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DRDA डायरेक्टर वैभव कुमार पर EOU का बड़ा खुलासा: 10 करोड़ की संपत्ति मामला

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Description: बिहार में DRDA डायरेक्टर वैभव कुमार पर आय से अधिक संपत्ति का बड़ा मामला सामने आया है। EOU जांच में 10 करोड़ की संपत्ति, 16 प्रॉपर्टी, टेंडर कमीशन और बेटे के नाम ITI संस्थान का खुलासा हुआ है।

सहरसा/आलम की खबर: बिहार के Saharsa जिले में तैनात जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) के डायरेक्टर वैभव कुमार को लेकर सामने आया आय से अधिक संपत्ति का मामला अब राज्य भर में चर्चा का विषय बन गया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की विस्तृत जांच में यह खुलासा हुआ है कि एक सामान्य सरकारी वेतनभोगी अधिकारी के रूप में कार्यरत वैभव कुमार ने अपने पूरे सेवा काल में लगभग 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित कर ली, जबकि उनकी वैध आय इससे कई गुना कम बताई जा रही है। यह मामला न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी गंभीर बहस को जन्म देता है।

जांच एजेंसियों के अनुसार वैभव कुमार ने वर्ष 2013 में BPSC परीक्षा पास कर ग्रामीण विकास पदाधिकारी के रूप में सरकारी सेवा में प्रवेश किया था। इससे पहले वे भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में कार्यरत थे, लेकिन उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़कर सरकारी सेवा को चुना। शुरुआती समय में उनके पास नाममात्र की संपत्ति थी, जिसमें केवल कुछ हजार रुपये बैंक बैलेंस और पैतृक गांव में एक साधारण मकान शामिल था। लेकिन कुछ ही वर्षों में उनकी आर्थिक स्थिति में जो अप्रत्याशित उछाल देखने को मिला, उसने जांच एजेंसियों को सक्रिय कर दिया।

EOU की रिपोर्ट में बताया गया है कि वैभव कुमार और उनकी पत्नी की संयुक्त वैध आय लगभग 1.8 करोड़ रुपये के आसपास है, जिसमें उनका कुल वेतन लगभग 96 लाख रुपये शामिल है। इसके बावजूद उनके नाम पर और परिवार के सदस्यों के नाम पर कुल संपत्ति का मूल्य 10 करोड़ रुपये से अधिक पाया गया है। यह अंतर अपने आप में गंभीर सवाल खड़ा करता है कि आखिर इतनी तेजी से संपत्ति का विस्तार कैसे हुआ।

जांच में सामने आया है कि वैभव कुमार ने बिहार के कई जिलों में कुल 16 अलग-अलग प्रॉपर्टी खरीदी हैं। इनमें जमीन, मकान और व्यावसायिक उपयोग की संपत्तियां शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से अधिकतर संपत्तियां सीधे उनके नाम पर नहीं बल्कि परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज की गई हैं, जिसमें पत्नी, पिता और बेटे का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। इस तरीके से संपत्तियों को छुपाने की कोशिश की गई या नहीं, यह जांच का प्रमुख विषय बन गया है।

सबसे महंगी संपत्ति करीब 1.30 करोड़ रुपये की जमीन बताई जा रही है, जिसे हाल ही में खरीदा गया था। इसके अलावा कई अन्य प्लॉट और मकानों में भी बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह पूरा निवेश पैटर्न अचानक और असामान्य रूप से बढ़ा हुआ दिखाई देता है, जो सामान्य आय के आधार पर संभव नहीं लगता।

इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब यह पता चला कि वैभव कुमार ने अपने मात्र 9 वर्षीय बेटे के नाम पर एक ITI संस्थान स्थापित किया है। मुजफ्फरपुर में NH-28 के किनारे जमीन खरीदकर “ऐश्वर्य मैक्स ग्लो प्राइवेट लिमिटेड ITI” नाम से संस्थान बनाया गया है, जिसमें लगभग 1.5 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह संस्थान केवल नाम का नहीं बल्कि पूरी तरह से विकसित ढांचा है, जिसमें भवन निर्माण और अन्य सुविधाओं पर भारी खर्च किया गया है।

इस संस्थान के संचालन की जिम्मेदारी परिवार के एक सदस्य को दी गई है। अब श्रम संसाधन विभाग से इस ITI के लाइसेंस, मान्यता और संचालन प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेजों की रिपोर्ट मांगी गई है। यह भी जांच का विषय है कि एक नाबालिग के नाम पर संस्थान कैसे संचालित किया जा सकता है और इसके पीछे वित्तीय स्रोत क्या हैं।

EOU की जांच में यह भी सामने आया है कि वैभव कुमार के कार्यकाल के दौरान टेंडर प्रक्रिया में कई अनियमितताएं हुई हैं। आरोप है कि ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े विभिन्न परियोजनाओं में ठेकेदारों से 2% से 5% तक कमीशन वसूला जाता था। यह कमीशन दलालों के नेटवर्क के माध्यम से एकत्र किया जाता था और बाद में इसे संपत्तियों में निवेश किया जाता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था।

29 मार्च को मामला दर्ज होने के बाद EOU ने 31 मार्च को एक साथ छह ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें सहरसा स्थित सरकारी आवास, मुजफ्फरपुर में निजी आवास, पैतृक गांव का घर, पत्नी के नाम दर्ज संपत्तियां और ITI संस्थान शामिल हैं। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, जमीन के कागजात, बैंक रिकॉर्ड और निवेश से जुड़े कागजात बरामद किए गए हैं।

EOU की रिपोर्ट के अनुसार सरकारी रिकॉर्ड में वैभव कुमार और उनकी पत्नी की संयुक्त आय लगभग 1.8 करोड़ रुपये है, जबकि उनके पास मौजूद संपत्ति का मूल्य 10 करोड़ रुपये से अधिक पाया गया है। इसी आधार पर उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है, जिसमें लगभग 2.41 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का अनुमान लगाया गया है।

जांच एजेंसियों ने उनके बैंक खातों और पैन कार्ड के आधार पर वित्तीय लेनदेन की गहन जांच शुरू कर दी है। इसके लिए फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) से भी संपर्क किया गया है ताकि पूरे लेनदेन का ट्रेल सामने आ सके। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की भी भूमिका हो सकती है, इसलिए आगे यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी सौंपा जा सकता है।

पहली पूछताछ में EOU की टीम ने वैभव कुमार से करीब 120 सवाल पूछे थे, जो लगभग चार घंटे तक चली। हालांकि कई सवालों के जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। अब जांच एजेंसी उनके बैंक लॉकर को खोलने और दूसरी बार पूछताछ की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि लॉकर से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े और प्रमाण मिल सकते हैं।

जांच अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक बड़े नेटवर्क की भूमिका भी हो सकती है, जिसमें दलाल, ठेकेदार और कुछ सरकारी कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। इसलिए पूरी चेन की जांच की जा रही है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह व्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकता है।

फिलहाल पूरा मामला EOU की जांच के अधीन है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। राज्य सरकार भी इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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