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शुभेंदु अधिकारी के पास कितनी संपत्ति, कितने केस और कितना बैंक बैलेंस?
- Reporter 12
- 31 Mar, 2026
Suvendu Adhikari Affidavit 2026: नंदीग्राम से भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने हलफनामा दाखिल कर अपनी संपत्ति, बैंक खाते, आय, निवेश और आपराधिक मामलों का पूरा ब्योरा दिया है। जानिए पूरी डिटेल।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में नंदीग्राम सीट एक बार फिर सियासी हलचल के केंद्र में आ गई है। इस सीट से चुनाव मैदान में उतरे भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने नामांकन के साथ अपना चुनावी हलफनामा दाखिल कर दिया है।
इस हलफनामे के सामने आने के बाद उनकी संपत्ति, बैंक बैलेंस, जमीन-जायदाद, आय, निवेश और लंबित आपराधिक मामलों की पूरी तस्वीर साफ हो गई है।
दस्तावेज के अनुसार शुभेंदु अधिकारी के पास करीब 85.87 लाख रुपये की कुल घोषित संपत्ति है। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपने हलफनामे में न तो किसी निजी वाहन का जिक्र किया है और न ही किसी ज्वेलरी का।
वहीं, उनके खिलाफ 25 आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है, हालांकि किसी भी मामले में दोषसिद्धि नहीं हुई है।
नंदीग्राम से फिर चुनावी दांव
नंदीग्राम सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से बेहद अहम मानी जाती रही है। ऐसे में शुभेंदु अधिकारी का यहां से चुनाव लड़ना पहले से ही चर्चा में था।
नामांकन दाखिल करने के साथ ही उनके हलफनामे ने इस चुनावी मुकाबले को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है।
हलफनामे में दी गई जानकारियों से साफ है कि उन्होंने अपनी वित्तीय और कानूनी स्थिति का विस्तृत ब्योरा चुनाव आयोग के समक्ष रखा है।
यही वजह है कि अब उनकी राजनीतिक ताकत के साथ-साथ उनकी आर्थिक प्रोफाइल पर भी नजरें टिक गई हैं।
कुल कितनी है संपत्ति?
हलफनामे में दी गई जानकारी के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी की कुल घोषित संपत्ति 85,87,600 रुपये से अधिक है।
इसमें उनकी चल संपत्ति और अचल संपत्ति दोनों शामिल हैं।
घोषित संपत्ति का ब्योरा:
चल संपत्ति: 24,57,600 रुपये
अचल संपत्ति: 61,30,000 रुपये
इस आंकड़े से यह साफ होता है कि उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा जमीन और प्रॉपर्टी के रूप में है, जबकि बाकी रकम बैंक खातों, बचत योजनाओं और निवेश में शामिल है।
नकद कितनी रकम है?
इतनी बड़ी राजनीतिक पहचान होने के बावजूद शुभेंदु अधिकारी ने अपने पास सिर्फ 12,000 रुपये नकद होने की जानकारी दी है।
यानी उनकी कुल संपत्ति का लगभग पूरा हिस्सा बैंकिंग और निवेश के औपचारिक ढांचे में दर्ज है।
यह भी संकेत देता है कि उनकी आर्थिक प्रोफाइल मुख्य रूप से दस्तावेजी और बैंक आधारित है, न कि नकदी पर आधारित।
कितने बैंक खाते हैं?
हलफनामे में शुभेंदु अधिकारी ने कई बैंक खातों की जानकारी दी है।
उनके नाम पर अलग-अलग बैंकों और शाखाओं में खाते दर्ज हैं, जिनमें राष्ट्रीयकृत बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक और पोस्टल सेविंग्स अकाउंट शामिल हैं।
इसके अलावा चुनावी खर्च के लिए एक अलग इलेक्शन अकाउंट का भी जिक्र किया गया है।
इन खातों में जमा रकम छोटी-बड़ी अलग-अलग राशियों में दर्ज है, जिससे यह साफ होता है कि उनकी बचत और फाइनेंशियल होल्डिंग्स कई हिस्सों में विभाजित हैं।
बैंक बैलेंस का क्या मतलब निकलता है?
हलफनामे में बैंक खातों की संख्या और उनमें जमा रकम देखकर यह समझ आता है कि शुभेंदु अधिकारी की वित्तीय स्थिति सिर्फ एक या दो खातों तक सीमित नहीं है।
उनकी रकम अलग-अलग खातों में फैली हुई है, जो आमतौर पर बचत, लेनदेन, निवेश और चुनावी खर्च जैसे अलग-अलग उद्देश्यों के लिए रखी जाती है।
यह तरीका कई सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों में देखा जाता है, जहां व्यक्तिगत और चुनावी खर्चों को अलग-अलग दर्ज किया जाता है।
यह भी पढ़ें:
Bengal Election 2026: नंदीग्राम सीट क्यों बनी सबसे हॉट सीट
कहां-कहां किया है निवेश?
हलफनामे में यह भी सामने आया है कि शुभेंदु अधिकारी ने सिर्फ बैंक खातों में ही रकम नहीं रखी है, बल्कि अलग-अलग बचत और निवेश योजनाओं में भी पैसा लगाया हुआ है।
उनके निवेश में शामिल हैं:
किसान विकास पत्र (KVP)
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)
को-ऑपरेटिव बैंक निवेश
अन्य बचत खाते
एलआईसी पॉलिसियां
यह जानकारी बताती है कि उनकी आर्थिक योजना सिर्फ बैंक बैलेंस तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने सुरक्षित और लंबे समय वाले निवेश विकल्पों को भी चुना है।
एलआईसी और बचत योजनाओं में भी पैसा
हलफनामे के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी ने कई एलआईसी पॉलिसियां भी ले रखी हैं।
इसके अलावा NSC और KVP जैसे पारंपरिक बचत साधनों में भी उनका निवेश दर्ज है।
इस तरह के निवेश आमतौर पर सुरक्षित और स्थिर रिटर्न के लिए किए जाते हैं।
इससे यह भी पता चलता है कि उनकी घोषित संपत्ति का एक हिस्सा सीधे खर्च योग्य नकद के बजाय दीर्घकालिक वित्तीय योजनाओं में लगा हुआ है।
जमीन-जायदाद में कितना है दांव?
शुभेंदु अधिकारी की कुल घोषित संपत्ति में सबसे बड़ा हिस्सा उनकी अचल संपत्ति का है।
हलफनामे में दर्ज जानकारी के अनुसार, उनके पास पूर्व मेदिनीपुर जिले के अलग-अलग इलाकों में जमीन और प्रॉपर्टी है।
इनमें शामिल हैं:
कृषि योग्य भूमि
गैर-कृषि भूमि
आवासीय उपयोग की संपत्ति
व्यावसायिक उपयोग की जमीन
बताया गया है कि उनके नाम पर करीब 2.46 एकड़ कृषि भूमि और 37,950 वर्ग फीट गैर-कृषि भूमि दर्ज है।
इन सभी संपत्तियों का घोषित बाजार मूल्य 61.30 लाख रुपये के आसपास बताया गया है।
पुश्तैनी और साझा संपत्तियां भी शामिल
हलफनामे के अनुसार उनकी कुछ संपत्तियां ऐसी भी हैं, जो पुश्तैनी या साझा हिस्सेदारी के रूप में दर्ज हैं।
यानी उनकी पूरी प्रॉपर्टी सिर्फ व्यक्तिगत खरीद की नहीं, बल्कि कुछ संपत्तियों में पारिवारिक या संयुक्त हिस्सेदारी भी शामिल है।
ऐसे मामलों में कुल मूल्यांकन के साथ हिस्सेदारी का महत्व भी काफी बढ़ जाता है।
क्या उनके पास कार या ज्वेलरी है?
हलफनामे की सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात यह है कि शुभेंदु अधिकारी ने किसी वाहन या ज्वेलरी का जिक्र नहीं किया है।
आमतौर पर बड़े नेताओं के हलफनामों में कार, एसयूवी या सोना-चांदी जैसी संपत्तियां दर्ज रहती हैं, लेकिन यहां ऐसा नहीं दिखा।
इससे उनकी घोषित संपत्ति की संरचना बाकी नेताओं से कुछ अलग नजर आती है, जहां सबसे ज्यादा वजन जमीन, बैंक बैलेंस और निवेश पर है।
पिछले 5 साल में कितनी रही कमाई?
हलफनामे में पिछले पांच वित्तीय वर्षों की आय का भी ब्योरा दिया गया है।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि बीते वर्षों में शुभेंदु अधिकारी की आय में लगातार बदलाव आया है और हाल के सालों में उनकी आमदनी बढ़ी भी है।
आय का सालाना ब्योरा:
2024-25: 17,38,590 रुपये
2023-24: 10,37,160 रुपये
2022-23: 8,78,400 रुपये
2021-22: 8,08,461 रुपये
2020-21: 8,13,170 रुपये
इन आंकड़ों से यह साफ दिखता है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उनकी कमाई पहले के मुकाबले ज्यादा रही है।
आय के मुख्य स्रोत क्या हैं?
हलफनामे में शुभेंदु अधिकारी ने अपनी आय के मुख्य स्रोतों का भी जिक्र किया है।
उनकी आमदनी मुख्य रूप से इन स्रोतों से बताई गई है:
विधायक के रूप में वेतन
पूर्व सांसद के रूप में पेंशन
व्यवसाय से आय
यानी उनकी कमाई सिर्फ सक्रिय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें पेंशन और निजी आर्थिक गतिविधियों का भी योगदान है।
शैक्षणिक योग्यता भी सामने आई
हलफनामे में उनकी शिक्षा की जानकारी भी दी गई है।
दिए गए ब्योरे के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी ने स्नातकोत्तर (एमए) तक की पढ़ाई की है।
चुनावी हलफनामों में शिक्षा का उल्लेख इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे उम्मीदवार की सार्वजनिक और बौद्धिक प्रोफाइल की झलक मिलती है।
शुभेंदु पर दर्ज हैं 25 मामले
हलफनामे में सबसे ज्यादा चर्चा जिस बिंदु की हो रही है, वह है उनके खिलाफ दर्ज 25 आपराधिक मामले।
इन मामलों में अधिकांश आरोप राजनीतिक आंदोलन, धरना-प्रदर्शन, प्रशासनिक टकराव और कानून-व्यवस्था से जुड़े घटनाक्रमों से संबंधित बताए गए हैं।
कुछ मामलों में आपदा प्रबंधन अधिनियम और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों का भी जिक्र है।
हालांकि सबसे अहम बात यह है कि हलफनामे में दर्ज इन मामलों में किसी भी केस में दोषसिद्धि नहीं हुई है।
क्या इन मामलों का चुनाव पर असर पड़ेगा?
चुनावी राजनीति में उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज मामलों को अक्सर बड़ा मुद्दा बनाया जाता है।
लेकिन सिर्फ मुकदमा दर्ज होना और अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाना, दोनों अलग बातें हैं।
शुभेंदु अधिकारी के मामले में भी यही स्थिति सामने आती है।
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि नंदीग्राम की जनता इस जानकारी को किस नजर से देखती है—राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा मानकर या विवादों का संकेत मानकर।
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क्या कोई कर्ज या लोन भी है?
हलफनामे के अनुसार शुभेंदु अधिकारी पर कोई बड़ा लोन या भारी देनदारी दर्ज नहीं है।
यानी उनकी घोषित संपत्ति पर फिलहाल किसी बड़े कर्ज का दबाव दिखाई नहीं देता।
यह जानकारी इसलिए अहम मानी जाती है क्योंकि इससे उम्मीदवार की वित्तीय स्थिरता और आर्थिक स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आती है।
हलफनामा क्यों है इतना अहम?
चुनावी हलफनामा सिर्फ नामांकन की औपचारिकता नहीं होता, बल्कि यह किसी उम्मीदवार की संपत्ति, आय, शिक्षा और कानूनी स्थिति का सार्वजनिक दस्तावेज होता है।
मतदाताओं के लिए यह जानना जरूरी होता है कि चुनाव लड़ने वाला व्यक्ति—
कितनी संपत्ति रखता है
उसकी आमदनी कितनी है
उस पर कितने मामले दर्ज हैं
उसके निवेश और आर्थिक संसाधन क्या हैं
और उसकी सार्वजनिक प्रोफाइल कितनी पारदर्शी है
इसी वजह से शुभेंदु अधिकारी का यह हलफनामा नंदीग्राम की सियासत में बड़ा दस्तावेज बन गया है।
निष्कर्ष
Suvendu Adhikari Affidavit 2026 ने पश्चिम बंगाल चुनाव की सियासी बहस को और तेज कर दिया है। करीब 85.87 लाख रुपये की घोषित संपत्ति, 25 लंबित मामले, कई बैंक खाते, जमीन-जायदाद, बचत योजनाओं में निवेश और बिना वाहन-ज्वेलरी वाली प्रोफाइल—इन सबने शुभेंदु अधिकारी को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
अब चुनावी मैदान में यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इस हलफनामे में दर्ज आंकड़ों को किस तरह लेते हैं।
फिलहाल इतना तय है कि नंदीग्राम की लड़ाई सिर्फ नारों की नहीं, बल्कि छवि, भरोसे और आंकड़ों की भी बड़ी जंग बन चुकी है।
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