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समस्तीपुर मोरवा मेला: शराब बिक्री वायरल वीडियो – प्रशासन पर गंभीर सवाल, जांच शुरू

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समस्तीपुर मोरवा राजकीय मेले में खुलेआम शराब की बिक्री का वीडियो वायरल। प्रशासन की लापरवाही पर जनता नाराज, एसडीपीओ पटोरी को जांच का जिम्मा सौंपा गया।

समस्तीपुर/मोरवा। समस्तीपुर जिले के मोरवा प्रखंड में आयोजित राजकीय मेला में शराब की खुलेआम बिक्री का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब प्रशासन की सख्त आलोचना हो रही है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मेला परिसर में शराब काउंटर पर रखकर बेची जा रही है, और इस पूरी घटना ने प्रशासन की घोर लापरवाही उजागर कर दी है।

वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने एसडीपीओ पटोरी को जांच का जिम्मा सौंपा है। लेकिन सवाल उठता है कि जब पूरे मेले में शराबबंदी कानून लागू है, तो प्रशासन पहले से ही निगरानी क्यों नहीं कर रहा था? मेला परिसर में कहीं भी शराबबंदी संबंधित चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए थे। यह लापरवाही सीधे तौर पर अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़ा करती है।

प्रशासन की घोर चूक

वीडियो में स्पष्ट है कि प्रशासन न केवल निरीक्षण में चूक गया, बल्कि सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी भी पूरी तरह से अनदेखी हुई। हलवाई थाना के प्रभारी शैलेश कुमार ने बताया कि पूरे फोटो और वीडियो की पड़ताल की जा रही है और लोगों की पहचान जुटाई जा रही है। लेकिन यह सवाल अब भी बना है कि आखिर प्रशासन इतनी बड़ी चूक कैसे कर सकता है।

सोशल मीडिया पर लोग प्रशासन की चुप्पी और लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं। कई उपयोगकर्ताओं ने लिखा कि “यदि प्रशासन सतर्क होता, तो खुलेआम शराब बिक्री का यह वीडियो कभी वायरल ही नहीं होता।”

जनता की नाराजगी और आक्रोश

लोकल लोग और मेला आगंतुक भी इस घटना से काफी आहत हैं। उन्होंने कहा कि मेला पारिवारिक वातावरण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए आयोजित किया जाता है, लेकिन प्रशासन की चूक ने इसे कानून का उल्लंघन और अशांति का माध्यम बना दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि प्रशासन की लगातार अनदेखी और अलोकतांत्रिक रवैये का नतीजा है। मेला प्रशासन की यह घोर लापरवाही जनता के विश्वास को तोड़ने वाली है।

प्रशासन की कार्रवाई – दिखावा या गंभीरता?

जिला प्रशासन ने एसडीपीओ पटोरी के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई है, जो वीडियो में दिख रहे सभी व्यापारियों और काउंटर संचालकों की पहचान कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

लेकिन सवाल यह है कि जब नियम पहले से मौजूद हैं, सुरक्षा कर्मी तैनात हैं और मेले की आयोजन जिम्मेदारी प्रशासन की ही है, तो यह घोर चूक क्यों हुई? जनता का मानना है कि अब केवल जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि सख्त जवाबदेही तय होनी चाहिए।

अधिकारियों ने चेतावनी भी जारी की है, लेकिन यह चेतावनी कितनी प्रभावी होगी, यह सवाल प्रशासन की पहले हुई लापरवाही के बाद बनता है।

समाज की प्रतिक्रिया और अपेक्षाएँ

सोशल मीडिया पर लोग प्रशासन से पूछ रहे हैं कि अगर नियम तोड़ने वाले लोगों को तुरंत रोकना उनकी जिम्मेदारी है, तो उन्होंने क्यों कुछ नहीं किया? वीडियो वायरल होने के बाद अब जनता यह देख रही है कि प्रशासन सिर्फ दिखावा कर रहा है या गंभीरता से कार्रवाई करेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल जांच रिपोर्ट बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई भी होनी चाहिए। प्रशासन को यह संदेश देना होगा कि कानून सभी के लिए बराबर है और कोई भी चूक बर्दाश्त नहीं होगी।

संपादकीय विचार:

मोरवा मेला की शराब बिक्री की घटना ने प्रशासन की असंवेदनशीलता और लापरवाही को उजागर कर दिया है। यह साफ संदेश है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, उसका पालन सुनिश्चित करना भी प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

यदि प्रशासन समय रहते निगरानी और सख्ती अपनाता, तो यह घटना सामने ही नहीं आती। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने यह साबित कर दिया कि जनता की सतर्कता और सहयोग ही कानून के पालन में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

अब समय है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करें, दोषियों को कड़ा दंड दें और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियम, निगरानी और चेतावनी बोर्ड लागू करें। जनता और प्रशासन की साझेदारी ही कानून की रक्षा और सामाजिक शांति सुनिश्चित कर सकती है।

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