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भ्रष्टाचार पर EOU का बड़ा एक्शन, DSP और DRDA डायरेक्टर के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
- Reporter 12
- 31 Mar, 2026
Bihar News: बिहार में आर्थिक अपराध इकाई ने किशनगंज के SDPO गौतम कुमार और DRDA डायरेक्टर वैभव कुमार के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। दोनों अधिकारियों पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
पटना: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने मंगलवार सुबह बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अधिकारियों के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। इस कार्रवाई के दायरे में किशनगंज में तैनात एसडीपीओ गौतम कुमार और डीआरडीए सहरसा के निदेशक वैभव कुमार आए हैं। दोनों पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि विशेष अदालत से तलाशी वारंट मिलने के बाद अलग-अलग टीमों ने कई शहरों में दबिश दी।
आर्थिक अपराध इकाई की यह कार्रवाई बिहार में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का बड़ा हिस्सा मानी जा रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, दोनों अधिकारियों के खिलाफ पहले गुप्त सूचनाएं मिली थीं। इन सूचनाओं का सत्यापन करने के बाद ईओयू ने मामला दर्ज किया और फिर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर तलाशी अभियान शुरू किया।
सुबह-सुबह कई शहरों में एक साथ पड़ी रेड
मंगलवार की सुबह EOU की टीमें एक साथ कई ठिकानों पर पहुंचीं। इस छापेमारी की सबसे खास बात यह रही कि कार्रवाई को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया, ताकि किसी तरह की सूचना लीक न हो सके। जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने पटना, पूर्णिया, किशनगंज, सहरसा और मुजफ्फरपुर समेत कई स्थानों पर तलाशी शुरू की।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों अधिकारियों से जुड़े कुल 12 ठिकानों को जांच के दायरे में लिया गया है। इन स्थानों पर दस्तावेज, संपत्ति से जुड़े कागजात, बैंक लेन-देन, निवेश, नकद राशि और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि तलाशी के दौरान कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य एजेंसी के हाथ लग सकते हैं।
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SDPO गौतम कुमार पर करोड़ों की अधिक संपत्ति का आरोप
आर्थिक अपराध इकाई की जांच में किशनगंज के एसडीपीओ गौतम कुमार के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। एजेंसी को शुरुआती जांच में यह साक्ष्य मिला कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय से काफी अधिक संपत्ति अर्जित की है।
जांच के मुताबिक, गौतम कुमार के खिलाफ लगभग 1.94 करोड़ रुपये से अधिक की ऐसी संपत्ति सामने आई है, जो उनकी वैध आय के अनुपात से काफी ऊपर बताई जा रही है। प्रतिशत के हिसाब से यह उनकी ज्ञात आय से करीब 60 प्रतिशत से ज्यादा अधिक बताई गई है।
इसी आधार पर ईओयू ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया और फिर उनके पटना, पूर्णिया और किशनगंज स्थित कुल छह ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया। इन स्थानों पर टीमों द्वारा संपत्ति, निवेश और निजी वित्तीय गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है।
DRDA निदेशक वैभव कुमार भी रडार पर
ईओयू की दूसरी बड़ी कार्रवाई सहरसा DRDA के निदेशक वैभव कुमार के खिलाफ की जा रही है। जांच एजेंसी का दावा है कि उनके खिलाफ भी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के ठोस संकेत मिले हैं।
प्रारंभिक जांच में वैभव कुमार के पास लगभग 2.41 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्ति होने की बात सामने आई है। एजेंसी के अनुसार यह उनकी ज्ञात आय से करीब 78 प्रतिशत से अधिक है, जो अपने आप में काफी बड़ा अंतर माना जा रहा है।
इसी को आधार बनाकर आर्थिक अपराध इकाई ने उनके खिलाफ भी केस दर्ज किया और सहरसा तथा मुजफ्फरपुर स्थित कुल छह ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी। यहां से संपत्ति के दस्तावेज, जमीन-जायदाद से जुड़े कागजात, बैंकिंग लेन-देन और अन्य वित्तीय फाइलों की जांच की जा रही है।
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गुप्त सूचना से शुरू हुई कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला गुप्त शिकायतों और इनपुट से शुरू हुआ। आर्थिक अपराध इकाई को दोनों अधिकारियों के खिलाफ संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की जानकारी मिली थी। इसके बाद एजेंसी ने गोपनीय तरीके से उनके आय स्रोत, संपत्ति, निवेश और खर्च के पैटर्न की जांच शुरू की।
जब शुरुआती स्तर पर आरोपों में दम नजर आया, तब संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों को इकट्ठा कर विशेष निगरानी अदालत में पेश किया गया। अदालत से तलाशी का आदेश मिलने के बाद ही मंगलवार को यह कार्रवाई शुरू की गई। इससे यह भी साफ होता है कि एजेंसी इस मामले में पर्याप्त तैयारी के साथ आगे बढ़ रही है।
क्या-क्या खंगाल रही है EOU?
आर्थिक अपराध इकाई की टीम आमतौर पर ऐसे मामलों में केवल नकद राशि या कीमती सामान ही नहीं, बल्कि पूरे वित्तीय नेटवर्क की पड़ताल करती है। ऐसे में इस छापेमारी के दौरान निम्न बिंदुओं पर खास फोकस रहने की संभावना है:
जमीन और फ्लैट से जुड़े दस्तावेज
बैंक खातों और एफडी की जानकारी
लॉकर, बीमा और निवेश रिकॉर्ड
रिश्तेदारों या करीबी लोगों के नाम पर संपत्ति
डिजिटल डिवाइस, लैपटॉप, मोबाइल और ईमेल रिकॉर्ड
नकद लेन-देन और संदिग्ध ट्रांजैक्शन
अगर जांच में बेनामी संपत्ति, शेल निवेश या दूसरे लोगों के नाम पर संपत्ति रखने के संकेत मिलते हैं, तो यह मामला और गंभीर हो सकता है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा संदेश
बिहार में हाल के दिनों में आर्थिक अपराध इकाई और निगरानी एजेंसियों की सक्रियता लगातार बढ़ी है। सरकारी अधिकारियों, इंजीनियरों, ठेकेदारों और विभागीय कर्मियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामलों में कार्रवाई तेज हुई है। ऐसे में मंगलवार की यह छापेमारी एक सख्त संदेश के रूप में भी देखी जा रही है कि सरकारी पद पर रहते हुए कथित भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जित करने के मामलों को अब हल्के में नहीं लिया जाएगा।
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक पुलिस अधिकारी और एक प्रशासनिक पद पर तैनात अधिकारी दोनों जांच के घेरे में आए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि एजेंसियां अब विभिन्न विभागों में समान रूप से कार्रवाई कर रही हैं।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल छापेमारी और दस्तावेजी जांच जारी है। यदि तलाशी के दौरान मिले दस्तावेज, नकदी, निवेश रिकॉर्ड या संपत्ति के प्रमाण प्रारंभिक आरोपों को और मजबूत करते हैं, तो दोनों अधिकारियों के खिलाफ आगे अभियोजन, संपत्ति जब्ती, और विस्तृत चार्जशीट जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।
संभव है कि आने वाले दिनों में आर्थिक अपराध इकाई इस मामले में आधिकारिक प्रेस नोट या विस्तृत रिपोर्ट भी जारी करे, जिसमें छापेमारी के दौरान मिले सामान और दस्तावेजों की जानकारी सामने आए।
निष्कर्ष
बिहार में आर्थिक अपराध इकाई की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अब जांच एजेंसियां ज्यादा आक्रामक रुख अपना रही हैं। किशनगंज के SDPO गौतम कुमार और DRDA निदेशक वैभव कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि छापेमारी से क्या-क्या निकलता है और जांच आगे किस दिशा में जाती है।
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