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बिहार में 9 अप्रैल तक मौसम अलर्ट, आंधी-बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी

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बिहार में मौसम ने करवट ले ली है। 9 अप्रैल तक कई जिलों में आंधी, बारिश, गरज-चमक और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है। गया, जमुई, चंपारण, पटना समेत कई इलाकों में तेज हवाओं और ठनका गिरने की आशंका है।

पटना आलम की खबर:पटना: बिहार में भीषण गर्मी से परेशान लोगों के लिए मौसम अब राहत और आफत, दोनों साथ लेकर आने वाला है। पिछले दो दिनों से चटक धूप, गर्म हवाओं और तेज तपिश से लोग बेहाल थे, लेकिन अब राज्य में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने जा रहा है। मौसम विभाग ने साफ संकेत दिया है कि 9 अप्रैल तक बिहार के कई जिलों में आंधी, बारिश, गरज-चमक और ओलावृष्टि का असर देखने को मिलेगा। कुछ इलाकों में तेज हवाएं 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं, जबकि कई जिलों में बिजली गिरने और फसलों को नुकसान की आशंका भी जताई गई है।

शनिवार को राज्य के कई हिस्सों में तापमान भले 40 डिग्री से नीचे रहा, लेकिन गर्मी का असर कम नहीं था। तेज धूप और गर्म हवा ने लोगों को झुलसा देने वाला अहसास कराया। अब मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ और आसपास के राज्यों से बिहार की ओर बढ़ रहे बादलों के बड़े समूह के कारण अगले कुछ दिनों में मौसम तेजी से करवट लेगा। इसका असर उत्तर बिहार, दक्षिण बिहार, सीमांचल और मगध—लगभग पूरे प्रदेश में अलग-अलग स्तर पर दिखाई देगा।

मौसम विभाग के अनुसार आज यानी 5 अप्रैल को बिहार के कई जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना है। खासकर झारखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे जिलों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवा का असर पहले दिखाई देगा। गया, बांका, जमुई, नवादा, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान और सारण जैसे जिलों में आज बारिश के साथ तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की गई है। इन इलाकों में अचानक मौसम बदल सकता है, जबकि बाकी जिलों में बादल और धूप के बीच उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि 6 अप्रैल को यह दायरा और बढ़ जाएगा। पूर्वी बिहार के कुछ जिलों को छोड़कर राज्य के अधिकतर हिस्सों में आंधी और बारिश का असर दिखाई देगा। इस दौरान गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका भी बनी रहेगी। कई जगहों पर मौसम अचानक बिगड़ सकता है, इसलिए लोगों को खुले मैदान, खेत, ऊंचे पेड़ और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

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7 अप्रैल से बिहार में मौसम और ज्यादा सक्रिय हो सकता है। इस दिन दक्षिण बिहार और उत्तर-पूर्वी बिहार के जिलों में खराब मौसम का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक गया, औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर जैसे इलाकों में ओलावृष्टि की भी आशंका है। राज्य के कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि बाकी जिलों में येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। इसका मतलब है कि इस दौरान मौसम सिर्फ सामान्य बारिश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तेज हवा, बिजली, ओले और अचानक मौसम बिगड़ने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

8 अप्रैल को मौसम का सबसे तीखा असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक इस दिन बिहार के बड़े हिस्से में तेज आंधी, बारिश, गरज-चमक और ओलावृष्टि का संयुक्त असर दिख सकता है। पटना, गया, कैमूर, बांका, बक्सर, भागलपुर समेत दक्षिण बिहार के कई जिलों में ओले गिरने की प्रबल संभावना जताई गई है। इस दौरान ठनका गिरने का खतरा भी ज्यादा रहेगा। यही वजह है कि इस दिन को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

9 अप्रैल तक मौसम के खराब बने रहने की संभावना है। हालांकि 10 अप्रैल से आसमान साफ होने के संकेत दिए गए हैं, लेकिन उससे पहले बिहार के लोगों को कुछ दिन तक मौसम की इस उथल-पुथल के लिए तैयार रहना होगा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक यह बदलाव सिर्फ बारिश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तापमान में गिरावट भी दर्ज की जाएगी।

फिलहाल बिहार के कई जिलों में तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। शेखपुरा में शनिवार को अधिकतम तापमान 38.4°C दर्ज किया गया, जबकि पटना में 37.8°C, गया में 37.6°C, भागलपुर में 37.5°C और पूर्णिया में 35.8°C तापमान रिकॉर्ड किया गया। उत्तर बिहार के कई हिस्सों में तापमान थोड़ा कम रहा, लेकिन उमस और गर्मी का असर लगभग पूरे राज्य में महसूस किया गया।

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में दिन के तापमान में अच्छी-खासी गिरावट आ सकती है। 8 अप्रैल तक कई जिलों में अधिकतम तापमान 25°C से 30°C के बीच पहुंचने की संभावना है। यानी लोगों को गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन इसके साथ आंधी, बारिश, बिजली और ओलावृष्टि की आफत भी बनी रहेगी।

प्रमुख शहरों का तापमान और AQI

पटना: अधिकतम 37.8°C | न्यूनतम 25.5°C | AQI 133

मुजफ्फरपुर: अधिकतम 36.0°C | न्यूनतम 23.6°C | AQI 146

गया: अधिकतम 37.6°C | न्यूनतम 20.6°C | AQI 121

पूर्णिया: अधिकतम 35.8°C | न्यूनतम 23.3°C | AQI 115

भागलपुर: अधिकतम 37.5°C | न्यूनतम 23.2°C | AQI 83

(ये आंकड़े शनिवार के हैं।)

इस मौसम का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ सकता है। खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए ठनका और तेज हवा सबसे बड़ा खतरा बन सकती है। अक्सर देखा गया है कि अचानक मौसम खराब होने पर खेतों में मौजूद लोग बिजली गिरने की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में कृषि कार्य से जुड़े लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम बिगड़ते ही खेत, बगीचे, खुले मैदान और जलभराव वाले इलाकों से तुरंत सुरक्षित जगह पर पहुंचना जरूरी है।

किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि कटे हुए अनाज और फसलों को खुले में न छोड़ें। गेहूं, दलहन, सब्जी और अन्य रबी फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखने की जरूरत है। अगर फसल कट चुकी है तो उसे तिरपाल या छत के नीचे सुरक्षित कर लें। जिन खेतों में अभी फसल खड़ी है, वहां सिंचाई और दवा छिड़काव जैसे काम फिलहाल मौसम सामान्य होने तक टालना बेहतर रहेगा। गरमा सब्जियों की बुआई भी फिलहाल रोकने की सलाह दी गई है।

पशुपालकों के लिए भी यह समय सावधानी का है। पशुओं को खुले में या पेड़ों के नीचे बांधना खतरनाक हो सकता है। तेज हवा, बिजली और बारिश के दौरान उन्हें सुरक्षित और ढंकी हुई जगह पर रखना जरूरी है। साथ ही गर्मी और उमस के बीच पशुओं को साफ और ताजा पानी नियमित अंतराल पर देना चाहिए, ताकि वे डिहाइड्रेशन का शिकार न हों।

बदलते मौसम का असर सिर्फ खेती और जनजीवन पर ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। धूप, उमस, बारिश और तापमान में अचानक गिरावट के बीच वायरल बुखार, सर्दी-खांसी, गले की समस्या, फंगल इंफेक्शन और पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है।

डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के मौसम में पर्याप्त पानी पीना, ताजा भोजन करना, भीगने के बाद तुरंत कपड़े बदलना और साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। बाहर खुले में बिकने वाले कटे फल, बासी खाना और खुला पेय पदार्थ लेने से बचना चाहिए। अगर बारिश में भीग जाएं तो तुरंत शरीर सुखाएं, क्योंकि गीले कपड़ों में ज्यादा देर रहने से सर्दी, बुखार और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

मच्छरों का खतरा भी ऐसे मौसम में तेजी से बढ़ता है। बारिश और जलभराव के कारण डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर और गमलों की नियमित सफाई करें और रात में मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले चार-पांच दिन बिहार के लिए बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं। ऐसे में लोगों को मौसम से जुड़ी चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए और अनावश्यक रूप से खुले इलाकों में जाने से बचना चाहिए। खासकर बिजली चमकने, तेज हवा चलने और गरज के दौरान घर के भीतर रहना सबसे सुरक्षित विकल्प होगा।

कुल मिलाकर, बिहार में गर्मी से राहत जरूर मिलने वाली है, लेकिन यह राहत मौसम की एक बड़ी हलचल के साथ आएगी। 9 अप्रैल तक राज्य के कई हिस्सों में आंधी, बारिश, ओलावृष्टि और ठनका की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में आने वाले कुछ दिन सावधानी, सतर्कता और मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखने के हैं।

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