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पीके गन हाउस पर NIA और ATS की बड़ी छापेमारी, मोबाइल और दस्तावेज जब्त

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नालंदा के बिहारशरीफ में पीके गन हाउस पर NIA और ATS ने आठ घंटे तक छापेमारी की। कार्रवाई अवैध हथियार और कारतूस की खरीद-बिक्री के इनपुट पर हुई। कई मोबाइल और दस्तावेज जब्त।

नालंदा/आलम की खबर:नालंदा जिले की राजधानी बिहारशरीफ में सोमवार को एक बड़े सुरक्षा अभियान ने इलाके में सनसनी फैला दी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और एटीएस (ATS) की संयुक्त टीम ने पोस्ट ऑफिस मोड़ स्थित पीके गन हाउस पर करीब आठ घंटे तक छापेमारी की। यह कार्रवाई सुबह लगभग 5 बजे शुरू हुई और दोपहर 12 बजे तक चली। छापेमारी के दौरान इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर इकट्ठा हो गए।

सूत्रों के मुताबिक, NIA और ATS की टीम ने छापेमारी केवल पीके गन हाउस तक सीमित नहीं रखी। गन हाउस संचालक रामप्रवेश वर्मा के घर और उनसे जुड़े अन्य प्रतिष्ठानों पर भी टीम ने तलाशी ली। टीम ने हर दस्तावेज, रजिस्टर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को बारीकी से जांचा। छापेमारी के दौरान गन हाउस से कई मोबाइल फोन, जरूरी कागजात और संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए गए। जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों और उपकरणों की पड़ताल कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि अवैध हथियारों के नेटवर्क से कोई कड़ी जुड़ी है या नहीं।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह कार्रवाई अवैध हथियार और कारतूस की खरीद-बिक्री से जुड़े इनपुट के आधार पर की गई। पिछले कुछ महीनों में नालंदा और आसपास के जिलों में कई जगहों पर हथियारों की तस्करी और अवैध व्यापार को लेकर छापेमारी की जा चुकी है। बिहारशरीफ शहर के अलावा सोहसराय थाना क्षेत्र और भागन बीघा इलाके में भी हथियार बरामद किए जा चुके हैं। कैमूर जिले के मोहनिया से भारी मात्रा में हथियार और कारतूस भी बरामद हुए। इन घटनाओं के बाद एजेंसियों को सूचना मिली थी कि नालंदा और आसपास के क्षेत्रों में अवैध हथियारों का कारोबार अब भी जारी है।

NIA और ATS की टीम ने इस सूचना के आधार पर कार्रवाई की योजना बनाई और पीके गन हाउस को टारगेट किया। एजेंसियों ने बताया कि कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और स्थानीय लोगों से अपील की गई कि वे सुरक्षित रहें और अफवाहों में न आएं।

हालांकि, इस पूरे मामले में NIA और ATS के अधिकारी फिलहाल ज्यादा जानकारी देने से परहेज कर रहे हैं। एटीएस के डीएसपी मोहम्मद शेख साबिर ने बताया कि पूर्व में प्राप्त इनपुट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है और जांच अभी जारी है। उन्होंने कहा कि जब्त किए गए मोबाइल फोन, दस्तावेज और अन्य उपकरणों की जांच के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

वहीं, पीके गन हाउस के संचालक के परिवार ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। गन हाउस के पुत्र मुकेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि एजेंसियां उन्हें बेवजह परेशान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास सभी लाइसेंस और दस्तावेज वैध हैं और वे पूरी तरह से कानून का पालन करते हैं। परिवार का कहना है कि इस कार्रवाई के पीछे गलत मंशा हो सकती है और उन्होंने सार्वजनिक रूप से विरोध जताया।

इस कार्रवाई के दौरान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया। पुलिस और एजेंसियों के जवान हर संभावित स्थिति के लिए अलर्ट थे। इलाके में दुकानें और बाजार कुछ समय के लिए प्रभावित हुए, लेकिन सुरक्षा बलों की उपस्थिति ने स्थिति को नियंत्रित रखा। स्थानीय लोग इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे थे, और अफवाहों से बचने के लिए प्रशासन ने उन्हें शांत रहने की अपील की।

विशेषज्ञों के अनुसार, अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री पर लगातार कार्रवाई से ही सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। नालंदा और आसपास के जिलों में हथियारों की तस्करी और अवैध कारोबार के कई इनपुट पिछले समय से एजेंसियों के पास थे, लेकिन पीके गन हाउस जैसी प्रतिष्ठित जगह पर इतनी व्यापक और लंबी कार्रवाई का होना इसे गंभीर मामला बनाता है।

अब सबकी निगाहें जब्त दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच पर हैं। यदि जांच में यह सामने आता है कि अवैध हथियारों के नेटवर्क से पीके गन हाउस का कोई संबंध है, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है। अधिकारियों ने कहा है कि जांच गहन और विस्तृत है, और आने वाले दिनों में इस कार्रवाई से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

घटना ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता को भी उजागर किया। लगातार हो रही छापेमारी और सुरक्षा उपाय यह संकेत देते हैं कि नालंदा और आसपास के जिलों में अवैध हथियारों के कारोबार पर नज़र रखी जा रही है। एजेंसियों का कहना है कि हर जानकारी का पूरी तरह से विश्लेषण किया जा रहा है और कोई भी संदिग्ध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से शहर में सुरक्षा की भावना बढ़ती है। हालांकि, पीके गन हाउस के परिवार ने इसे व्यक्तिगत प्रताड़ना बताया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह इनपुट और जांच पर आधारित थी।

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