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तमिलनाडु में स्टालिन का वार, बोले- जितना आएंगे मोदी-शाह, उतनी बढ़ेगी हमारी जीत
- Reporter 12
- 03 Apr, 2026
तमिलनाडु चुनाव से पहले मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह और एआईएडीएमके पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेताओं के ज्यादा दौरे से डीएमके गठबंधन को और फायदा होगा।
चेन्नई, आलम की खबर। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की सरगर्मी अब अपने चरम पर पहुंचती दिख रही है। 23 अप्रैल को मतदान होना है और इससे पहले राज्य में राजनीतिक बयानबाजी का पारा तेजी से चढ़ गया है। इसी बीच मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चुनावी मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और एआईएडीएमके नेतृत्व पर एक साथ तीखा हमला बोलते हुए चुनावी लड़ाई को और धार दे दी है।
स्टालिन ने साफ शब्दों में कहा कि तमिलनाडु में भाजपा के बड़े नेताओं के जितने ज्यादा दौरे होंगे, उतना ही उनकी पार्टी डीएमके और उसके सहयोगियों को राजनीतिक फायदा मिलेगा। उन्होंने यह दावा भी किया कि राज्य में जनता का मूड इस बार भी उनके पक्ष में है और भाजपा तथा उसके सहयोगियों के प्रचार से डीएमके की बढ़त और मजबूत होगी।
चुनावी मंच से सीधा हमला
कोयंबटूर में आयोजित एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए एमके स्टालिन ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि तमिलनाडु की जनता अब केवल नारों और बड़े चेहरों से प्रभावित होने वाली नहीं है। उन्होंने भाजपा और एआईएडीएमके दोनों पर आरोप लगाया कि वे राज्य की असली जरूरतों और जनता के मुद्दों से दूर हैं, जबकि डीएमके सरकार ने जमीन पर काम करके दिखाया है।
स्टालिन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब तमिलनाडु में डीएमके, एआईएडीएमके और भाजपा के बीच मुकाबला लगातार दिलचस्प होता जा रहा है। राज्य में चुनावी लड़ाई केवल सीटों की नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व और जनविश्वास की भी बनती जा रही है।
यह भी पढ़ें: तमिलनाडु चुनाव में किसके पास है बढ़त, किसकी राह मुश्किल?
एआईएडीएमके पर घोषणापत्र की नकल का आरोप
मुख्यमंत्री स्टालिन ने अपने भाषण में एआईएडीएमके पर सबसे बड़ा आरोप यह लगाया कि उसने अपने चुनावी घोषणापत्र में डीएमके सरकार की योजनाओं की “नकल” की है। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं को आज विपक्ष चुनावी वादे के रूप में पेश कर रहा है, वे पहले से डीएमके की पहचान रही हैं।
उन्होंने खास तौर पर महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली योजना और सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा जैसी योजनाओं का जिक्र किया। स्टालिन ने कहा कि इन योजनाओं ने राज्य में सामाजिक और आर्थिक स्तर पर बड़ा असर डाला है और जनता ने इनका फायदा भी महसूस किया है। ऐसे में विपक्ष जब इन्हीं योजनाओं को अपने वादों के रूप में पेश करता है, तो यह उसकी राजनीतिक कमजोरी को दिखाता है।
उनका कहना था कि अगर किसी दल के पास अपनी सोच, अपनी नीति और अपना विजन नहीं हो, तो वह आखिरकार दूसरे की राह पर चलने को मजबूर हो जाता है। स्टालिन ने इस मुद्दे को जनता के बीच यह संदेश देने के लिए इस्तेमाल किया कि उनकी सरकार की योजनाएं इतनी प्रभावी रही हैं कि विपक्ष भी उन्हें अपनाने को मजबूर हो गया।
पलानीस्वामी पर भी साधा निशाना
एआईएडीएमके नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी पर भी स्टालिन ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जो लोग एक दशक तक सत्ता में रहे, वे अब चुनावी मंच पर अपने शासन की उपलब्धियों को गिनाने की स्थिति में नहीं हैं। स्टालिन ने आरोप लगाया कि एआईएडीएमके सरकार ने अपने पुराने चुनावी वादों को पूरा नहीं किया और जनता के सामने ठोस काम की सूची पेश करने में नाकाम रही।
उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु की जनता अब राजनीतिक भाषणों से आगे बढ़ चुकी है और वह पिछले शासन के प्रदर्शन और वर्तमान दावों—दोनों की तुलना कर रही है। ऐसे में केवल वादों के सहारे चुनावी मैदान में टिके रहना आसान नहीं होगा।
यह भी पढ़ें: तमिलनाडु में डीएमके बनाम एआईएडीएमके, किस मुद्दे पर टिकेगी लड़ाई?
पीएम मोदी पर चुनावी समय में सक्रियता का तंज
स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तंज कसते हुए कहा कि चुनाव आते ही तमिलनाडु भाजपा के शीर्ष नेताओं को ज्यादा याद आने लगता है। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि केंद्र के बड़े नेता चुनाव के वक्त राज्य में सक्रिय दिखाई देते हैं, लेकिन आम दिनों में तमिलनाडु के मुद्दों पर उतनी गंभीरता नहीं दिखती।
उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी भाजपा ने राज्य में जोरदार प्रचार किया था, लेकिन जनता ने डीएमके गठबंधन पर भरोसा जताया। स्टालिन ने दावा किया कि अगर इस बार भी भाजपा के बड़े नेता लगातार तमिलनाडु का दौरा करेंगे, तो इसका फायदा अंततः डीएमके को ही मिलेगा।
यह बयान राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए स्टालिन ने भाजपा के आक्रामक प्रचार अभियान को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश की है। यह रणनीति तमिलनाडु की क्षेत्रीय राजनीति के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां स्थानीय पहचान और राज्यीय स्वाभिमान हमेशा बड़ा मुद्दा रहे हैं।
200 सीटों के लक्ष्य का दावा
स्टालिन ने अपनी रैली में यह भी दावा किया कि डीएमके गठबंधन इस चुनाव में 234 में से 200 सीटों के लक्ष्य को हासिल कर सकता है। उनका यह बयान केवल आत्मविश्वास का प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उत्साहित करने की रणनीति भी माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, जब कोई बड़ा नेता चुनावी मंच से इस तरह का लक्ष्य रखता है, तो उसका मकसद केवल जीत का दावा करना नहीं होता, बल्कि संगठन के भीतर ऊर्जा भरना और विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना भी होता है। स्टालिन का यह बयान भी उसी दिशा में देखा जा रहा है।
भाजपा पर तमिल पहचान को लेकर हमला
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर यह आरोप भी लगाया कि पार्टी तमिलनाडु, तमिल भाषा और तमिल संस्कृति को लेकर दोहरा रवैया अपनाती है। उन्होंने कहा कि जब भाजपा नेता राज्य में आते हैं, तो वे तमिल संस्कृति और भाषा के प्रति सम्मान की बातें करते हैं, लेकिन दूसरे राज्यों में उनका राजनीतिक व्यवहार और बयान अलग दिखाई देता है।
स्टालिन ने इसी मुद्दे को चुनावी बहस का हिस्सा बनाते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि डीएमके ही वह राजनीतिक शक्ति है, जो तमिल अस्मिता और राज्य के अधिकारों की वास्तविक लड़ाई लड़ती है। तमिलनाडु की राजनीति में यह मुद्दा बेहद संवेदनशील और प्रभावशाली माना जाता है, इसलिए स्टालिन ने इसे पूरी ताकत से उठाया।
यह भी पढ़ें: तमिल अस्मिता और भाषा की राजनीति, चुनाव में कितना असर?
राज्यपाल पर भी तंज
अपने भाषण में स्टालिन ने राज्यपाल आर.एन. रवि को लेकर भी परोक्ष टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पहले कुछ संवैधानिक पदों का इस्तेमाल उनकी सरकार के खिलाफ राजनीतिक हथियार की तरह किया जा रहा था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने भाजपा और केंद्र सरकार पर परोक्ष रूप से निशाना साधा।
हालांकि, उन्होंने सीधे किसी संवैधानिक टकराव की बात नहीं की, लेकिन उनके बयान से साफ था कि वह यह दिखाना चाहते हैं कि तमिलनाडु की राजनीति में अब भाजपा की रणनीति पहले जितनी प्रभावी नहीं रही।
चुनावी लड़ाई अब और तेज
तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होना है और उससे पहले राजनीतिक बयानबाजी, रैलियों और जनसभाओं का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। डीएमके जहां अपने काम और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दे पर जनता के बीच जा रही है, वहीं भाजपा और एआईएडीएमके विपक्षी मोर्चे के रूप में उसे चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं।
ऐसे में स्टालिन के ताजा बयान ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु का चुनावी मुकाबला और तीखा होने वाला है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जनता इन आरोप-प्रत्यारोपों और राजनीतिक दावों के बीच किसके पक्ष में अपना भरोसा जताती है।
निष्कर्ष
एमके स्टालिन का यह हमला केवल एक चुनावी भाषण नहीं, बल्कि तमिलनाडु की पूरी सियासी लड़ाई की दिशा तय करने वाला संदेश भी माना जा रहा है। उन्होंने भाजपा, अमित शाह, पीएम मोदी और एआईएडीएमके—सभी को एक साथ निशाने पर लेकर यह साफ संकेत दिया है कि डीएमके इस बार चुनाव को केवल सत्ता बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व की जंग के रूप में लड़ रही है।
अब चुनावी रण पूरी तरह सज चुका है। अगले कुछ दिन यह तय करेंगे कि तमिलनाडु में जनता राष्ट्रीय चेहरों की आक्रामक मौजूदगी को कितना स्वीकार करती है और क्षेत्रीय राजनीति के पुराने समीकरण इस बार किस हद तक कायम रहते हैं।
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