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बिहार में सत्ता परिवर्तन तय, 14 अप्रैल को नेता चयन और 15 को शपथ संभव

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बिहार में 14 अप्रैल को NDA विधायक दल की बैठक में नए नेता का चयन होगा। Shivraj Singh Chouhan को पर्यवेक्षक बनाया गया है। 15 अप्रैल को शपथ ग्रहण संभव, Nitish Kumar इस्तीफा दे सकते हैं।

पटना/आलम की खबर:बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। राज्य की सियासत इस समय ऐसे मोड़ पर है, जहां आने वाले 24 से 48 घंटे में सत्ता परिवर्तन की पूरी तस्वीर साफ हो सकती है। 14 अप्रैल को होने वाली विधायक दल की बैठकों और 15 अप्रैल को संभावित शपथ ग्रहण को लेकर राजधानी पटना में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक दलों के भीतर लगातार बैठकों और रणनीतिक मंथन का दौर जारी है, जिससे साफ है कि नई सरकार का खाका लगभग तैयार हो चुका है।

इस बार सबसे खास बात यह मानी जा रही है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य में नेतृत्व की भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में पार्टी ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाते हुए वरिष्ठ नेता Shivraj Singh Chouhan को बिहार में विधायक दल के नेता के चयन के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। यह फैसला भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से लिया गया है, जो इस पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है।

14 अप्रैल को विधायक दल की निर्णायक बैठक

सूत्रों के मुताबिक Shivraj Singh Chouhan 14 अप्रैल को पटना पहुंचेंगे। उनकी मौजूदगी में भाजपा विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगी, जिसमें विधायक दल के नेता के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यही नेता आगे चलकर मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश करेगा।

इसके साथ ही एनडीए के अन्य घटक दल—जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा—भी उसी दिन अपनी-अपनी विधायक दल की बैठक करेंगे। इन बैठकों के बाद एक संयुक्त बैठक में सभी दलों की सहमति से एनडीए विधायक दल के नेता के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।

15 अप्रैल को शपथ ग्रहण की तैयारी

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि 15 अप्रैल को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। इसके लिए पटना के राजभवन परिसर के साथ-साथ बापू सभागार को भी संभावित स्थल के रूप में तैयार किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

संभावना है कि शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री के साथ दो उपमुख्यमंत्री भी शपथ ले सकते हैं। इसके अलावा कुछ वरिष्ठ नेताओं को शुरुआती मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा, जबकि बाद में चरणबद्ध तरीके से विस्तार किया जा सकता है। इस समारोह को भव्य और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बनाने की योजना पर काम चल रहा है।

केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी से बढ़ेगा महत्व

इस शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि भाजपा इस आयोजन को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने के रूप में देख रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम के जरिए भाजपा राज्य में अपनी संगठनात्मक पकड़ और गठबंधन की मजबूती को प्रदर्शित करना चाहती है। इससे आगामी चुनावी रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।

14 अप्रैल को कैबिनेट की अंतिम बैठक

इधर, बिहार सरकार की ओर से 14 अप्रैल को सुबह 11 बजे कैबिनेट की अंतिम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री Nitish Kumar करेंगे। इसे मौजूदा सरकार की आखिरी कैबिनेट बैठक माना जा रहा है।

इस बैठक में सरकार के कार्यकाल की समीक्षा के साथ-साथ कई अहम प्रशासनिक फैसले लिए जा सकते हैं। साथ ही मुख्यमंत्री के लंबे कार्यकाल और उनके योगदान को लेकर मंत्रिमंडल की ओर से औपचारिक आभार भी व्यक्त किया जा सकता है।

बैठक के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि Nitish Kumar राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं, जिससे नई सरकार के गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी।

सरकार गठन की अंतिम प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, 14 अप्रैल की शाम तक एनडीए विधायक दल के नए नेता राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। इसके बाद 15 अप्रैल को शपथ ग्रहण के साथ नई सरकार का गठन पूरा हो जाएगा।

इस बीच Shivraj Singh Chouhan ने अपनी जिम्मेदारी को लेकर कहा है कि वे पार्टी के एक समर्पित कार्यकर्ता हैं और उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी गई है, उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संगठन का निर्णय सर्वोपरि होता है और सामूहिक सहमति ही पार्टी की ताकत है।

नई राजनीतिक दिशा की ओर बिहार

कुल मिलाकर बिहार की राजनीति इस समय एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। आने वाले कुछ दिनों में न सिर्फ नई सरकार का गठन होगा, बल्कि यह भी तय होगा कि राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी। सत्ता परिवर्तन के इस दौर में सभी की नजर मुख्यमंत्री के चेहरे और नए मंत्रिमंडल के गठन पर टिकी हुई है।

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