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समस्तीपुर में जनगणना 2027 की तैयारी तेज, अब मोबाइल ऐप और सेल्फ एन्यूमरेशन से होगा डेटा संग्रह
- Reporter 12
- 09 Apr, 2026
समस्तीपुर में जनगणना 2027 की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक हुई। प्रशासन ने डिजिटल, पेपरलेस और ‘स्व-गणना’ आधारित प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए अधिकारियों, प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए।
समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले में जनगणना 2027 को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अब तेज़ हो गई हैं। समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी-सह-प्रधान जनगणना अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में साफ कर दिया गया कि इस बार की जनगणना केवल आबादी गिनने की औपचारिक कवायद नहीं होगी, बल्कि यह डिजिटल भारत के विजन से जुड़ा एक व्यापक और आधुनिक प्रशासनिक अभियान होगा। अधिकारियों ने कहा कि इस बार प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज़, तकनीक-आधारित और त्रुटिरहित बनाने पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
बैठक में जिले के विभिन्न स्तरों पर जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों, चार्ज अधिकारियों, प्रगणकों, पर्यवेक्षकों और मास्टर ट्रेनरों को जनगणना के हर महत्वपूर्ण पहलू पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशासन ने साफ किया कि आगामी जनगणना को सफल बनाने के लिए फील्ड वर्क, तकनीकी दक्षता, डेटा सुरक्षा और जन-जागरूकता — इन चारों मोर्चों पर एक साथ मजबूत तैयारी जरूरी है। यही वजह रही कि बैठक में केवल सामान्य निर्देश नहीं दिए गए, बल्कि पूरे अभियान की रूपरेखा को चरणबद्ध तरीके से समझाया गया।
दो चरणों में पूरी होगी जनगणना की प्रक्रिया
अधिकारियों को बताया गया कि जनगणना 2027 दो प्रमुख चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में मकान सूचीकरण का कार्य होगा, जिसमें जिले के हर भवन और आवासीय इकाई की पहचान, लोकेशन और आधारभूत जानकारी दर्ज की जाएगी। इस दौरान परिवारों से जीवन-स्तर से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर जानकारी ली जाएगी। इसमें मकान की संरचना, पेयजल की उपलब्धता, घरेलू सुविधाएं और अन्य बुनियादी संसाधनों से संबंधित जानकारियां शामिल रहेंगी।
दूसरे चरण में जनसंख्या गणना का कार्य होगा। इसमें प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तिगत और सामाजिक-आर्थिक विवरण एकत्र किया जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस चरण में उम्र, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, साक्षरता, रोजगार और अन्य जनसांख्यिकीय पहलुओं से संबंधित आंकड़े दर्ज किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि दोनों चरणों के बीच बेहतर समन्वय और सटीक डेटा प्रविष्टि इस बार की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
पहली बार पूरी तरह पेपरलेस और डिजिटल होगी जनगणना
बैठक में सबसे अधिक जोर डिजिटल फर्स्ट मॉडल पर दिया गया। प्रशासन ने बताया कि यह जनगणना पहले की तरह कागजी फार्म भरने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे पूरी तरह पेपरलेस और तकनीक-आधारित तरीके से संचालित किया जाएगा। इसके लिए प्रगणकों को एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से डेटा संग्रह करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि मोबाइल ऐप आधारित व्यवस्था से न केवल डेटा संग्रह तेज होगा, बल्कि त्रुटियों की संभावना भी काफी हद तक कम होगी। इससे रियल टाइम डेटा एंट्री, मॉनिटरिंग और प्रशासनिक समीक्षा भी अधिक प्रभावी तरीके से संभव हो सकेगी। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल माध्यम अपनाने से न केवल समय बचेगा, बल्कि आंकड़ों की विश्वसनीयता और उपयोगिता भी बढ़ेगी।
‘स्व-गणना’ से नागरिकों को मिलेगी बड़ी सुविधा
इस बार की जनगणना की सबसे खास बात ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) का विकल्प है। यानी नागरिक चाहें तो अपने घर बैठे ही मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। यह सुविधा खासकर शहरी और तकनीक से जुड़े परिवारों के लिए काफी उपयोगी मानी जा रही है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जो परिवार इस विकल्प का उपयोग करेंगे, उनके यहां प्रगणक केवल रेफरेंस कोड का सत्यापन करने पहुंचेंगे। इससे न सिर्फ प्रगणकों का समय बचेगा, बल्कि लोगों को भी लंबी पूछताछ या बार-बार की प्रक्रिया से राहत मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि यदि लोग इस सुविधा का व्यापक उपयोग करते हैं, तो पूरी जनगणना प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल, तेज़ और सुगम हो जाएगी।
GIS मैपिंग से कोई इलाका नहीं छूटेगा
बैठक में जीआईएस मैपिंग और डिजिटल सीमांकन को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया गया। प्रशासन ने कहा कि जिले के हर चार्ज, वार्ड और एन्यूमरेशन ब्लॉक (EB) को डिजिटल मैपिंग के जरिए चिन्हित किया जा रहा है, ताकि किसी भी क्षेत्र में भ्रम या कवरेज गैप की स्थिति न बने।
इस तकनीकी व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले का कोई भी मोहल्ला, गांव, नई बस्ती, कॉलोनी या दुर्गम इलाका जनगणना से बाहर न रह जाए। अधिकारियों के मुताबिक, कई बार पारंपरिक सर्वे में नए बसे क्षेत्रों या भौगोलिक रूप से कठिन इलाकों के छूट जाने की आशंका रहती थी, लेकिन इस बार डिजिटल मैपिंग से उस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर प्रशासन का विशेष जोर
डिजिटल प्रक्रिया के साथ डेटा सुरक्षा और गोपनीयता का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी को देखते हुए बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान एकत्र किया जाने वाला डेटा पूरी तरह सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड रहेगा। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि इन जानकारियों का उपयोग केवल सांख्यिकीय, विकासात्मक और नीतिगत उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
अधिकारियों ने कहा कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े भविष्य में सरकारी योजनाओं, संसाधन वितरण, सामाजिक विकास और प्रशासनिक नीति निर्धारण के लिए बेहद अहम साबित होते हैं। इसलिए डेटा की शुद्धता और गोपनीयता दोनों पर बराबर ध्यान देना अनिवार्य है। जिलाधिकारी ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस का स्पष्ट संदेश दिया।
प्रशिक्षण, जागरूकता और फील्ड वेरिफिकेशन पर रहेगा फोकस
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि जनगणना से जुड़े सभी प्रगणकों और फील्ड कर्मियों को तकनीकी रूप से इतना सक्षम बनाया जाए कि वे जमीनी स्तर पर किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना आसानी से कर सकें। विशेष रूप से सर्वर एरर, डेटा एंट्री गलती, लोकेशन मिसमैच जैसी समस्याओं से बचने के लिए गहन प्रशिक्षण पर जोर दिया गया।
इसके साथ ही प्रखंड और पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी ‘स्व-गणना’ जैसे विकल्पों के प्रति जागरूक हो सकें। प्रशासन का मानना है कि यदि जनता को पहले से प्रक्रिया की जानकारी होगी, तो जनगणना के दौरान सहयोग और सटीकता दोनों बेहतर होंगी।
सुपरवाइजरों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे प्रगणकों द्वारा एकत्र किए गए डेटा का रैंडम फिजिकल वेरिफिकेशन करें। इससे फील्ड लेवल पर डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और किसी भी प्रकार की चूक को समय रहते सुधारा जा सकेगा।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद, प्रशासन ने दिखाई गंभीरता
इस समीक्षा बैठक में जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिससे यह साफ संकेत मिला कि प्रशासन जनगणना 2027 को लेकर पूरी गंभीरता से काम कर रहा है। बैठक में उप विकास आयुक्त सूर्य प्रताप सिंह, अपर समाहर्त्ता-सह-जिला जनगणना अधिकारी, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी-सह-अपर जिला जनगणना अधिकारी, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, चार्ज पदाधिकारी, प्रगणक, पर्यवेक्षक और मास्टर ट्रेनर मौजूद रहे।
कुल मिलाकर समस्तीपुर में जनगणना 2027 को लेकर जो रूपरेखा सामने आई है, वह साफ तौर पर यह बताती है कि आने वाले समय में प्रशासनिक सर्वेक्षण और जनसंख्या आंकड़ों के संग्रह की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक स्मार्ट, डिजिटल और नागरिक-अनुकूल होने जा रही है। अब देखना यह होगा कि ‘स्व-गणना’ और डिजिटल जनगणना का यह मॉडल जमीन पर कितना सफल साबित होता है।
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