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नीतीश कुमार छोड़ेंगे सीएम पद: भाजपा के पहले बिहार सरकार बनाने की तैयारी, सम्राट चौधरी की बागडोर तय
- Reporter 12
- 01 Apr, 2026
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही पद छोड़ने वाले हैं। भाजपा नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की तैयारी कर रही है। सम्राट चौधरी को संभावित उत्तराधिकारी बनाया जा रहा है, पीएम मोदी और अमित शाह भी समारोह में शामिल हो सकते हैं।
पटना। बिहार में राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आने वाला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब सीएम पद का मोह छोड़ चुके हैं और राज्यसभा सदस्यता लेने के बाद सत्ता की बागडोर भाजपा को सौंपने के लिए तैयार हैं। लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक समीकरण अब अंतिम रूप ले रहे हैं, और इस प्रक्रिया में कई संकेत ऐसे मिल रहे हैं जो साफ कर रहे हैं कि बिहार की अगली सरकार भाजपा के नेतृत्व में बनेगी, जबकि नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार ने विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया है, और राज्यसभा की सदस्यता की शपथ लेने की तारीख का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक सीएम पद से औपचारिक इस्तीफा भी दिया जाएगा। इससे पहले एक लंबा सवाल था कि क्या वे राज्यसभा की शपथ लेने से पहले पद छोड़ेंगे या बाद में? अब यह स्पष्ट हो गया है कि नीतीश भाजपा के संकेत का इंतजार कर रहे हैं।
भाजपा के पहले बिहार में सरकार बनाने की तैयारी
भाजपा इस अवसर को भव्य बनाने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई केंद्रीय नेता नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो सकते हैं। पांच राज्यों में चुनाव प्रचार के कारण शेड्यूल की समीक्षा जारी है।
जेडीयू और भाजपा के बीच चल रही बातचीत में साफ संकेत मिल रहे हैं कि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद के लिए तैयार किया जा रहा है। भाजपा ने उन्हें पहले प्रदेश अध्यक्ष और बाद में डेप्युटी सीएम की जिम्मेदारी दी। इस बार गृह विभाग का अधिकार भी उनके पास सौंपा गया। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने उन्हें बड़े मंच पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के साथ बोलने का मौका दिया।
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नीतीश का रणनीतिक निर्णय
नीतीश कुमार ने अपनी राजनीति और रणनीति के अनुरूप समय रहते विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देकर स्पष्ट संकेत दिया कि वे अब मुख्यमंत्री पद नहीं बनाए रखेंगे। राज्यसभा में जाने के बाद भी उनका राजनीतिक प्रभाव कायम रहेगा। जेडीयू के नेताओं का कहना है कि नीतीश के निर्देशों में ही बिहार की सरकार चलेगी, चाहे मुख्यमंत्री भाजपा का ही क्यों न हो।
राज्य में नए मुख्यमंत्री के चयन में जातीय समीकरण की भी अहम भूमिका होगी। बिहार का राजनीतिक परिदृश्य जातिवाद और वोट बैंक पर आधारित है। नीतीश कुमार ने कुर्मी-कोइरी समीकरण को स्थायी बना कर अपनी सत्ता मजबूत की है। सम्राट चौधरी भी कोइरी जाति से आते हैं, इसलिए नीतीश के राजनीतिक पैटर्न में वे आसानी से फिट बैठते हैं।
शपथ ग्रहण की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि भाजपा नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा राज्यसभा की शपथ से पहले कर सकती है। समारोह का आयोजन भव्य तरीके से होगा, जिसमें केंद्रीय नेता भी शामिल होंगे। नए मुख्यमंत्री के चुनाव की औपचारिकताएं अप्रैल के दूसरे हफ्ते तक पूरी होने की संभावना है।
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राजनीतिक परिपाटी और चौंकाने वाले नाम
भाजपा की परिपाटी यह है कि अक्सर ऐसा चेहरा मुख्यमंत्री बनता है, जिसकी सर्वाधिक चर्चा नहीं होती। पिछले उदाहरणों में हरियाणा में मनोहर खट्टर और झारखंड में रघुवर दास के नाम इस परिपाटी का उदाहरण हैं। बिहार में भी यही रणनीति अपनाई जा रही है। भाजपा ने सम्राट को पहले से प्रमोट किया और अब उन्हें सत्ता की बागडोर सौंपने की तैयारी कर रही है।
निष्कर्ष
नीतीश कुमार का यह कदम बिहार की राजनीति में नया अध्याय लिखेगा। उन्होंने सीएम पद का मोह छोड़कर भाजपा के साथ मिलकर सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने की राह आसान की है। इससे जेडीयू और भाजपा दोनों को संतुलित सत्ता मिलती है और नीतीश दिल्ली में सक्रिय रह सकते हैं। यह रणनीति जातीय समीकरण और राजनीतिक स्थिरता दोनों पर आधारित है।
भविष्य में बिहार में राजनीतिक स्थिरता और भाजपा की सत्ता मजबूत होगी। इसके साथ ही सम्राट चौधरी का नेतृत्व नई दिशा और नए राजनीतिक संतुलन के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
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