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बिहार का अगला सीएम: सम्राट चौधरी सबसे आगे

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बिहार में मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों की सूची में सम्राट चौधरी सबसे आगे दिख रहे हैं। भाजपा की चौंकाने वाली नीति और नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने राजनीतिक माहौल को और रोचक बना दिया है।

पटना/आलम की खबर:बिहार में मुख्यमंत्री पद के लिए सियासी कयास तेज हो गए हैं। एनडीए की आगामी सरकार में नेतृत्व की दिशा पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले और जेडीयू के नेताओं की बेटे निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग को उन्होंने ठुकरा दिया, यह साफ संकेत है कि भाजपा बिहार में निर्णायक भूमिका निभाएगी। इसके बाद से नए मुख्यमंत्री के संभावित चेहरों पर चर्चा जोरों पर है।

राजनीतिक विशेषज्ञों और मीडिया में चल रही चर्चाओं के अनुसार, मौजूदा डेप्युटी सीएम सम्राट चौधरी सबसे आगे हैं। इसके बाद केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और दूसरे डेप्युटी सीएम विजय सिन्हा के नाम की चर्चा की जा रही है। वहीं, सोशल मीडिया पर एक नया नाम अभय गिरि भी उभर कर सामने आया है, हालांकि यह चर्चा अभी अनौपचारिक है। विश्लेषक इसे इसलिए पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे, क्योंकि भाजपा ऐसे अप्रत्याशित नामों से कई बार चौंकाती रही है।

इतिहास इस बात का गवाह है कि भाजपा ने समय-समय पर मुख्यमंत्री के चयन में चौंकाने वाला प्रयोग किया है। मध्य प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कुशल रणनीति ने पार्टी को हारती बाजी जीतने में मदद की। लेकिन इसके बाद भाजपा ने शिवराज को केंद्र में मंत्री बना दिया और उनकी जगह डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया। यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि भाजपा हमेशा दूरगामी रणनीति पर काम करती है।

2014 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी की लहर ने भाजपा को देशव्यापी सफलता दिलाई थी। इसके बाद विधानसभा चुनावों में भी भाजपा ने नए और अप्रत्याशित चेहरों को मुख्यमंत्री बनाने का प्रयोग किया। हरियाणा में मनोहर खट्टर और झारखंड में रघुवर दास के नाम अप्रत्याशित थे। इसी फार्मूले को दिल्ली में भी लागू किया गया, जब रेखा गुप्ता का नाम बिना किसी चर्चा के मुख्यमंत्री बना। इस रणनीति से भाजपा ने विरोधियों को चौंकाया और सत्ता पर कब्जा किया।

बिहार में भी अब इसी तरह की चर्चा है। नीतीश कुमार की पसंद माने जाने वाले सम्राट चौधरी को ही संभावित मुख्यमंत्री के रूप में देखा जा रहा है। इसके दो मुख्य कारण हैं। पहला, हाल ही संपन्न अपनी “समृद्धि यात्रा” में नीतीश कुमार ने बार-बार संकेत दिए कि उनके विकल्प के रूप में सम्राट ही सबसे उपयुक्त हैं। सम्राट चौधरी फिलहाल डेप्युटी सीएम हैं और गृह विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय उन्हें सौंपे गए हैं। नीतीश के साथ उनकी ट्यूनिंग और काम की केमिस्ट्री भी अच्छी रही है। भाजपा ने अब तक यही संकेत दिया है कि बिहार में नीतीश के विकल्प वे ही होंगे।

सम्राट चौधरी पहले नेता प्रतिपक्ष और फिर पार्टी की कमान संभाल चुके हैं। दूसरी बार उन्हें डेप्युटी सीएम बनाने के साथ बड़े प्रमोशन में गृह विभाग सौंपना भी उनके अनुभव और क्षमताओं को दर्शाता है। इसके बावजूद, बिहार में यह भी ध्यान देने योग्य है कि कर्पूरी ठाकुर के बाद कोई भी डेप्युटी सीएम कभी मुख्यमंत्री नहीं बना। सुशील मोदी और तेजस्वी यादव के उदाहरण इसे स्पष्ट करते हैं। सुशील मोदी कई वर्षों तक डेप्युटी रहे लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन सके। तेजस्वी यादव भी दो टर्म डेप्युटी सीएम रहे, लेकिन उनके प्रयासों के बावजूद उन्हें मौका नहीं मिला।

इस बार बिहार में स्थिति थोड़ी अलग है। भाजपा के पास दो डेप्युटी सीएम हैं, दोनों पार्टी कोटे के। इनमें से किसी एक को ही मौका दिया जा सकता है। तमाम सूत्रों और सियासी संकेतों के आधार पर विश्लेषक मानते हैं कि दोनों में से सम्राट चौधरी को ही भाजपा बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की संभावना सबसे अधिक है। संदेह केवल इस बात को लेकर है कि भाजपा चौंकाने वाला फैसला कर सकती है। परन्तु अगर बिहार में अप्रत्याशित निर्णय हुआ, तो यह भी मान लेना चाहिए कि भाजपा ने अपने इस प्रयोग को नीति के तौर पर अपनाया है।

राजनीतिक माहौल में कई अन्य नाम भी उभर कर आए हैं। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और डेप्युटी सीएम विजय सिन्हा को लेकर चर्चा लगातार हो रही है। सोशल मीडिया पर अभय गिरि का नाम अचानक सामने आया है। हालांकि इसकी उत्पत्ति स्पष्ट नहीं है, लेकिन विश्लेषक इसे इसलिए खारिज नहीं कर रहे, क्योंकि भाजपा पहले भी अप्रत्याशित चेहरों से विरोधियों को चौंकाती रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा हमेशा दूरदर्शी रणनीति अपनाती है। इसके तहत केवल वर्तमान चुनाव नहीं, बल्कि आने वाले कई चुनावों और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रख कर निर्णय लिया जाता है। बिहार के मामले में भी पार्टी यही रणनीति अपना रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा अगले मुख्यमंत्री के चयन में चौंकाने वाले विकल्प को प्राथमिकता दे सकती है, जैसा उसने हरियाणा, झारखंड और दिल्ली में किया।

सम्राट चौधरी की राजनीति, अनुभव और पार्टी के भीतर उनकी स्वीकार्यता को देखते हुए वे सबसे संभावित विकल्प बनते हैं। भाजपा के लिए यह मौका दशकों में मिला है और इसे गंवाना पार्टी के लिए संभव नहीं होगा। नीतीश कुमार की रणनीति और संकेत इस बात की पुष्टि करते हैं कि सम्राट के पक्ष में फैसला अधिक मजबूत होगा।

इस समय राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि भाजपा का निर्णय किस दिशा में जाएगा। बिहार के मुख्यमंत्री पद का चयन केवल जेडीयू के भीतर ही नहीं, बल्कि पूरे एनडीए और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर होगा। सम्राट चौधरी का नाम पहले से ही मजबूत दावेदार के तौर पर उभर चुका है और अगर भाजपा की चौंकाने वाली नीति लागू होती है, तो उन्हें ही बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।

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