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सूटकेस में छिपाकर लाई जा रही थी शराब की खेप, पुलिस ने ई-रिक्शा रोककर किया बड़ा खुलासा

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बगहा के रामनगर में पुलिस ने छापेमारी कर ई-रिक्शा से सूटकेस में छिपाकर लाई जा रही विदेशी शराब बरामद की। एक तस्कर गिरफ्तार, दो फरार—पूरे नेटवर्क की जांच जारी।

रामनगर/बगहा/आलम की खबर: बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद तस्करी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। बगहा जिले के रामनगर में पुलिस ने एक बार फिर सतर्कता दिखाते हुए अवैध शराब की बड़ी खेप को पकड़ा है। रात के अंधेरे में चुपचाप सप्लाई की जा रही विदेशी शराब को लेकर पुलिस को पहले ही गुप्त सूचना मिल चुकी थी, जिसके आधार पर की गई कार्रवाई में एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उसके दो साथी मौके से फरार होने में सफल रहे।

जानकारी के अनुसार, रामनगर थाना पुलिस और एलटीएफ (लॉ एनफोर्समेंट टीम) ने संयुक्त रूप से यह कार्रवाई की। पुलिस को इनपुट मिला था कि उत्तर प्रदेश से ट्रेन के जरिए शराब की खेप बिहार लाई जा रही है और उसे स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे माध्यमों से अलग-अलग जगहों तक पहुंचाया जाना है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत रणनीति बनाई और संभावित रूट पर निगरानी बढ़ा दी।

इसी क्रम में आर्य नगर इलाके में विशेष घेराबंदी की गई। देर रात जब एक संदिग्ध ई-रिक्शा उस इलाके से गुजर रहा था, तो पुलिस ने उसे रोककर जांच शुरू की। शुरुआती तौर पर सब कुछ सामान्य दिखा, लेकिन जब ई-रिक्शा में रखे सूटकेस और बैग की तलाशी ली गई, तो पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।

तलाशी के दौरान दो बड़े सूटकेस और एक बैग में छिपाकर रखी गई विदेशी शराब की बोतलें बरामद की गईं। पुलिस के अनुसार, कुल 92 बोतल (प्रत्येक 750 एमएल) शराब जब्त की गई, जिसकी कुल मात्रा करीब 69 लीटर है। बाजार में इसकी कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। यह साफ हो गया कि तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर शराबबंदी कानून को चुनौती दे रहे हैं।

कार्रवाई के दौरान मौके से एक युवक को गिरफ्तार किया गया, जिसकी पहचान रामनगर नगर परिषद क्षेत्र के चौरसिया नगर निवासी 22 वर्षीय राम लखन कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। शुरुआती पूछताछ में उसने कुछ अहम सुराग दिए हैं, जिसके आधार पर पुलिस पूरे गिरोह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

हालांकि, इस दौरान उसके दो अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने उनकी पहचान कर ली है और संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क है, जिसके तार सीमावर्ती इलाकों और पड़ोसी राज्यों से जुड़े हो सकते हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद तस्करों ने अपने तौर-तरीकों में काफी बदलाव किया है। अब वे पारंपरिक तरीकों के बजाय नए और चौंकाने वाले तरीके अपना रहे हैं। ट्रेन के जरिए शराब लाना, छोटे वाहनों का इस्तेमाल करना और सूटकेस या बैग में छिपाकर सप्लाई करना—ये सब उसी रणनीति का हिस्सा है।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शराबबंदी के बावजूद तस्करी के नेटवर्क कैसे सक्रिय हैं। हालांकि पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है और ऐसे मामलों में सफलता भी मिल रही है, लेकिन तस्कर भी लगातार अपने तरीके बदलकर कानून को चुनौती देने में जुटे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की सतर्कता के कारण ही इस बार इतनी बड़ी खेप पकड़ी जा सकी। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो यह शराब कई इलाकों में खपाई जा सकती थी। पुलिस ने जिस तरह से घेराबंदी कर तस्करों को पकड़ा, उसे लेकर लोगों ने भी सराहना की है।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार तस्कर से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही फरार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा और इस गिरोह के अन्य सदस्यों का भी खुलासा होगा।

कुल मिलाकर, रामनगर में हुई यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रशासन अवैध शराब के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। लेकिन साथ ही यह भी साफ है कि तस्करी का नेटवर्क अब भी सक्रिय है और उसे पूरी तरह खत्म करने के लिए लगातार सख्त कार्रवाई और निगरानी की जरूरत बनी हुई है।

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