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सहरसा में शादी के नाम पर ठगी का खुलासा, फर्जी मैरिज ब्यूरो चलाकर युवकों से वसूली

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बिहार के सहरसा में फर्जी मैरिज ब्यूरो के जरिए युवकों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश। सोशल मीडिया से फंसाकर की जाती थी पैसे की वसूली।

सहरसा/आलम की खबर:बिहार के सहरसा में शादी के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। साइबर पुलिस की कार्रवाई में यह सामने आया है कि एक साधारण दिखने वाले ऑफिस के अंदर से युवकों को जाल में फंसाने का पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। यह मामला तब उजागर हुआ जब पुलिस ने सदर थाना क्षेत्र में पॉलिटेक्निक ढाला के पास एक संदिग्ध कार्यालय पर छापेमारी की।

जांच में सामने आया कि यह कोई साधारण ऑफिस नहीं, बल्कि एक फर्जी मैरिज ब्यूरो का संचालन केंद्र था, जहां से युवकों को शादी का झांसा देकर पैसे ऐंठे जा रहे थे। पुलिस जब अंदर पहुंची तो वहां की गतिविधियां देखकर खुद भी हैरान रह गई। पूरा सेटअप किसी प्रोफेशनल कॉल सेंटर की तरह तैयार किया गया था, जहां कर्मचारी अलग-अलग शिफ्ट में काम कर रहे थे।

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने खुद को एक ऑनलाइन मैरिज सेवा के रूप में पेश किया हुआ था और “मैरिज लाइन डॉट कॉम” जैसे नाम का इस्तेमाल कर लोगों को भरोसे में लिया जाता था। बाहर से देखने पर यह जगह एक सामान्य दफ्तर की तरह दिखाई देती थी, लेकिन अंदर से यह पूरी तरह से ठगी का अड्डा था।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने तीन युवतियों को मौके से हिरासत में लिया। पूछताछ में पता चला कि ये सभी कॉल ऑपरेटर के तौर पर काम कर रही थीं। इनका काम फोन कॉल और सोशल मीडिया के जरिए लोगों से संपर्क करना और उन्हें शादी के नाम पर फंसाना था। यह पूरा काम एक सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था, जिसमें हर कर्मचारी की भूमिका तय थी।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा था। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर आकर्षक तस्वीरें पोस्ट की जाती थीं, जिससे युवकों को बातचीत में उलझाया जा सके। जैसे ही कोई व्यक्ति इनसे जुड़ता, उसे शादी के लिए इच्छुक लड़की का भरोसा दिलाया जाता था।

इसके बाद शुरू होता था पैसे वसूलने का सिलसिला। पहले चरण में रजिस्ट्रेशन या प्रोफाइल एक्सेस के नाम पर छोटी रकम ली जाती थी। जब पीड़ित एक बार भुगतान कर देता, तो उसे अलग-अलग बहानों से बार-बार पैसे देने के लिए मजबूर किया जाता था। कभी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन तो कभी मीटिंग फिक्स कराने के नाम पर रकम मांगी जाती थी।

पुलिस जांच में इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड रंजन कुमार बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है। बताया गया है कि वह सुपौल का रहने वाला है और सहरसा में किराए का मकान लेकर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। उसके निर्देश पर ही कॉल सेंटर का संचालन किया जा रहा था।

हिरासत में ली गई युवतियों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें नौकरी के नाम पर यहां रखा गया था और मासिक वेतन दिया जा रहा था। उनका कहना है कि उन्हें शुरुआत में इस काम की असलियत का अंदाजा नहीं था। हालांकि पुलिस इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है कि वे इस पूरे नेटवर्क में कितनी भूमिका निभा रही थीं।

इस मामले में पुलिस ने कुल 11 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है। साथ ही गिरोह से जुड़े बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है और कई राज्यों तक फैला हुआ हो सकता है।

साइबर पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में लोग अक्सर जल्दी भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं। खासकर शादी जैसे संवेदनशील विषय पर लोग भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं, जिससे वे आसानी से ठगी का शिकार बन जाते हैं।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन मैरिज सेवा या अनजान प्रोफाइल पर तुरंत भरोसा न करें। किसी भी तरह का भुगतान करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आए, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

कुल मिलाकर, सहरसा में सामने आया यह मामला न केवल साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि अपराधी किस तरह नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। अब देखना होगा कि पुलिस इस नेटवर्क के बाकी सदस्यों को कब तक पकड़ पाती है और इस तरह की घटनाओं पर कितनी रोक लगाई जा सकती है।

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