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फैसल रहमान की नीतीश से मुलाकात, बागी विधायक की सियासी गतिविधियां और नई समितियों में अध्यक्षता

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राजद के बागी विधायक फैसल रहमान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। इसके बाद उनके सियासी कदमों और नई समितियों में अध्यक्ष बनने की चर्चा तेज हो गई है।

पटना, आलम की खबर: 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में राजद के ढाका के विधायक फैसल रहमान ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था, जिसके कारण राजद के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा था। इस घटना के बाद से फैसल रहमान के राजनीतिक कदम और गतिविधियां चर्चा में रही हैं। गुरुवार को उन्होंने अचानक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की, जिसकी जानकारी फैसल रहमान ने स्वयं सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने पोस्ट में बताया कि यह मुलाकात ढाका क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को लेकर शिष्टाचार भेंट के रूप में हुई, जिसमें सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई और मुख्यमंत्री ने सभी प्रस्तावों पर सकारात्मक आश्वासन दिया। फैसल रहमान ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि इन योजनाओं के क्रियान्वयन से ढाका क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और आमजन को इसका व्यापक लाभ प्राप्त होगा।

इसी बीच, दो दिन पहले कांग्रेस के तीन बागी विधायक में से एक ने ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया कि यह मुलाकात क्षेत्र के विकास की योजना के लिए हुई थी। हालांकि राजद और कांग्रेस दोनों पक्षों ने बागी विधायकों के खिलाफ कोई लिखित कार्रवाई अभी तक विधानसभा अध्यक्ष को नहीं भेजी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में जल्द नई सरकार के गठन की प्रक्रिया चल रही है और ऐसे में बागी विधायक अपनी सियासी संभावनाओं का आंकलन कर रहे हैं। विशेषज्ञ सुनील पांडे के अनुसार, फैसल रहमान भी यह जानते हैं कि पार्टी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने वाली नहीं है, और राजद की केवल 25 विधायक होने के कारण उनका कदम महत्वपूर्ण राजनीतिक महत्व रखता है।

बागी विधायकों को इस बीच राजनीतिक ‘इनाम’ भी मिला है। विधानसभा की 19 समितियों का गठन वित्त वर्ष 2026-27 के लिए किया गया है, जिनका कार्यकाल 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक रहेगा। इसमें राजद के बागी विधायक फैसल रहमान और कांग्रेस के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह को एक-एक समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इस कदम को राजनीतिक विशेषज्ञ इस तरह भी देख रहे हैं कि यह नई सरकार के गठन और विभिन्न विभागों में नेताओं की भूमिका को सशक्त करने का संकेत है। नई समितियों में अध्यक्ष और सदस्य सूची विधानसभा अध्यक्ष की मंजूरी के बाद जारी की गई है, और इससे बागी विधायकों की सियासी स्थिति और उनके भविष्य की संभावनाओं पर भी नजर रखी जा रही है।

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