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केशोपुर में चूल्हे की चिंगारी बनी तबाही, सिलेंडर धमाकों के बीच 18 घर राख

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मुजफ्फरपुर के सकरा थाना क्षेत्र के केशोपुर गांव में भीषण आग लगने से 18 घर जलकर राख हो गए। सिलेंडर फटने से आग और भड़क गई। दमकल टीम ने ढाई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

मुजफ्फरपुर/आलम की खबर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां सकरा थाना क्षेत्र के केशोपुर गांव में रविवार की शाम एक मामूली चिंगारी ने कुछ ही देर में पूरे मोहल्ले को तबाही के मंजर में बदल दिया। देखते ही देखते आग ने ऐसा विकराल रूप ले लिया कि 18 से अधिक घर जलकर राख हो गए। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई घरों में रखे घरेलू गैस सिलेंडर भी एक के बाद एक फटने लगे, जिससे पूरे इलाके में दहशत और अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में 20 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जलकर खाक हो गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस भीषण अग्निकांड में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन गांव के कई परिवार एक ही शाम में बेघर और बर्बाद हो गए।

बताया जा रहा है कि रविवार की शाम गांव में सामान्य दिनचर्या चल रही थी। लोग अपने-अपने घरों में थे और कई परिवार रात के भोजन की तैयारी में जुटे हुए थे। इसी दौरान एक घर में चूल्हे से उठी चिंगारी ने अचानक आग पकड़ ली। शुरुआत में लोगों ने इसे सामान्य आग समझकर अपने स्तर पर बुझाने की कोशिश की, लेकिन तेज हवा और आसपास ज्वलनशील सामान होने के कारण लपटें तेजी से फैलने लगीं। कुछ ही मिनटों में आग ने बगल के घरों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे गांव को दहला कर रख दिया।

जब आग पड़ोसी घरों तक पहुंची, तो वहां रखे एलपीजी सिलेंडर गर्मी की वजह से फटने लगे। एक के बाद एक हुए इन धमाकों ने आग को और ज्यादा भयंकर बना दिया। धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग घबराकर घरों से बाहर भागने लगे। पूरा गांव चीख-पुकार, धुएं और लपटों से भर गया। कुछ लोग अपने घरों से जरूरी सामान निकालने की कोशिश करते रहे, तो कई परिवार जान बचाकर किसी तरह खुले स्थानों की ओर भागे। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोगों को अपनी पूरी गृहस्थी बचाने का मौका तक नहीं मिला।

इस भीषण अग्निकांड में जिन घरों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, उनमें अनाज, कपड़े, बर्तन, फर्नीचर, जरूरी दस्तावेज, नकदी और घरेलू सामान तक जलकर राख हो गया। गांव के कई परिवार अब अचानक खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। जिन घरों में सालों की मेहनत से गृहस्थी बसाई गई थी, वहां अब सिर्फ जली हुई दीवारें, राख और मलबा नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई परिवारों की स्थिति ऐसी हो गई है कि उनके पास पहनने के कपड़े और खाने तक की समस्या खड़ी हो गई है।

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घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग को खबर दी गई, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि दमकल की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंचीं। आग की गंभीरता को देखते हुए पहले वैशाली जिले के बालोगांव से अग्निशमन वाहन मौके पर पहुंचा, जिसके बाद मुजफ्फरपुर से भी दमकल की टीम भेजी गई। दोनों जिलों की संयुक्त टीम ने कड़ी मशक्कत करते हुए करीब ढाई घंटे बाद आग पर काबू पाया। तब तक गांव का एक बड़ा हिस्सा जल चुका था और कई परिवारों की पूरी जिंदगी राख में बदल चुकी थी।

अग्निशमन विभाग की ओर से बताया गया कि आग की शुरुआत चूल्हे की चिंगारी से हुई और बाद में सिलेंडर फटने के कारण स्थिति बेहद गंभीर हो गई। अधिकारियों के अनुसार, रास्ते में ट्रैफिक जाम और दूरी के कारण दमकल वाहनों को पहुंचने में कुछ देरी हुई। हालांकि ग्रामीण इस तर्क से संतुष्ट नहीं दिखे। उनका कहना है कि अगर राहत दल थोड़ी भी जल्दी पहुंच जाता, तो नुकसान की मात्रा इतनी बड़ी नहीं होती। ग्रामीणों का गुस्सा इस बात को लेकर भी है कि गांवों में अक्सर इस तरह की घटनाएं होती हैं, लेकिन फायर सेफ्टी को लेकर जागरूकता और त्वरित व्यवस्था अब भी बेहद कमजोर है।

इस हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। गांवों में ज्यादातर घरों में रसोई के पास लकड़ी, भूसा, प्लास्टिक, कपड़े और अन्य ज्वलनशील सामान रखा रहता है। ऐसे में एक छोटी-सी चिंगारी भी बड़े हादसे में बदल सकती है। खासकर गर्मी के मौसम और सूखे माहौल में आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अगर समय रहते आग पर काबू न पाया जाए, तो वह पूरे टोले या मोहल्ले को अपनी चपेट में ले सकती है, जैसा कि केशोपुर में हुआ।

घटना की सूचना मिलते ही अंचल अधिकारी को पूरे मामले से अवगत करा दिया गया है और अब क्षति के आकलन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को राहत देने और सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है। हालांकि, जिन लोगों की पूरी जिंदगी कुछ ही मिनटों में जलकर खत्म हो गई, उनके लिए यह राहत फिलहाल सिर्फ एक उम्मीद भर है। गांव के लोग अब प्रशासन से तत्काल मुआवजा, राशन, कपड़े और अस्थायी आश्रय की मांग कर रहे हैं, ताकि प्रभावित परिवार दोबारा अपने जीवन को किसी तरह पटरी पर ला सकें।

यह घटना केवल एक अग्निकांड नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की उस असुरक्षा की भी तस्वीर है, जहां एक मामूली लापरवाही या छोटी दुर्घटना कुछ ही मिनटों में पूरे परिवारों की दुनिया उजाड़ देती है। केशोपुर गांव के लोगों ने अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत, सपने और जीवनभर की जमा-पूंजी को जलते हुए देखा है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आग कैसे लगी, बल्कि यह भी है कि क्या प्रशासन और सिस्टम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा या फिर हर बार सिर्फ राख के ढेर पर संवेदना और मुआवजे की घोषणा ही होती रहेगी।

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