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सारण DM की संवेदनशील पहल, इंतजार कर रहे बुजुर्ग की खुद सुनी फरियाद

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छपरा में सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए कार्यालय के बाहर इंतजार कर रहे एक बुजुर्ग की समस्या खुद सुनी और मौके पर ही अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए।

छपरा आलम की खबर:छपरा: प्रशासनिक दफ्तरों में आम लोगों का घंटों इंतजार करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन सारण जिला मुख्यालय में शनिवार को जो दृश्य देखने को मिला, उसने सरकारी व्यवस्था की एक अलग और सकारात्मक तस्वीर पेश कर दी। सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने अपने कार्यालय में बैठकर फाइलों और समीक्षा बैठकों के बीच एक ऐसा कदम उठाया, जिसने न केवल वहां मौजूद लोगों को प्रभावित किया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि अगर प्रशासन चाहे तो संवेदनशीलता और जवाबदेही सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहती।

शनिवार को जिलाधिकारी अपने कार्यालय कक्ष में विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा कर रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर कार्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे की स्क्रीन पर पड़ी। कैमरे में एक बुजुर्ग व्यक्ति हाथ में आवेदन लिए काफी देर से बाहर बैठा नजर आया। वह किसी अधिकारी से मिलने और अपनी समस्या रखने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहा था। आमतौर पर ऐसे दृश्य सरकारी दफ्तरों में नजरअंदाज हो जाते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।

जैसे ही जिलाधिकारी ने यह देखा, उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के तत्काल अपने कक्ष से बाहर निकलने का निर्णय लिया। वे सीधे उस बुजुर्ग व्यक्ति के पास पहुंचे और बेहद आत्मीयता के साथ उसकी बात सुनी। वहां मौजूद लोग यह देखकर कुछ क्षण के लिए हैरान रह गए कि जिले का सबसे बड़ा अधिकारी खुद एक फरियादी के पास पहुंचकर उसकी समस्या सुन रहा है।

बुजुर्ग ने जिलाधिकारी को अपनी परेशानी बताई और हाथ में रखा आवेदन उन्हें सौंप दिया। बताया जा रहा है कि वह काफी समय से संबंधित अधिकारियों से मिलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पा रही थी। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया और वहीं खड़े-खड़े संबंधित अधिकारियों को बुला लिया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मामले का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए और फरियादी को बेवजह चक्कर न लगवाए जाएं।

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जिलाधिकारी की इस पहल का असर सिर्फ उस बुजुर्ग व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा। कार्यालय परिसर में मौजूद अन्य लोगों ने भी इस दृश्य को देखा और प्रशासन के इस मानवीय चेहरे की सराहना की। कहा जा रहा है कि जब डीएम खुद बाहर आकर उस बुजुर्ग से मिले, तो वह व्यक्ति भावुक भी हो गया। उसके चेहरे पर राहत साफ दिखाई दे रही थी, मानो उसे सिर्फ समस्या के समाधान की उम्मीद ही नहीं, बल्कि व्यवस्था पर भरोसे की नई वजह भी मिल गई हो।

यह घटना इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि अक्सर आम लोगों की शिकायत रहती है कि सरकारी कार्यालयों में सुनवाई की प्रक्रिया धीमी और औपचारिक होती है। लोग आवेदन लेकर आते हैं, घंटों इंतजार करते हैं, कई टेबलों के चक्कर लगाते हैं और कई बार बिना समाधान लौट जाते हैं। ऐसे माहौल में यदि कोई जिलाधिकारी खुद पहल करके बाहर आए और समस्या सुनकर तत्काल निर्देश दे, तो यह निश्चित रूप से एक अलग संदेश देता है।

जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने सिर्फ एक फरियाद नहीं सुनी, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली के भीतर मौजूद उस संवेदनशीलता को सामने रखा, जिसकी अपेक्षा आम लोग हमेशा से करते रहे हैं। प्रशासन की असली कसौटी सिर्फ योजनाओं की घोषणा या बैठकों की संख्या नहीं होती, बल्कि यह भी होता है कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति की समस्या को कितनी तत्परता और इंसानियत के साथ सुना और सुलझाया जाता है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह भी चर्चा रही कि जिलाधिकारी ने अधिकारियों को भविष्य के लिए भी सतर्क रहने को कहा, ताकि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को बेवजह लंबे समय तक प्रतीक्षा न करनी पड़े। यह निर्देश अपने आप में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे साफ संकेत जाता है कि प्रशासन सिर्फ प्रतिक्रिया देने के बजाय व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में भी सोच रहा है।

छपरा में घटी यह घटना छोटी जरूर लग सकती है, लेकिन इसका संदेश बहुत बड़ा है। जब प्रशासनिक पद पर बैठे लोग अपने दायरे से बाहर निकलकर सीधे जनता तक पहुंचते हैं, तब व्यवस्था में भरोसा मजबूत होता है। ऐसे कदम यह एहसास कराते हैं कि सरकारी दफ्तर सिर्फ आदेश देने की जगह नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं के समाधान का केंद्र भी बन सकते हैं।

आज जब अक्सर सिस्टम पर सवाल उठते हैं, ऐसे में सारण के जिलाधिकारी का यह कदम उम्मीद की एक सकारात्मक तस्वीर बनकर सामने आया है। यह घटना बताती है कि संवेदनशील प्रशासन किसी बड़े भाषण या अभियान से नहीं, बल्कि छोटे लेकिन असरदार मानवीय फैसलों से बनता है। छपरा की यह तस्वीर फिलहाल इसी वजह से चर्चा में है, क्योंकि यहां एक अधिकारी ने सिर्फ अपना पद नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी भी निभाई।

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