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नालंदा में NIA-ATS की रेड, कारतूस तस्करी नेटवर्क बेनकाब

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बिहार के नालंदा जिले में NIA और ATS ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित अंतरराज्यीय कारतूस तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। बिहारशरीफ समेत छह ठिकानों पर छापेमारी में डिजिटल साक्ष्य, दस्तावेज और संदिग्ध लेन-देन से जुड़े सुराग हाथ लगे हैं।

नालंदा/आलम की खबर:

बिहार के नालंदा जिले में मंगलवार को सुरक्षा एजेंसियों की एक बड़ी और बेहद संवेदनशील कार्रवाई ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) की संयुक्त टीम ने कथित अंतरराज्यीय कारतूस तस्करी नेटवर्क की जांच के तहत बिहारशरीफ समेत जिले के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। सुबह शुरू हुई यह कार्रवाई देर शाम तक चलती रही और जांच के दौरान ऐसे कई अहम सुराग हाथ लगे, जिन्होंने इस नेटवर्क की जड़ें बिहार से बाहर कई राज्यों तक फैली होने की आशंका को और मजबूत कर दिया है।

इस कार्रवाई के केंद्र में बिहारशरीफ का एक चर्चित गन हाउस रहा, जहां एजेंसियों ने गहन तलाशी ली। शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि वैध कारोबार की आड़ में कथित रूप से कारतूसों की अवैध आपूर्ति का बड़ा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। एजेंसियों को संदेह है कि लाइसेंसी गतिविधियों की ओट लेकर अलग-अलग राज्यों तक गोला-बारूद पहुंचाने का एक सुनियोजित तंत्र विकसित किया गया था।

छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी, पूरे दिन चली कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों ने साक्ष्यों और तकनीकी इनपुट के आधार पर नालंदा जिले में कुल छह ठिकानों को एक साथ निशाने पर लिया। इनमें बिहारशरीफ के अलावा हिलसा, चिकसौरा और अन्य संबंधित लोकेशन शामिल बताई जा रही हैं। एजेंसियों की यह कार्रवाई सिर्फ एक दुकान या एक व्यक्ति तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसे पूरे कथित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने वाली ऑपरेशन के रूप में देखा जा रहा है।

मौके पर पहुंची टीमों ने दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल डेटा और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सुरागों को बारीकी से खंगाला। कई जगहों पर घंटों पूछताछ भी की गई। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई, ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो और कोई साक्ष्य नष्ट न किया जा सके।

गन हाउस की आड़ में अवैध सप्लाई का शक

जांच में जो शुरुआती संकेत मिले हैं, उनके मुताबिक एक लाइसेंसी गन हाउस को कथित तौर पर कारतूसों की अवैध सप्लाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। एजेंसियों को संदेह है कि वैध लाइसेंस और कारोबारी पहचान का इस्तेमाल कर गोला-बारूद की खरीद और सप्लाई को एक वैध गतिविधि की तरह प्रस्तुत किया जाता था, जबकि इसके पीछे अलग स्तर पर एक अवैध नेटवर्क काम कर रहा था।

बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क सिर्फ सामान्य कारतूसों तक सीमित नहीं था, बल्कि अलग-अलग हथियारों के लिए इस्तेमाल होने वाली गोलियों की आपूर्ति से भी जुड़ा हो सकता है। हालांकि एजेंसियों की ओर से अभी आधिकारिक तौर पर बरामद सामग्री और सप्लाई के दायरे पर विस्तृत बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन जांच की गंभीरता इस बात का संकेत दे रही है कि मामला बेहद संवेदनशील है।

ज्वेलरी शॉप और कारोबारी फ्रंट के जरिए नेटवर्क चलाने का आरोप

जांच एजेंसियों को यह भी संदेह है कि यह कथित नेटवर्क केवल गन हाउस तक सीमित नहीं था, बल्कि कुछ अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का इस्तेमाल भी इसके लिए किया जा रहा था। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि कारोबारी प्रतिष्ठानों की आड़ में नेटवर्क को सुरक्षित ढंग से संचालित करने की कोशिश की जाती थी, ताकि संदेह कम हो और गतिविधियां सामान्य लेन-देन की तरह दिखें।

यही कारण है कि एजेंसियों ने इस मामले में सिर्फ हथियार या कारतूस के एंगल से नहीं, बल्कि आर्थिक और लॉजिस्टिक संरचना की भी जांच शुरू की है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित गिरोह अपने नेटवर्क को कैसे संचालित करता था, सामान कहां से आता था, कहां भेजा जाता था और किन माध्यमों से भुगतान लिया या भेजा जाता था।

CSP केंद्रों से फंडिंग और ट्रांजैक्शन की जांच

इस पूरे मामले का एक बेहद अहम और चौंकाने वाला पहलू CSP (Customer Service Point) केंद्रों से जुड़ा आर्थिक लेन-देन है। एजेंसियों को शक है कि नेटवर्क में पैसों के ट्रांजैक्शन के लिए CSP केंद्रों का इस्तेमाल किया जा रहा था। यही वजह है कि हिलसा और चिकसौरा स्थित कुछ केंद्रों पर भी छापेमारी की गई और वहां से डिजिटल उपकरण, रिकॉर्डिंग सिस्टम तथा CCTV DVR जब्त किए गए।

जांच एजेंसियां अब इन डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कर रही हैं। इससे यह समझने की कोशिश की जाएगी कि किन-किन खातों, मोबाइल नंबरों, आईडी और लेन-देन चैनलों का इस्तेमाल हुआ। यदि यह कड़ी मजबूत साबित होती है, तो यह मामला सिर्फ हथियार या कारतूस की तस्करी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वित्तीय नेटवर्किंग और संगठित आपराधिक ढांचे के रूप में भी सामने आ सकता है।

डायरी और डिजिटल साक्ष्यों से खुल सकती हैं कई परतें

छापेमारी के दौरान एजेंसियों को कुछ अहम डिजिटल साक्ष्य और एक संदिग्ध डायरी मिलने की बात सामने आई है। जांचकर्ताओं के लिए यह बरामदगी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि ऐसे दस्तावेज अक्सर नेटवर्क के संपर्क, सप्लाई चेन, पैसों के लेन-देन, कोड वर्ड, तारीखों और डिलीवरी पॉइंट्स जैसी जानकारियों का स्रोत बनते हैं।

डिजिटल डिवाइसों से मोबाइल चैट, बैंकिंग ट्रेल, कॉल डिटेल, फोटो, वीडियो, लोकेशन हिस्ट्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गतिविधियों का विश्लेषण किया जा सकता है। ऐसे में एजेंसियों को उम्मीद है कि इन साक्ष्यों के आधार पर न सिर्फ स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों की पहचान होगी, बल्कि नेटवर्क की बाहरी कड़ियां भी स्पष्ट हो सकती हैं।

कई राज्यों तक फैला होने का शक

प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क की पहुंच बिहार से बाहर झारखंड, उत्तर प्रदेश और हरियाणा तक होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कारतूसों की खरीद, सप्लाई, लॉजिस्टिक मूवमेंट और फंडिंग का तंत्र अलग-अलग राज्यों में फैला हुआ था। यही वजह है कि इस पूरे मामले को अब सिर्फ एक जिला या एक राज्य की आपराधिक गतिविधि के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि अंतरराज्यीय संगठित नेटवर्क के तौर पर जांच की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ लाइसेंसी दुकानों से कारतूस की खरीद और अन्य राज्यों से फंडिंग या नियंत्रण जैसी कड़ियां भी एजेंसियों के रडार पर हैं। यदि जांच में ये बिंदु प्रमाणित होते हैं, तो आने वाले दिनों में और भी कई ठिकानों पर छापेमारी या गिरफ्तारी की कार्रवाई हो सकती है।

पुराने रिकॉर्ड और पुराने मामलों की भी हो रही पड़ताल

जांच में शामिल एजेंसियां इस मामले में संदिग्ध व्यक्तियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और पूर्व मामलों की भी समीक्षा कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य संदिग्धों में शामिल कुछ नाम पहले भी अवैध हथियार या संबंधित गतिविधियों में कानून के शिकंजे में आ चुके हैं। ऐसे में एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या पुराना नेटवर्क समय के साथ और संगठित होकर फिर से सक्रिय हुआ या फिर यह कोई नया लेकिन पुराने संपर्कों पर आधारित ढांचा है।

इस तरह की जांच में अक्सर पुराने केस, चार्जशीट, गिरफ्तारी रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और स्थानीय पुलिस इनपुट बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए NIA और ATS की टीम स्थानीय पुलिस, STF और अन्य खुफिया इकाइयों के साथ समन्वय बनाकर पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही है।

पहले भी हुई थी कार्रवाई, अब जांच और गहरी

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले भी राज्य की विशेष एजेंसियां कारतूस और हथियार तस्करी के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी हैं। बीते साल STF द्वारा की गई कार्रवाई में भी कई संदिग्धों की गिरफ्तारी और हथियारों-कारतूसों की बरामदगी ने इस नेटवर्क की गंभीरता की ओर संकेत दिया था। अब NIA और ATS की एंट्री से साफ है कि मामला केवल स्थानीय अपराध तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराज्यीय आपराधिक ढांचे से जुड़े पहलुओं की भी जांच हो रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह के नेटवर्क को तोड़ा नहीं गया, तो यह संगठित अपराध, अवैध हथियार कारोबार और अन्य गंभीर गतिविधियों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। यही वजह है कि इस बार सिर्फ गिरफ्तारी या बरामदगी पर नहीं, बल्कि पूरे सप्लाई चैन और आर्थिक संरचना को ध्वस्त करने पर जोर दिया जा रहा है।

आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना

फिलहाल नालंदा में हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में सनसनी है और सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है। जिन ठिकानों पर छापेमारी हुई, वहां से जुटाए गए डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। एजेंसियों को उम्मीद है कि इनसे पूरे नेटवर्क की असली संरचना, इसके फंडिंग चैनल, सप्लाई रूट, खरीदारों और संपर्क सूत्रों के बारे में कई अहम जानकारियां सामने आएंगी।

बिहारशरीफ से शुरू हुई यह जांच अब कई जिलों और राज्यों तक फैल सकती है। आने वाले दिनों में इस मामले में और पूछताछ, गिरफ्तारी, तकनीकी विश्लेषण और नए खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल इतना तय है कि नालंदा में NIA और ATS की यह कार्रवाई बिहार में सक्रिय कथित कारतूस तस्करी नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।

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