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Motihari Cyber Fraud Gang का खुलासा, विदेशों से जुड़े नेटवर्क का पर्दाफाश

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मोतिहारी में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन वाले साइबर ठगी गिरोह का खुलासा किया है। चार आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ बड़े नेटवर्क की जांच जारी है।

मोतिहारी/आलम की खबर:बिहार के मोतिहारी जिले से साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने यह साफ कर दिया है कि ऑनलाइन ठगी अब स्थानीय सीमाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ चुके हैं। जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में पुलिस की एक बड़ी कार्रवाई के दौरान एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने खटोलवा गांव में छापेमारी की, जहां से इस गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को पकड़ा गया। शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि यह कोई सामान्य ठगी का मामला नहीं है, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है, जो देश के बाहर बैठे साइबर अपराधियों के इशारे पर काम कर रहा था।

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का संचालन बेहद सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था। आरोपियों द्वारा सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसाया जाता था। फर्जी विज्ञापन, आकर्षक ऑफर और नकली सेवाओं के जरिए पहले लोगों का भरोसा जीता जाता था, फिर उन्हें धीरे-धीरे ठगी के जाल में फंसा लिया जाता था।

इस गिरोह की कार्यप्रणाली का सबसे खतरनाक पहलू ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी तकनीक का इस्तेमाल था। आरोपियों द्वारा आम लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि वे किसी कानूनी मामले में फंस गए हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई होने वाली है। इस डर का फायदा उठाकर उनसे तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहा जाता था। घबराहट में कई लोग बिना जांच-पड़ताल किए ही पैसे भेज देते थे और ठगी का शिकार बन जाते थे।

जांच के दौरान पुलिस ने गिरोह के कथित सरगना के रूप में अंकित कुमार की पहचान की, जिसे सबसे पहले हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उसने कई अहम जानकारियां साझा कीं, जिससे इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं। उसने बताया कि गिरोह के सदस्य विदेशों में बैठे साइबर अपराधियों के संपर्क में थे और उन्हीं के निर्देश पर काम करते थे।

इस नेटवर्क में ठगी से प्राप्त धन को विभिन्न माध्यमों के जरिए बाहर भेजा जाता था। इसके बदले में स्थानीय स्तर पर काम करने वाले सदस्यों को एक निश्चित प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। इस तरह यह पूरा सिस्टम एक संगठित आर्थिक अपराध के रूप में संचालित हो रहा था।

अंकित की निशानदेही पर पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों—युवराज कुमार, मोहम्मद साहिल और चुन्नू कुमार उर्फ अतुल कुमार—को भी गिरफ्तार किया। ये सभी अलग-अलग भूमिकाओं में इस गिरोह के लिए काम कर रहे थे। कोई लोगों से संपर्क करता था, कोई बैंकिंग लेन-देन संभालता था, तो कोई तकनीकी सहायता देता था।

छापेमारी के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण सबूत भी मिले हैं। बरामद सामान में बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं। इन उपकरणों के जरिए पुलिस अब इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है। संभावना जताई जा रही है कि इस गिरोह ने अब तक बड़ी संख्या में लोगों को अपना शिकार बनाया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और इसकी पहुंच काफी व्यापक थी। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके जरिए अन्य जुड़े हुए लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क का विस्तार किन-किन राज्यों और देशों तक है।

यह मामला एक बार फिर यह संकेत देता है कि साइबर अपराध लगातार जटिल और खतरनाक होते जा रहे हैं। तकनीक का दुरुपयोग कर अपराधी आम लोगों को निशाना बना रहे हैं और नई-नई तरकीबों से उन्हें ठग रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से बचने के लिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। खासकर जब कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पैसे की मांग करता है, तो उसकी पूरी जांच करना जरूरी है।

कुल मिलाकर, मोतिहारी में सामने आया यह मामला साइबर अपराध के बढ़ते खतरे की गंभीरता को दर्शाता है। पुलिस की कार्रवाई से एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश जरूर हुआ है, लेकिन इससे यह भी साफ हो गया है कि इस तरह के नेटवर्क को खत्म करने के लिए लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

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