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वृंदावन में यमुना नाव हादसा: 11 श्रद्धालुओं की मौत, 4 लापता,

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मथुरा के वृंदावन में यमुना नदी में नाव पलटने से बड़ा हादसा। 11 श्रद्धालुओं की मौत, 4 लापता, 22 सुरक्षित निकाले गए। ओवरलोडिंग और लाइफ जैकेट न देने की लापरवाही सामने आई।

वृंदावन/आलम की खबर: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन क्षेत्र में यमुना नदी में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में अब तक 11 श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। घटना के बाद दूसरे दिन शनिवार को भी बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव कार्य जारी है और सेना सहित लगभग 250 से अधिक कर्मियों की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन में जुटी हुई है।

यह हादसा शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे केसी घाट के पास हुआ, जो बांके बिहारी मंदिर से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। उस समय यमुना नदी में एक नाव में करीब 37 श्रद्धालु सवार थे, जो अचानक असंतुलित होकर पलट गई। नाव पलटने के बाद अफरा-तफरी मच गई और लोग नदी के तेज बहाव में बहने लगे।

स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से अब तक 22 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। वहीं, कुछ लोगों को तुरंत बचाने का काम मौके पर मौजूद पांटून पुल कर्मियों और स्थानीय नाविकों ने भी किया। इसके बाद प्रशासन को सूचना दी गई और बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

रेस्क्यू अभियान के दौरान देवरहा बाबा घाट के पास से एक और शव बरामद हुआ, जिसके बाद परिजनों में कोहराम मच गया। शव मिलने के बाद मृतक के बुजुर्ग पिता की स्थिति बेहद भावुक हो गई, जिन्हें आसपास मौजूद लोगों ने संभाला। प्रशासन का कहना है कि यमुना नदी में तेज बहाव होने के कारण कई शव बहकर दूर जा सकते हैं या नदी की गहराई में गाद और रेत के नीचे दबे हो सकते हैं, जिनके 24 घंटे बाद ऊपर आने की संभावना रहती है।

प्रारंभिक जांच में इस हादसे को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार जिस नाव में श्रद्धालु सवार थे, उसकी क्षमता लगभग 40 यात्रियों की थी, लेकिन उसमें 37 लोग सवार थे। सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं कराई गई थी, जो इस तरह के जल परिवहन में एक अनिवार्य सुरक्षा मानक होता है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तेज हवाओं के कारण नाव असंतुलित हो गई थी। बताया जा रहा है कि हवा की गति लगभग 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी, जिससे नदी में स्थिति और अधिक खतरनाक हो गई। एक जीवित बचे यात्री ने बताया कि नाव डगमगाने लगी थी और यात्रियों ने नाविक से नाव रोकने की कई बार गुहार लगाई, लेकिन कथित तौर पर उसकी ओर से ध्यान नहीं दिया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाव दो बार पीपा पुल से टकराने से बची, लेकिन तीसरी बार टक्कर के बाद नाव पूरी तरह असंतुलित हो गई और यमुना में पलट गई। इसके बाद लोग तेज बहाव में बहने लगे और चीख-पुकार मच गई।

घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नाविक पप्पू निषाद को लगभग 6 घंटे बाद रात करीब 9 बजे हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि वही नाव का संचालन कर रहा था और श्रद्धालुओं को जुगल घाट से सवार कराया गया था। हादसे के बाद वह मौके से फरार हो गया था, जिसके बाद उसकी तलाश शुरू की गई।

इस दर्दनाक हादसे के कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें एक वीडियो में श्रद्धालु नाव पलटने से पहले “राधे-राधे” का जाप करते नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरे वीडियो में नाव डूबने की भयावह स्थिति दिखाई दे रही है। ये दृश्य देखकर लोग भावुक हो गए हैं और सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर गहरा शोक व्यक्त किया जा रहा है।

इस घटना के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। वाराणसी और अन्य धार्मिक घाटों पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। गंगा घाटों पर विशेष निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है और नाविकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थिति में ओवरलोडिंग न की जाए और यात्रियों को लाइफ जैकेट उपलब्ध कराई जाए। अस्सी घाट से लेकर नमो घाट तक लगातार निगरानी की जा रही है और चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हादसे अक्सर सुरक्षा नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण होते हैं। धार्मिक पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़ के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था कमजोर रहना इस घटना को और अधिक गंभीर बनाता है।

फिलहाल, प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है। वहीं, इस हादसे के बाद नाव संचालन और नदी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही हैं और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

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