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बिहार चुनाव 2025: टिकट की राजनीति में रिश्तों का जलवा — विकास हाशिए पर, वंशवाद हावी

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  मोहम्मद आलम 

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तस्वीर अब साफ़ होती जा रही है, लेकिन इसमें विकास नहीं — रिश्तेदारी का रंग गाढ़ा नज़र आ रहा है।हर दल में टिकट बंटवारे को लेकर घमासान मचा है, और यह घमासान जनता बनाम परिवारवाद में बदलता दिख रहा है।

रिश्तेदारी का गणित” बनाम “जनता की नब्ज़”
टिकट बंटवारे में योग्यता से ज़्यादा रिश्तों की ताक़त चल रही है।
कहीं पति ने पत्नी को टिकट दिलाया है, कहीं ससुर ने बहू को,
कहीं समधी ने समधन को मैदान में उतार दिया है।
राजनीतिक गलियारों में अब यह तंज गूंज रहा है —

टिकट नहीं, रिश्तेदारी बंट रही है!”
 विकास की बात... अब घर की बात!

हर चुनाव में “विकास” की दुहाई देने वाले नेता,अब अपने घर-परिवार के विकास में ज़्यादा रुचि दिखा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार मुकाबला
वंशवाद बनाम जनता के भरोसे का होगा।जनता की नाराज़गी सोशल मीडिया पर साफ़ सोशल मीडिया पर लोग खुलकर बोल रहे हैं,

“जिसे घर में जगह नहीं, उसे पार्टी में टिकट मिल रहा है।”

मतदाताओं में ग़ुस्सा है कि दलों की राजनीति अब जनता के लिए नहीं, परिवार के लिए सिमटकर रह गई है।

 एक नज़र रिश्तेदारी की राजनीति पर
हम पार्टी की चारों सीटें रिश्तेदारों को  गया की 10 में 4 सीटें परिवार के नाम।टिकारी से डॉ. अनिल कुमार, अतरी से भतीजे रोमित कुमार,बाराचट्टी से समधिन ज्योति देवी मांझी,इमामगंज से पतोहु दीपा मांझी मैदान में।जदयू ने चेरिया बरियारपुर से मंजू वर्मा के बेटे अभिषेक आनंद,मीनापुर से दिनेश प्रसाद सिंह के बेटे अजय कुशवाहा,
सकरा से अशोक चौधरी के बेटे आदित्य कुमार को उतारा।
कुढ़नी से बबलू कुशवाहा, जिनके ससुर बसावन भगत पूर्व मंत्री रहे हैं।
राजद ने साहेबगंज से राम विचार राय के दामाद पृथ्वीनाथ राय को टिकट दिया,
जबकि बरूराज से वीआईपी पार्टी के ई. राकेश राय मैदान में हैं,
जिनके पिता शशि राय पाँच बार विधायक रह चुके हैं।रोहतास में भी पारिवारिक समीकरण पर दांव —
सासाराम से स्नेहलता कुशवाहा (उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी),
दिनारा से आलोक सिंह (मंत्री संतोष सिंह के भाई), औरंगाबाद से त्रिविक्रम नारायण सिंह (भाजपा, गोपाल नारायण सिंह के पुत्र,नवीनगर में जदयू ने चेतन आनंद आनंद मोहन-लवली आनंद के पुत्र) को उतारा।तरारी-बक्सर में पांडेय परिवार का दबदबा कायम।
तरारी से भाजपा के विशाल प्रशांत सुनील पांडेय के पुत्र,ब्रह्मपुर से हुलास पांडेय (लोजपा-आर प्रत्याशी)।
 सवाल बड़ा है।क्या बिहार की राजनीति जनता से ज़्यादा घर की विरासत बन चुकी है?
क्या लोकतंत्र अब “लोक” से निकलकर “परिवार” तक सिमट गया है?
 जनता अब चुप नहीं —
2025 का चुनाव शायद सिर्फ़ सरकार नहीं,राजनीतिक संस्कार बदलने का भी इम्तिहान होगा।

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