कमजोरी का संकेत भी हो सकता है। बाबा केवल धाम धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। ऐसे स्थान पर आयोजित राजकीय मेले में परिवार, महिलाएं, बच्चे, श्रद्धालु और दूर-दराज से आने वाले लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। ऐसे में इस तरह की कथित गतिविधियां न सिर्फ कानून के उल्लंघन का मामला हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय हैं।
यह भी पढ़ें: धार्मिक आयोजनों और राजकीय मेलों में प्रशासनिक चौकसी केवल भीड़ नियंत्रण तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है। हालांकि अब तक इस वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इससे जुड़े सवाल लगातार उठ रहे हैं। आमतौर पर इस तरह के मामलों में पुलिस या उत्पाद विभाग की ओर से प्रारंभिक प्रतिक्रिया सामने आती है, लेकिन यहां शुरुआती स्तर पर चुप्पी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। उत्पाद विभाग की ओर से भी कोई ठोस टिप्पणी सामने नहीं आने से लोगों के बीच संशय और गहरा हुआ है।
यहां यह समझना जरूरी है कि बिहार में शराबबंदी केवल एक कानूनी व्यवस्था नहीं, बल्कि सरकार की एक बड़ी सामाजिक नीति भी रही है। इस कानून का उद्देश्य समाज में नशे के दुष्प्रभाव को कम करना, परिवारों को सुरक्षित करना और सामाजिक अपराधों पर रोक लगाना बताया गया था। लेकिन समय-समय पर राज्य के अलग-अलग जिलों से शराब बरामदगी, अवैध कारोबार, होम डिलीवरी और सार्वजनिक स्थलों पर सेवन जैसे मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में बाबा केवल धाम मेले से सामने आया यह कथित वीडियो शराबबंदी की प्रभावशीलता पर एक बार फिर सवालों की नई परत जोड़ देता है।
वीडियो में दिखाई देने वाली चीजों को लेकर जो आशंकाएं जताई जा रही हैं, वे यदि जांच में सही पाई जाती हैं, तो यह केवल स्थानीय स्तर की लापरवाही नहीं मानी जाएगी। यह एक व्यापक प्रशासनिक विफलता के रूप में भी देखा जा सकता है। सवाल यह भी उठता है कि मेले में तैनात पुलिसकर्मी, सुरक्षाकर्मी और अन्य जिम्मेदार अधिकारी रात के समय क्या कर रहे थे? क्या वहां पर्याप्त निगरानी नहीं थी? क्या किसी स्तर पर सूचना होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई? या फिर यह सब इतनी चुपचाप हुआ कि किसी की नजर ही नहीं पड़ी? इन सभी सवालों के जवाब अब जांच पर निर्भर करेंगे।
यह भी पढ़ें: वायरल वीडियो केवल चर्चा नहीं, कई बार व्यवस्था की परतें खोलने का काम भी करते हैं।
मामले की संवेदनशीलता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह आयोजन राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था। दिन में जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शुरू हुए इस मेले की छवि रात में सामने आए इस कथित दृश्य से प्रभावित होती दिख रही है। किसी भी सरकारी या राजकीय आयोजन की प्रतिष्ठा उसकी व्यवस्थाओं से तय होती है। यदि उन्हीं व्यवस्थाओं के बीच शराब जैसी प्रतिबंधित चीजें नजर आएं, तो इससे आम जनता का भरोसा कमजोर होता है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं। यदि वायरल वीडियो की तकनीकी और तथ्यात्मक जांच कर सत्यता सामने लाई जाती है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होती है, तो इससे एक स्पष्ट संदेश जाएगा कि कानून सभी पर समान रूप से लागू है। लेकिन यदि मामला केवल वायरल चर्चा बनकर रह गया और जांच औपचारिकता तक सीमित रह गई, तो इससे शराबबंदी कानून और प्रशासनिक व्यवस्था—दोनों की विश्वसनीयता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
समस्तीपुर जैसे जिले में, जहां धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं, वहां ऐसी घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक विश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी का भी प्रश्न हैं। मेले जैसे आयोजनों में लोगों की सुरक्षा, माहौल की पवित्रता और कानून का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी होती है। ऐसे में बाबा केवल धाम से सामने आया यह मामला आने वाले दिनों में एक बड़ी प्रशासनिक परीक्षा बन सकता है।
यह भी पढ़ें: जब कानून सख्त हो और जमीन पर सवाल उठें, तब जांच और जवाबदेही सबसे अहम हो जाती है।
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई बताई जा रही है। अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो की सच्चाई क्या निकलती है, वहां वास्तव में क्या हो रहा था, और यदि कोई अवैध गतिविधि हुई, तो उसके पीछे कौन लोग थे। समस्तीपुर की जनता और सोशल मीडिया पर इस मामले को देख रहे लोग अब सिर्फ एक चीज जानना चाहते हैं—क्या यह वायरल वीडियो एक बड़ा खुलासा साबित होगा, या फिर जांच के बाद कोई और तस्वीर सामने आएगी? लेकिन इतना तय है कि बाबा केवल धाम मेले से उठे इस विवाद ने शराबबंदी और प्रशासनिक निगरानी, दोनों पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो की सच्चाई क्या निकलती है और प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।
नोट: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो की ‘आलम की खबर’ स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है। मामले की जांच जारी है और प्रशासनिक पुष्टि के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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