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पश्चिम चंपारण के मझौलिया में स्कूल में बवाल: शिक्षकों की लापरवाही पर अभिभावकों का फूटा गुस्सा, जांच शुरू

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पश्चिम चंपारण के मझौलिया प्रखंड के सरकारी स्कूल में शिक्षकों की लापरवाही को लेकर अभिभावकों का प्रदर्शन। पढ़ाई की स्थिति खराब, शिकायत के बाद जांच शुरू।

पश्चिम चंपारण/आलम की खबर: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के मझौलिया प्रखंड अंतर्गत राजकीय प्राथमिक विद्यालय बसड़ा (हिंदी) में शनिवार को उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया जब शिक्षकों की कथित लापरवाही और शैक्षणिक व्यवस्था की खराब स्थिति को लेकर अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। विद्यालय परिसर में सैकड़ों की संख्या में पहुंचे ग्रामीणों और अभिभावकों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और विद्यालय प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय में कुल 110 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं और छह शिक्षक तैनात होने के बावजूद पढ़ाई की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल में नियमित रूप से पढ़ाई नहीं होती और शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंचते। कई बार कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाने के बजाय शिक्षकों को मोबाइल फोन में व्यस्त देखा गया है, जिससे बच्चों की शिक्षा पर गंभीर असर पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने इस स्थिति पर सवाल उठाया तो कुछ शिक्षकों का रवैया और भी असहयोगात्मक हो गया। विशेष रूप से एक शिक्षक राजेंद्र कुमार पर आरोप है कि उन्होंने अभिभावकों से बदसलूकी की और कथित रूप से धमकी देने जैसा व्यवहार किया। इस घटना के बाद ग्रामीणों का आक्रोश और अधिक बढ़ गया और मामला प्रदर्शन तक पहुंच गया।

शनिवार को स्थिति तब बिगड़ गई जब बड़ी संख्या में अभिभावक और ग्रामीण विद्यालय परिसर में एकत्र हो गए। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने शिक्षकों के खिलाफ नारेबाजी की और विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था सुधारने की मांग उठाई। प्रदर्शन में कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण भी शामिल रहे, जिन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन सौंपकर पूरे मामले की जांच और संबंधित शिक्षकों के स्थानांतरण की मांग की।

प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका आरोप है कि यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं की गई तो बच्चों की शिक्षा पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी। ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि विद्यालय में नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

इस मामले पर विद्यालय की प्रधानाध्यापिका आशा सिंह ने भी शिक्षकों के रवैये पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि कई बार निर्देश देने और समझाने के बावजूद कुछ शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे पूरे विद्यालय का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है। उन्होंने इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को लिखित शिकायत भी दी है।

प्रधानाध्यापिका के अनुसार, विद्यालय में अनुशासन और पढ़ाई की गुणवत्ता बनाए रखना लगातार चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उच्च अधिकारियों द्वारा जल्द ही इस पर ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिससे विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण सुधर सके।

वहीं, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी हफीजुर्रहमान ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की बात कही है। उन्होंने बताया कि शिकायत प्राप्त होने के बाद विद्यालय के पांच सहायक शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी और निगरानी तंत्र की कमजोरी अक्सर इस तरह के विवादों को जन्म देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।

फिलहाल विद्यालय में स्थिति तनावपूर्ण जरूर है, लेकिन प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई की जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और विद्यालय में शैक्षणिक माहौल फिर से सामान्य हो सके।

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