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बिहार-झारखंड की अदालतों और एयरपोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला आरोपी मैसूर से गिरफ्तार
- Reporter 12
- 31 Mar, 2026
बिहार-झारखंड की अदालतों, एयरपोर्ट और संवेदनशील ठिकानों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपी श्रीनिवास लुईस को दिल्ली साइबर पुलिस ने मैसूर से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने 1100 से अधिक धमकी भरे ई-मेल भेजे थे।
पटना: बिहार और झारखंड की अदालतों, एयरपोर्ट और अन्य संवेदनशील स्थानों को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपी को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बने इस मामले में दिल्ली साइबर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए आरोपी श्रीनिवास लुईस को कर्नाटक के मैसूर से दबोच लिया। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब बिहार पुलिस भी उसे अपने कब्जे में लेने की तैयारी में जुट गई है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने लगातार ऐसे ई-मेल भेजकर न सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा, बल्कि कई बार अदालतों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर अफरा-तफरी की स्थिति भी पैदा कर दी। इस पूरे मामले को अब साइबर अपराध, दहशत फैलाने की साजिश और संवेदनशील संस्थानों को निशाना बनाने के गंभीर एंगल से देखा जा रहा है।
बिहार में अकेले 50 मामले, देशभर में 1100 से ज्यादा ई-मेल
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी ने सिर्फ बिहार या झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों में धमकी भरे ई-मेल भेजे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसने 1100 से अधिक ई-मेल अलग-अलग संस्थानों और संवेदनशील जगहों को भेजे। इनमें अदालतें, एयरपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण कार्यालय शामिल बताए जा रहे हैं।
अकेले बिहार में ही उसके खिलाफ करीब 50 मामले दर्ज हैं। कई बार इन धमकी भरे संदेशों की वजह से कोर्ट परिसरों और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा बढ़ानी पड़ी, तलाशी अभियान चलाना पड़ा और आम लोगों के बीच दहशत का माहौल बन गया। खासकर पटना सिविल कोर्ट समेत कई न्यायिक परिसरों को मिली धमकियों ने प्रशासन को बार-बार अलर्ट पर ला दिया था।
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VPN के सहारे छिपाता था पहचान, फिर भी नहीं बच सका
इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए वीपीएन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा था। वह ऐसा नेटवर्क इस्तेमाल करता था, जिससे उसका आईपी एड्रेस विदेशी लोकेशन का दिखाई दे। इस वजह से शुरुआती जांच में उसकी वास्तविक लोकेशन तक पहुंचना एजेंसियों के लिए आसान नहीं था।
लेकिन साइबर पुलिस और तकनीकी टीमों ने लगातार डिजिटल ट्रेल की जांच की। बताया जा रहा है कि डीएनएस लीक, सर्वर डेटा और अन्य साइबर तकनीकी इनपुट के आधार पर जांच एजेंसियों ने उसकी असली लोकेशन को ट्रैक कर लिया। इसी तकनीकी जांच के बाद पुलिस उसकी गतिविधियों तक पहुंची और आखिरकार मैसूर से गिरफ्तारी संभव हो सकी।
यह गिरफ्तारी इस बात का भी उदाहरण मानी जा रही है कि आधुनिक साइबर अपराधी कितनी भी चालाकी क्यों न बरतें, लेकिन तकनीकी जांच और डिजिटल फॉरेंसिक के जरिए उन्हें ट्रैक किया जा सकता है।
पटना पुलिस लाएगी रिमांड पर, होगी गहन पूछताछ
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब पटना पुलिस भी इस मामले में सक्रिय हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही एक टीम दिल्ली जाएगी और प्रोडक्शन वारंट के जरिए आरोपी को पटना लाया जाएगा। यहां उस पर दर्ज मामलों में उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी।
पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि उसने इतने बड़े पैमाने पर धमकी भरे ई-मेल क्यों भेजे, क्या वह अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे कोई और नेटवर्क भी सक्रिय था। इसके अलावा यह भी जांच होगी कि उसने किन-किन संस्थानों को निशाना बनाया और उसके पास संवेदनशील संस्थानों की ई-मेल आईडी और अन्य सूचनाएं कहां से आईं।
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कानून की पढ़ाई की, लेकिन सिस्टम से नाराज होकर बना साइबर सिरदर्द
पुलिस जांच में आरोपी के बारे में जो जानकारी सामने आई है, वह भी काफी चौंकाने वाली है। बताया जा रहा है कि 47 वर्षीय श्रीनिवास लुईस ने कानून की पढ़ाई की थी, लेकिन वह अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सका। वह लॉ के अंतिम वर्ष तक पहुंचा, लेकिन कोर्स पूरा नहीं कर पाया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी न्यायिक व्यवस्था और सिस्टम से नाराज बताया जा रहा है। इसी नाराजगी के चलते वह ई-मेल के जरिए बार-बार धमकियां देकर व्यवस्था को बाधित करने और सुरक्षा एजेंसियों को परेशान करने की कोशिश कर रहा था। फिलहाल वह मैसूर में अपनी मां के साथ रहता था और उसके बारे में यह भी जानकारी सामने आई है कि वह बेरोजगार था।
हालांकि पुलिस अभी उसके मानसिक, सामाजिक और डिजिटल व्यवहार से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसकी गतिविधियों के पीछे केवल व्यक्तिगत नाराजगी थी या कोई और मकसद भी छिपा था।
गंभीर धाराओं में केस, उम्रकैद तक की सजा संभव
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा उस पर आईटी एक्ट की भी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। खासतौर पर साइबर आतंकवाद से जुड़ी धाराओं के तहत यह मामला और गंभीर हो गया है।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, अगर जांच और सबूतों के आधार पर आरोप साबित होते हैं, तो आरोपी को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। यानी यह मामला केवल शरारत या अफवाह फैलाने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा सबक
यह पूरा मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चेतावनी और सबक दोनों की तरह देखा जा रहा है। डिजिटल युग में अब अपराध केवल हथियार, धमकी या भौतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रह गए हैं। ई-मेल, वीपीएन, फर्जी डिजिटल पहचान और साइबर टूल्स के जरिए भी बड़े स्तर पर दहशत फैलाई जा सकती है।
ऐसे मामलों ने यह साफ कर दिया है कि साइबर निगरानी, डिजिटल इंटेलिजेंस, सर्वर ट्रैकिंग और तकनीकी जांच अब कानून-व्यवस्था का बेहद अहम हिस्सा बन चुके हैं। यही वजह है कि इस गिरफ्तारी को केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता के रूप में भी देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
बिहार-झारखंड की अदालतों और एयरपोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपी की गिरफ्तारी ने एक बड़े साइबर खतरे का खुलासा किया है। लगातार ई-मेल के जरिए दहशत फैलाने वाला यह शख्स तकनीक के सहारे खुद को छिपाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन आखिरकार पुलिस की साइबर जांच के सामने टिक नहीं सका। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पूछताछ में और कौन-कौन से राज सामने आते हैं।
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