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बिहार में बिजली चोरी पर बड़ा एक्शन, ट्रांसफॉर्मर को मीटर से टैग करने की पहल से 100 करोड़ की चोरी पर लगेगी रोक

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बिहार में बिजली चोरी रोकने के लिए ट्रांसफॉर्मर को मीटर से टैग करने का काम जारी, पेसू क्षेत्र में 48% कार्य पूरा, नई तकनीक से 100 करोड़ रुपये की बिजली चोरी रोकने की तैयारी।

पटना/आलम की खबर:बिहार में बिजली व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ी तकनीकी पहल की जा रही है। राज्य में लगातार बढ़ रही बिजली चोरी पर रोक लगाने के लिए अब ट्रांसफॉर्मरों को सीधे मीटर सिस्टम से टैग करने का काम तेजी से किया जा रहा है। इस आधुनिक तकनीक के लागू होने के बाद बिजली की आपूर्ति और खपत के बीच के अंतर को तुरंत ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे बिजली चोरी की पहचान आसान हो जाएगी।

यह पूरा प्रोजेक्ट पिछले लगभग तीन महीनों से चल रहा है और शुरुआती चरण में पेसू (Patna Electric Supply Undertaking) क्षेत्र में इसे लागू किया गया है। जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में अब तक लगभग 48 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और आने वाले तीन महीनों में इसे पूरी तरह से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस तकनीक के लागू होने के बाद बिजली विभाग को हर ट्रांसफॉर्मर से जुड़े उपभोक्ताओं की वास्तविक खपत और सप्लाई की सटीक जानकारी मिल सकेगी। इससे यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि किस इलाके में कितनी बिजली आपूर्ति हो रही है और उसका वास्तविक उपयोग कितना हो रहा है। यदि किसी ट्रांसफॉर्मर में आपूर्ति और खपत के बीच बड़ा अंतर पाया जाता है, तो उसे बिजली चोरी के संभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया जा सकेगा।

अधिकारियों के अनुसार इस प्रणाली से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिजली चोरी करने वाले इलाकों की पहचान एक क्लिक पर संभव हो जाएगी। इसके बाद संबंधित क्षेत्रों में छापेमारी कर चोरी में शामिल लोगों को पकड़ा जा सकेगा और उनसे जुर्माना वसूला जा सकेगा। अनुमान है कि केवल पेसू क्षेत्र में ही हर साल करीब 100 करोड़ रुपये की बिजली चोरी होती है, जिसे इस तकनीक के माध्यम से काफी हद तक रोका जा सकता है।

यह परियोजना न केवल बिजली चोरी रोकने में मदद करेगी, बल्कि राज्य की बिजली वितरण व्यवस्था को भी अधिक पारदर्शी बनाएगी। इससे पावर होल्डिंग कंपनी को राजस्व बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी और वित्तीय घाटे को कम किया जा सकेगा।

इस पूरे सिस्टम में ट्रांसफॉर्मर को स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि हर ट्रांसफॉर्मर से निकलने वाली बिजली और उसके उपयोग की पूरी डिजिटल निगरानी की जा सके। इससे न केवल बिजली चोरी का पता चलेगा, बल्कि सिस्टम में किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी या लोड असंतुलन की जानकारी भी तुरंत मिल जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के लागू होने के बाद ट्रांसफॉर्मरों पर अधिकतम लोड की भी सटीक जानकारी उपलब्ध होगी। इससे यह पता चल सकेगा कि किस समय और किस क्षेत्र में बिजली की खपत सबसे अधिक है। इस डेटा के आधार पर जरूरत के अनुसार नए ट्रांसफॉर्मर लगाए जा सकेंगे या लोड को दूसरे ट्रांसफॉर्मरों पर शिफ्ट किया जा सकेगा, जिससे ओवरलोडिंग और ट्रांसफॉर्मर जलने की घटनाओं में कमी आएगी।

पावर विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2025-26 में केवल पेसू क्षेत्र से ही लगभग 2150 करोड़ रुपये का राजस्व बिजली बिल के माध्यम से एकत्रित किया गया है। लेकिन अनुमान के मुताबिक, इसमें से लगभग 5 प्रतिशत बिजली चोरी के कारण नुकसान होता है। इसका मतलब है कि हर साल लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक की राजस्व हानि होती है।

हालांकि विभाग द्वारा समय-समय पर छापेमारी और जुर्माना वसूली की कार्रवाई भी की जाती है, जिससे लगभग तीन करोड़ रुपये की वसूली सालाना हो पाती है। लेकिन बड़ी मात्रा में होने वाला नुकसान अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। इसी कारण इस तकनीकी प्रणाली को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि बिजली चोरी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। साथ ही, उपभोक्ताओं को भी बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सकेगी। विभाग का मानना है कि यह कदम बिहार की बिजली व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन साबित होगा।

कुल मिलाकर, ट्रांसफॉर्मर को मीटर से टैग करने की यह पहल न केवल बिजली चोरी रोकने का एक आधुनिक तरीका है, बल्कि यह राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आने वाले समय में यदि यह योजना सफल होती है, तो बिहार बिजली प्रबंधन के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में उभर सकता है।

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