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बिहार में सियासी सस्पेंस खत्म होने को: NDA सरकार तय, सीएम चेहरे पर जल्द फैसला

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बिहार में लंबे समय से चल रही राजनीतिक हलचल अब अंतिम चरण में है। NDA की सरकार बनना लगभग तय माना जा रहा है, जबकि मुख्यमंत्री के नाम को लेकर जल्द बड़ा फैसला हो सकता है।

पटना/आलम की खबर: बिहार की राजनीति में पिछले कई हफ्तों से जारी अनिश्चितता और सस्पेंस अब धीरे-धीरे खत्म होने की ओर बढ़ रहा है। सत्ता के गलियारों में लगातार चल रही बैठकों, कयासों और रणनीतिक गतिविधियों के बीच अब संकेत साफ होने लगे हैं कि राज्य में एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनने जा रही है। हालांकि मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में इस पर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।

दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब Nitish Kumar ने सार्वजनिक तौर पर यह इच्छा जताई कि वे अब राज्यसभा के जरिए राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं। उनके इस बयान के बाद से ही बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी। लंबे समय तक विधानसभा और राज्य की राजनीति का नेतृत्व करने के बाद उनके इस फैसले को एक बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा गया।

इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदलता गया। जब उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया, तो सियासी चर्चाओं को और बल मिला। इसके बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि राज्य की सत्ता का अगला चेहरा कौन होगा और गठबंधन की दिशा क्या होगी। इस दौरान सत्ता और विपक्ष दोनों ही खेमों में बयानबाजी और रणनीतिक गतिविधियां तेज रहीं।

विपक्ष की ओर से Tejashwi Yadav के नेतृत्व में महागठबंधन ने उम्मीद बनाए रखी कि राजनीतिक परिस्थितियां उनके पक्ष में जा सकती हैं। पहले भी राज्य की राजनीति में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिले हैं, जिसके चलते विपक्ष को यह भरोसा था कि इस बार भी कोई बड़ा उलटफेर संभव है। हालांकि समय बीतने के साथ यह साफ होता गया कि परिस्थितियां इस बार अलग दिशा में जा रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरान भ्रम और अनिश्चितता की स्थिति दोनों ही पक्षों के लिए रणनीति का हिस्सा रही। जहां एक ओर विपक्ष संभावनाओं को जिंदा रखना चाहता था, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ गठबंधन भी अपने पत्ते पूरी तरह खोलने से बचता रहा। इसी कारण लंबे समय तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई और सियासी हलचल बनी रही।

इस पूरे घटनाक्रम में जनता दल यूनाइटेड के भीतर भी अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर अपील की कि Nitish Kumar राज्य की राजनीति में ही सक्रिय रहें। वहीं कुछ नेताओं ने यह भी तर्क दिया कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत वे कुछ समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। इन बयानों ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी।

इसी दौरान एक नया पहलू भी सामने आया, जब Nishant Kumar का नाम सक्रिय राजनीति में चर्चा का विषय बना। पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें भविष्य के नेतृत्व के रूप में देखने की बात कही। यहां तक कि उपमुख्यमंत्री पद के लिए भी उनके नाम को लेकर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि इस पर अभी तक कोई औपचारिक निर्णय सामने नहीं आया है।

दिल्ली और पटना के बीच लगातार बैठकों का दौर भी इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा रहा। जदयू और भाजपा के वरिष्ठ नेता आपसी तालमेल और सत्ता के बंटवारे को लेकर मंथन करते रहे। सूत्रों की मानें तो इन बैठकों में सरकार गठन का खाका लगभग तैयार कर लिया गया है और दोनों दलों के बीच प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।

अब जो संकेत सामने आ रहे हैं, उनके मुताबिक बिहार में अगली सरकार NDA के नेतृत्व में ही बनने जा रही है। खास बात यह मानी जा रही है कि इस बार मुख्यमंत्री पद भाजपा के हिस्से में जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो राज्य की राजनीति में यह एक बड़ा बदलाव होगा। वहीं महत्वपूर्ण विभागों के बंटवारे को लेकर भी सहमति बनने की खबरें हैं।

हालांकि अभी भी कुछ मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। इनमें सबसे अहम उपमुख्यमंत्री पद को लेकर फैसला है। जदयू की ओर से इस पद के लिए किसे आगे किया जाएगा, इस पर अभी मंथन जारी है। पार्टी के भीतर अलग-अलग नामों पर चर्चा हो रही है और अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।

बिहार की राजनीति में इस संभावित बदलाव के कई मायने निकाले जा रहे हैं। यदि सत्ता का नेतृत्व भाजपा के हाथों में जाता है, तो यह राज्य के राजनीतिक समीकरण को एक नई दिशा देगा। वहीं Nitish Kumar के राष्ट्रीय राजनीति की ओर रुख करने की स्थिति में जदयू की भूमिका भी नए सिरे से तय होगी।

दूसरी ओर, महागठबंधन के लिए यह समय आत्ममंथन का माना जा रहा है। Tejashwi Yadav के नेतृत्व में विपक्ष को अपनी रणनीति पर फिर से काम करना पड़ सकता है, ताकि भविष्य में बेहतर राजनीतिक स्थिति बनाई जा सके।

कुल मिलाकर, बिहार में सियासी हलचल अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। आने वाले कुछ दिनों में नई सरकार के गठन की औपचारिक घोषणा होने की संभावना है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य की सत्ता का अगला चेहरा कौन होगा और बिहार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

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