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Assam Election 2026: भाजपा का बड़ा दांव, UCC से लेकर जमीन वापसी और 5 लाख करोड़ निवेश तक कई वादे
- Reporter 12
- 31 Mar, 2026
Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने 31 वादों वाला संकल्प पत्र जारी किया। इसमें UCC लागू करने, मूल निवासियों की जमीन की सुरक्षा, 5 लाख करोड़ निवेश और युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया है।
गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को अपना घोषणापत्र यानी ‘संकल्प पत्र’ जारी कर दिया। इस दस्तावेज के जरिए पार्टी ने राज्य की राजनीति, पहचान, विकास और रोजगार को केंद्र में रखकर कई बड़े वादे किए हैं। भाजपा ने दावा किया है कि अगर उसे फिर से जनादेश मिलता है, तो वह असम में मूल निवासियों की जमीन, विरासत और सम्मान की रक्षा को प्राथमिकता देगी।
पार्टी के संकल्प पत्र में कुल 31 प्रमुख वादे शामिल किए गए हैं। इनमें अवैध कब्जों से जमीन मुक्त कराने, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने, इंफ्रास्ट्रक्चर में 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश, और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करने जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। भाजपा ने इस घोषणापत्र को केवल चुनावी दस्तावेज नहीं, बल्कि अगले कार्यकाल की नीति दिशा बताने वाला रोडमैप बताया है।
भाजपा ने पहचान और जमीन को बनाया बड़ा चुनावी मुद्दा
इस बार भाजपा ने असम की स्थानीय अस्मिता और भूमि सुरक्षा को अपने सबसे मजबूत राजनीतिक मुद्दों में शामिल किया है। पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाए रखेगी। घोषणापत्र में यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और जमीन पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
यही कारण है कि संकल्प पत्र में जमीन से जुड़े मुद्दों को काफी प्रमुखता दी गई है। भाजपा का मानना है कि असम की राजनीति में स्थानीय आबादी की पहचान और संसाधनों की सुरक्षा लंबे समय से बड़ा सवाल रही है, और वह इस मुद्दे को निर्णायक रूप से संबोधित करना चाहती है।
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UCC और कानून-व्यवस्था पर भी भाजपा का जोर
घोषणापत्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का वादा भी शामिल है, जिसे भाजपा लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर अपने एजेंडे का हिस्सा बताती रही है। असम में इसे शामिल कर पार्टी ने संकेत दिया है कि वह राज्य में सामाजिक और कानूनी ढांचे को एकरूपता की दिशा में ले जाने का प्रयास करेगी।
इसके साथ ही भाजपा ने राज्य में शांति और स्थिरता को अपनी उपलब्धियों में गिनाया है। पार्टी का कहना है कि विकास तभी संभव है जब राज्य में सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन बना रहे। भाजपा ने अपने शासनकाल को असम में अपेक्षाकृत शांत और विकासोन्मुख दौर के रूप में पेश करने की कोशिश की है।
कांग्रेस पर हमला, भाजपा ने गिनाईं अपनी उपलब्धियां
घोषणापत्र जारी करते हुए भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला भी बोला। पार्टी की ओर से यह कहा गया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को केवल राजनीतिक नजरिए से देखा, लेकिन समग्र विकास पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया।
भाजपा ने दावा किया कि उसने पिछले एक दशक में राज्य की तस्वीर बदलने का काम किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जो काम पहले कई दशकों में नहीं हो पाया, उसे भाजपा सरकार ने सीमित समय में आगे बढ़ाया। इसी नैरेटिव के जरिए भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि असम अब केवल संघर्ष और अस्थिरता की पहचान नहीं, बल्कि निवेश, विकास और अवसरों का केंद्र बन रहा है।
युवाओं के लिए रोजगार और वापसी की राजनीति
भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में युवा मतदाताओं को भी खास तौर पर साधने की कोशिश की है। पार्टी का कहना है कि असम में अब ऐसे अवसर बन रहे हैं, जिनकी वजह से राज्य के युवा बाहर से वापस लौट रहे हैं। यह संदेश सीधे तौर पर रोजगार, उद्यमिता, स्टार्टअप और स्थानीय अवसरों की राजनीति से जुड़ा हुआ है।
पार्टी ने युवाओं के लिए कौशल विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक विस्तार की बात करते हुए यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि आने वाले वर्षों में असम को आर्थिक रूप से और मजबूत किया जाएगा। भाजपा का यह दांव खास तौर पर पहली बार वोट डालने वाले और शहरी-शिक्षित वर्ग के बीच असर डाल सकता है।
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अर्थव्यवस्था और विकास के आंकड़ों पर भी जोर
भाजपा ने घोषणापत्र के साथ राज्य की आर्थिक प्रगति को भी अपने पक्ष में बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि असम की अर्थव्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) और प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी को भाजपा ने अपनी सरकार की आर्थिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया।
पार्टी का कहना है कि यह केवल आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि सड़क, पुल, कनेक्टिविटी, निवेश, उद्योग और सार्वजनिक सुविधाओं में हुए विस्तार का भी परिणाम है। भाजपा ने यह भी स्पष्ट किया कि अगले कार्यकाल में 5 लाख करोड़ रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का लक्ष्य इसी विकास मॉडल को और तेज करने के लिए रखा गया है।
वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में शक्ति प्रदर्शन
घोषणापत्र जारी करने के मौके पर भाजपा ने राजनीतिक रूप से भी अपना शक्ति प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, पवित्र मार्गेरिटा, राज्य भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे।
इन नेताओं की एकजुट मौजूदगी से भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी चुनाव मैदान में पूरी मजबूती और रणनीति के साथ उतर रही है। असम में भाजपा पहले से सत्ता में है, इसलिए इस बार उसके लिए चुनाव केवल वादों का नहीं, बल्कि अपनी उपलब्धियों के आधार पर जनादेश दोहराने की चुनौती भी है।
9 अप्रैल को मतदान, 4 मई को आएंगे नतीजे
असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 9 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। चुनाव की तारीख नजदीक आते ही राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और अब सभी दल अपने-अपने एजेंडे, जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दों और विकास के दावों के साथ मैदान में उतर चुके हैं।
भाजपा का यह संकल्प पत्र साफ तौर पर यह दिखाता है कि पार्टी इस चुनाव को केवल सत्ता बनाए रखने की लड़ाई के रूप में नहीं, बल्कि पहचान, विकास, निवेश और राजनीतिक स्थिरता के बड़े नैरेटिव के साथ लड़ना चाहती है।
निष्कर्ष
असम चुनाव से पहले भाजपा ने अपने संकल्प पत्र के जरिए एक साथ कई मोर्चों पर दांव चला है। स्थानीय पहचान, जमीन की सुरक्षा, UCC, युवाओं के लिए रोजगार, और भारी निवेश जैसे मुद्दों को सामने रखकर पार्टी ने व्यापक वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। अब देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इस घोषणापत्र को कितना स्वीकार करते हैं और चुनावी मैदान में यह भाजपा के लिए कितना असरदार साबित होता है।
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