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सीतामढ़ी शौचालय घोटाला: 36 फर्जी लाभार्थियों की राशि हड़पने वाले कर्मचारी बर्खास्त

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सीतामढ़ी में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान में 36 फर्जी शौचालय बनाकर राशि हड़पने का मामला सामने आया। डीएम रिची पांडेय ने तीन सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की, दो को बर्खास्त और एक के खिलाफ राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी। पूरी जांच और कार्रवाई का विवरण पढ़ें।

सीतामढ़ी जिले में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत एक बड़ा भ्रष्टाचार मामला सामने आया है। सरकारी सेवकों ने 36 फर्जी लाभार्थियों के नाम पर शौचालय बनाकर योजना की राशि का बंदरबांट किया, जबकि जांच में यह सामने आया कि धरातल पर न तो शौचालय था और न ही कोई वास्तविक लाभार्थी।

यह मामला जिले के सुप्पी प्रखंड की मोहनी मंडल पंचायत से जुड़ा है। डीपीआरओ कमल सिंह ने बताया कि तत्कालीन बीडीओ, प्रखंड समन्वयक और कार्यपालक सहायक ने मिलकर कागज पर शौचालय निर्माण दिखाकर पूरी राशि आपस में बाँट ली।

जांच में अधिकारियों को आश्चर्य हुआ कि कागज पर जितने शौचालय दिखाए गए, धरातल पर उनका कोई अस्तित्व नहीं था, और न ही कोई लाभार्थी उपस्थित था।

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घोटाले का तरीका और जांच प्रक्रिया

जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सुप्पी बीडीओ ने लाभार्थियों का ठिकाना नहीं बताया और स्वयं वार्ड में जाकर भी किसी को नहीं पाया। इससे साफ़ हो गया कि पूरा मामला पूर्व नियोजित साजिश था।

इस प्रकार, सरकारी धन को योजनाओं के वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँचने से रोकते हुए, कागज पर शौचालय निर्माण दिखाकर राशि हड़पने की योजना बनाई गई थी।

जांच में यह भी सामने आया कि शिकायत 2024 में दर्ज की गई थी, लेकिन रिपोर्ट और निष्कर्ष तक प्रशासन को लगभग दो वर्ष लग गए।

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कौन हैं दोषी और प्रशासन की कार्रवाई

डीएम रिची पांडेय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया।

तत्कालीन बीडीओ – ग्रामीण विकास विभाग के तहत प्रपत्र 'क' में आरोप गठित कर राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

प्रखंड समन्वयक – सेवा से बर्खास्त।

कार्यपालक सहायक (एलएसबीए) – सेवा से बर्खास्त।

इसके अलावा, पूरी राशि की वसूली के लिए नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश भी दिया गया।

स्थानीय प्रतिक्रिया और प्रभाव

स्थानीय लोगों और अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की साजिश और भ्रष्टाचार से सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठता है।

स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे मामलों से जनता का सरकारी योजनाओं पर भरोसा कम होता है, और विकास परियोजनाओं का वास्तविक लाभ लाभार्थियों तक नहीं पहुँच पाता।

डीएम की कार्रवाई से यह संदेश गया कि भ्रष्टाचार करने वाले किसी भी सरकारी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

निष्कर्ष

सीतामढ़ी का यह मामला स्पष्ट रूप से दिखाता है कि कागज पर योजनाओं का लाभ दिखाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा सकता है, और इसके लिए निगरानी और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई बेहद जरूरी है।

डीएम की कार्रवाई से यह संदेश गया कि भ्रष्टाचार पर कोई रियायत नहीं होगी, और भविष्य में ऐसी साजिशों पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।

यह कार्रवाई सरकारी योजनाओं के वास्तविक लाभार्थियों तक लाभ पहुँचाने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की दिशा में अहम कदम साबित होगी।

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