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पटना हाईकोर्ट ने खुले में मांस-मछली बिक्री पर जताई कड़ी नाराजगी, सरकार से हलफनामा मांगा

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पटना हाईकोर्ट ने राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में खुले में मांस-मछली बिक्री पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने राज्य सरकार और नगर निगम को बूचड़खानों की स्थिति सुधारने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया।

पटना: राजधानी पटना और आसपास के क्षेत्रों में नियमों की अवहेलना कर खुले में मांस-मछली की बिक्री पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और पटना नगर निगम से बूचड़खानों की स्थिति सुधारने और स्वच्छता मानकों के पालन की विस्तृत जानकारी पेश करने का आदेश दिया।

यह याचिका वरीय अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्रा द्वारा दायर की गई थी। याचिका में कहा गया कि शहर के कई हिस्सों में बिना मानक व्यवस्था के खुले में मांस-मछली बिक रही है, जिससे स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं।

अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राजधानी पटना के विभिन्न बूचड़खानों की वर्तमान स्थिति, स्वच्छता मानकों और नियमों के पालन पर विस्तृत हलफनामा अगली सुनवाई में पेश करें। अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

खुले में बिक्री से स्वास्थ्य और स्वच्छता पर गंभीर खतरा

सरकार ने एक माह पहले आदेश जारी किया था कि मांस-मछली की बिक्री केवल ढके हुए स्थान पर हो। इसके बावजूद, चैनपुर के गोला बाजार में दुकानदारों ने आदेश की अनदेखी कर फिर से खुले में मांस-मछली बेचना शुरू कर दिया।

स्थानीय लोगों ने बताया कि खुले में मांस-मछली रखने से तेज दुर्गंध फैल रही है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को परेशानी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

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इसके साथ ही, बिना ढके मांस-मछली रखने से संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

पूर्व में हुई कार्रवाई और अनदेखी

19 फरवरी को सिसवन के सीओ पंकज कुमार ने अभियान चलाकर गोला बाजार से अतिक्रमण हटवाया और खुले में संचालित मांस-मछली की दुकानों को हटवाया था।

लेकिन कुछ ही दिनों बाद दुकानदारों ने फिर से दुकानें लगानी शुरू कर दी, जिससे प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी हो रही है और स्वास्थ्य-सुरक्षा संबंधी खतरे बने हुए हैं।

निष्कर्ष

पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट किया है कि राजधानी में स्वास्थ्य और स्वच्छता की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य सरकार और नगर निगम को अब सख्त कार्रवाई और स्थायी समाधान सुनिश्चित करना होगा, ताकि शहरवासियों को दुर्गंध और संक्रमण से राहत मिल सके।

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