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मुजफ्फरपुर में गैस माफिया पर पुलिस का बड़ा एक्शन, नेपाल नंबर टैंकर के साथ अवैध एलपीजी रिफिलिंग गिरोह का भंडाफोड़

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मुजफ्फरपुर के मोतीपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने अवैध एलपीजी रिफिलिंग गिरोह का बड़ा खुलासा किया है। नेपाल नंबर के टैंकर, बोलेरो पिकअप, टोटो और बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं। गैस किल्लत के बीच कालाबाजारी का यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय होने की आशंका है।

मुजफ्फरपुर/आलम की खबर:मुजफ्फरपुर जिले में एलपीजी गैस की किल्लत के बीच कालाबाजारी करने वाले संगठित नेटवर्क पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध गैस रिफिलिंग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मोतीपुर थाना क्षेत्र के नरियार इलाके में देर रात की गई छापेमारी में नेपाल नंबर प्लेट वाला गैस से भरा टैंकर, सिलेंडरों से लदी बोलेरो पिकअप, डिलीवरी में इस्तेमाल होने वाला टोटो वाहन, रिफिलिंग के उपकरण और बड़ी संख्या में खाली-भरे सिलेंडर बरामद किए गए हैं। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह गैस संकट का फायदा उठाकर लंबे समय से काला बाजार चला रहा था और आम उपभोक्ताओं की मजबूरी को मुनाफे में बदल रहा था।

पुलिस की यह कार्रवाई उस समय हुई जब जिले के कई इलाकों में रसोई गैस की कमी को लेकर लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही थी। इसी बीच गुप्त सूचना मिली कि मोतीपुर क्षेत्र के सुनसान इलाके में बड़े पैमाने पर एलपीजी गैस की अवैध रिफिलिंग की जा रही है। सूचना मिलते ही मुजफ्फरपुर पश्चिमी की डीएसपी सुचित्रा कुमारी के नेतृत्व में कांटी और मोतीपुर थाना की संयुक्त टीम ने रात में अचानक छापा मारा। पुलिस की दबिश पड़ते ही मौके पर मौजूद धंधेबाज अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए, लेकिन मौके से बरामद सामान ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दीं।

छापेमारी में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई, वह थी नेपाल नंबर प्लेट वाला एलपीजी टैंकर। पुलिस को शक है कि इस धंधे का तार सीमापार नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है। बरामद टैंकर में भरी गैस को छोटे घरेलू सिलेंडरों में अवैध रूप से भरा जा रहा था। इसके लिए मौके पर अस्थायी रिफिलिंग सेटअप तैयार किया गया था, जहां पाइप, नोजल और अन्य उपकरणों की मदद से सिलेंडरों में गैस ट्रांसफर की जा रही थी। यह पूरा काम बिना किसी सुरक्षा मानक के किया जा रहा था, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता था।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह गिरोह खासतौर पर उन इलाकों को निशाना बनाता था जहां एलपीजी की आपूर्ति कमजोर थी या लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे थे। ऐसे हालात में जरूरतमंद उपभोक्ताओं को महंगे दाम पर गैस उपलब्ध कराई जाती थी। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि गैस की कृत्रिम कमी पैदा कर बाजार में ऊंचे दाम वसूलने की साजिश के तहत यह धंधा संचालित हो रहा था। इस नेटवर्क में स्थानीय सप्लाई चैन से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

सुनसान जगहों पर चलता था खतरनाक खेल

पुलिस को जो इनपुट मिले हैं, उसके अनुसार यह गिरोह आबादी से दूर और कम आवाजाही वाले इलाकों में टैंकर खड़ा कर छोटे सिलेंडरों में गैस भरने का काम करता था। यह प्रक्रिया न सिर्फ पूरी तरह गैरकानूनी थी, बल्कि अत्यंत खतरनाक भी थी। गैस ट्रांसफर के दौरान किसी तरह की तकनीकी सावधानी या सुरक्षा व्यवस्था नहीं अपनाई जा रही थी। जरा सी चिंगारी या लापरवाही पूरे इलाके को आग की चपेट में ले सकती थी। यही वजह है कि पुलिस इस मामले को केवल कालाबाजारी नहीं, बल्कि जन सुरक्षा से जुड़ा गंभीर अपराध मानकर देख रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते कुछ दिनों से क्षेत्र में गैस की उपलब्धता को लेकर भारी परेशानी थी। कई घरों में समय पर सिलेंडर नहीं पहुंच रहा था, जबकि दूसरी ओर बाजार में कुछ संदिग्ध माध्यमों से गैस की सप्लाई होने की चर्चाएं थीं। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब लोगों को समझ में आ रहा है कि गैस संकट के पीछे सिर्फ आपूर्ति की समस्या नहीं, बल्कि संगठित कालाबाजारी का भी बड़ा हाथ हो सकता है।

नेपाल कनेक्शन की जांच में जुटी पुलिस

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू नेपाल नंबर वाले टैंकर की बरामदगी है। इस एक सुराग ने पुलिस की जांच को और गंभीर बना दिया है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि टैंकर कहां से आया, किसके नाम पर पंजीकृत है, किस रूट से इस क्षेत्र तक पहुंचा और इसमें शामिल लोग कौन-कौन हैं। सीमावर्ती गतिविधियों और सप्लाई चेन की दिशा में भी पुलिस जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि यह केवल स्थानीय स्तर की कालाबाजारी नहीं, बल्कि एक बड़े सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है।

जांच एजेंसियां अब टैंकर, पिकअप और अन्य बरामद वाहनों के दस्तावेज, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और परिवहन संबंधी सूचनाओं को खंगाल रही हैं। फरार आरोपियों की पहचान के लिए भी स्थानीय स्तर पर छानबीन तेज कर दी गई है। पुलिस का दावा है कि इस गिरोह में शामिल लोगों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

मोतीपुर थाने में एफआईआर, कानूनी शिकंजा कसना शुरू

इस मामले में मोतीपुर थाने में एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस अब बरामद सिलेंडरों, टैंकर और रिफिलिंग उपकरणों की तकनीकी जांच भी करवा सकती है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह धंधा कब से और कितने बड़े स्तर पर चल रहा था। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि बरामद गैस किन उपभोक्ताओं या बाजारों तक पहुंचाई जानी थी।

प्रशासनिक स्तर पर भी यह कार्रवाई अहम मानी जा रही है, क्योंकि एलपीजी संकट के समय इस तरह की कालाबाजारी आम जनता की परेशानी को और बढ़ा देती है। पुलिस का कहना है कि इस तरह के धंधों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पुलिस कार्रवाई के बाद अवैध कारोबारियों में हड़कंप

नरियार और आसपास के क्षेत्रों में इस कार्रवाई के बाद अवैध गैस कारोबारियों के बीच हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि पुलिस को अब इस धंधे से जुड़े अन्य ठिकानों और चेहरों तक पहुंचने के सुराग मिल सकते हैं। पुलिस की सक्रियता बढ़ने से कई संदिग्ध लोग अब सतर्क हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे गैस संकट के नाम पर हो रही लूट और कालाबाजारी पर रोक लगेगी।

डीएसपी सुचित्रा कुमारी ने साफ कहा है कि अवैध गैस रिफिलिंग केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि यह लोगों की जान से खेलने जैसा है। उन्होंने कहा कि पुलिस इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए लगातार कार्रवाई करेगी। शुरुआती सफलता के बाद अब जांच को और गहराई से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि इस पूरे गिरोह का खुलासा हो सके।

डीएसपी ने क्या कहा

डीएसपी पश्चिमी सुचित्रा कुमारी ने बताया कि मोतीपुर थाना क्षेत्र में रात के समय अवैध गैस रिफिलिंग की सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस टीम ने तत्काल छापेमारी की। इस दौरान एक भरा हुआ एलपीजी टैंकर, बोलेरो पिकअप, टोटो वाहन और बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर बरामद किए गए हैं। मामले में एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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