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बिहार के 534 मॉडल स्कूलों में नए सत्र की तैयारी तेज, शिक्षा विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश

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बिहार के 534 मॉडल माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की तैयारियां तेज हो गई हैं। शिक्षा विभाग ने शिक्षक तैनाती, नामांकन प्रक्रिया और डिजिटल व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिससे स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।

बिहार में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत को लेकर शिक्षा विभाग ने राज्यभर के 534 मॉडल माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में तैयारियों को गति दे दी है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार पढ़ाई की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए जिला स्तर पर अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं और शिक्षकों की तैनाती से लेकर नामांकन तक की पूरी व्यवस्था को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश जारी किया गया है।

शिक्षा विभाग के माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को सख्त निर्देश भेजे गए हैं, जिसमें कहा गया है कि मॉडल विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियां बिना किसी रुकावट के तुरंत शुरू की जाएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालयों में शिक्षक उपलब्ध हों, कक्षाएं नियमित रूप से चलें और छात्रों का नामांकन समय पर पूरा हो।

विभागीय योजना के अनुसार राज्य के मॉडल माध्यमिक विद्यालयों में प्रत्येक स्कूल में 8 शिक्षकों की तैनाती अनिवार्य की गई है, जबकि उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 16 शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करनी होगी। यह व्यवस्था इसलिए लागू की जा रही है ताकि हर कक्षा और विषय के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध रहें और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

जिला शिक्षा अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने-अपने जिलों में तैनाती की प्रक्रिया को तेजी से पूरा कराएं और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। इसके लिए विभागीय स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग भी की जा रही है।

नामांकन प्रक्रिया को लेकर भी शिक्षा विभाग ने स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है। हर मॉडल विद्यालय में कक्षा 9वीं में कम से कम 45 छात्रों का नामांकन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने को कहा गया है। यदि किसी विद्यालय में इससे अधिक छात्र नामांकित होते हैं, तो उसी अनुपात में शिक्षकों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा।

विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र के छात्रों और अभिभावकों से संपर्क स्थापित कर नामांकन प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाएं। प्रधानाध्यापकों को स्पष्ट कहा गया है कि वे जिला शिक्षा पदाधिकारी के साथ लगातार समन्वय बनाकर सभी कार्यों को समय पर पूरा करें, ताकि सत्र की शुरुआत सुचारू रूप से हो सके।

इस बार मॉडल विद्यालयों में एक नया बदलाव भी देखने को मिलेगा, जिसमें सभी छात्रों के लिए ड्रेस कोड लागू किया गया है। यह ड्रेस कोड बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य सभी मॉडल विद्यालयों में एक समान पहचान और अनुशासित वातावरण स्थापित करना है।

इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। प्रत्येक मॉडल विद्यालय का एक अलग डिजिटल पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जिसमें छात्रों और शिक्षकों से जुड़ी सभी जानकारियां सुरक्षित रूप से दर्ज की जाएंगी। इसमें छात्र का नाम, पिता का नाम, आधार संख्या सहित अन्य आवश्यक विवरण शामिल होंगे। इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और प्रशासनिक कार्यों को आसान बनाना है।

शिक्षा विभाग ने मॉडल विद्यालयों को उनके प्रदर्शन और सुविधाओं के आधार पर चार श्रेणियों में विभाजित किया है। इस वर्गीकरण के तहत A ग्रेड में 314 विद्यालय, B ग्रेड में 160 विद्यालय, C ग्रेड में 45 विद्यालय और D ग्रेड में 15 विद्यालय शामिल किए गए हैं। इस श्रेणीकरण के आधार पर ही स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग और समीक्षा की जाएगी।

विभाग का मानना है कि इस प्रणाली से स्कूलों के प्रदर्शन में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। कमजोर प्रदर्शन वाले विद्यालयों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

मॉडल विद्यालयों में नामांकन के लिए पहले ही राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा प्रवेश परीक्षा आयोजित की जा चुकी है। परीक्षा के परिणाम भी जारी कर दिए गए हैं और अब चयनित छात्रों के आधार पर नामांकन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

नामांकन प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रत्येक जिले में एक समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता उप विकास आयुक्त कर रहे हैं। इस समिति में जिला शिक्षा पदाधिकारी भी शामिल हैं। यह समिति सुनिश्चित करेगी कि चयन और नामांकन प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता न हो।

वहीं C और D ग्रेड विद्यालयों की जांच सीधे जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा की जाएगी, जबकि A और B ग्रेड विद्यालयों की मॉनिटरिंग जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) के स्तर पर की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर स्तर पर विद्यालयों की स्थिति पर नजर रखी जाए और आवश्यक सुधार समय पर किए जा सकें।

शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को भी तकनीकी रूप से मजबूत किया गया है। इसके लिए ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से आवेदन और चयन की प्रक्रिया पूरी की गई है। इससे पूरी व्यवस्था डिजिटल और पारदर्शी बनी है। चयन प्रक्रिया में प्रत्येक जिले में उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है, जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं।

शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य इस नए सत्र में मॉडल विद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का केंद्र बनाना है। इसके लिए शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता, छात्रों का नियमित नामांकन, डिजिटल व्यवस्था और बेहतर प्रशासनिक निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि यदि यह पूरी योजना सही ढंग से लागू होती है, तो आने वाले समय में मॉडल विद्यालय राज्य के शिक्षा ढांचे में एक नई मिसाल कायम करेंगे। इससे छात्रों को आधुनिक, व्यवस्थित और तकनीक आधारित शिक्षा का लाभ मिलेगा और सरकारी स्कूलों की छवि और अधिक मजबूत होगी।

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