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महिला आरक्षण पर तेजस्वी यादव का बड़ा बयान, 33 नहीं 50 फीसदी कोटा की मांग
- Reporter 12
- 18 Apr, 2026
पटना में तेजस्वी यादव ने महिला आरक्षण को लेकर 50 फीसदी कोटा की मांग की और बीजेपी व केंद्र सरकार पर सियासी फायदे के लिए मुद्दा भुनाने का आरोप लगाया।
पटना/आलम की खबर:बिहार की राजनीति में महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बीच राष्ट्रीय जनता दल के नेता Tejashwi Yadav ने बड़ा बयान देते हुए 33 प्रतिशत के बजाय 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर दी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने के पक्ष में है और अगर सच में महिला सशक्तिकरण की बात करनी है, तो आधा हिस्सा महिलाओं को मिलना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सियासी माहौल गर्म हो गया है और पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
33 नहीं, 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन यह केवल 33 प्रतिशत तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण जरूरी है। उनके मुताबिक, जब देश की आधी आबादी महिलाएं हैं, तो उन्हें राजनीति में भी आधी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल आरक्षण देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसमें सामाजिक न्याय का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि महिला आरक्षण के भीतर भी पिछड़े वर्गों की महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान किया जाए, ताकि ग्रामीण और वंचित वर्ग की महिलाएं भी संसद और विधानसभा तक पहुंच सकें।
बीजेपी और केंद्र सरकार पर निशाना
तेजस्वी यादव ने महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर बीजेपी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके अनुसार, अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को अधिकार देना चाहती, तो इस दिशा में ठोस और पारदर्शी कदम उठाए जाते।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यह बिल पहले ही पारित हो चुका था, तो इसे लागू करने में देरी क्यों की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और अब इसे चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पर भी साधा निशाना
इस दौरान तेजस्वी यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री Samrat Choudhary पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बावजूद उन्हें इस मुद्दे की पूरी समझ नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम नहीं दिख रही और कई फैसले बाहर से प्रभावित हो रहे हैं।
तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के प्रशासनिक फैसलों में बाहरी हस्तक्षेप बढ़ रहा है, जिससे बिहार की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
महिला सशक्तिकरण पर जोर
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में महिला सशक्तिकरण को लेकर अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने कहा कि चुनावों में उनकी पार्टी ने बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जिससे यह साबित होता है कि वे केवल बात नहीं करते, बल्कि उसे लागू भी करते हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीति में आगे लाना देश के विकास के लिए जरूरी है। जब महिलाएं निर्णय लेने वाली प्रक्रिया में शामिल होंगी, तो समाज में सकारात्मक बदलाव तेजी से आएगा।
आरक्षण के भीतर आरक्षण की मांग
तेजस्वी यादव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि महिला आरक्षण के भीतर भी सामाजिक संतुलन जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल शहरी या संपन्न वर्ग की महिलाएं ही लाभान्वित न हों, बल्कि ग्रामीण और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को भी बराबरी का अवसर मिलना चाहिए।
उनका कहना था कि यदि आरक्षण के भीतर आरक्षण नहीं दिया गया, तो इसका लाभ सीमित वर्ग तक ही रह जाएगा। इसलिए सरकार को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सीटों के पुनर्गठन पर उठाए सवाल
तेजस्वी यादव ने यह भी आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के नाम पर सीटों के पुनर्गठन की योजना बनाई जा रही है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदले जा सकें। उन्होंने कहा कि इससे विपक्षी दलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है।
उनके अनुसार, जहां विपक्ष मजबूत है, वहां सीटों को इस तरह विभाजित किया जा सकता है कि उसका प्रभाव कम हो जाए। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया और पारदर्शिता की मांग की।
फ्लोर टेस्ट को बताया औपचारिकता
आगामी फ्लोर टेस्ट को लेकर भी तेजस्वी यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल है और यह प्रक्रिया केवल औपचारिकता भर है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी पार्टी मजबूत स्थिति में है और किसी तरह की राजनीतिक अस्थिरता की संभावना नहीं है।
सियासी बहस और आगे की राह
महिला आरक्षण को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच तेजस्वी यादव का यह बयान राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। इससे न केवल बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ी है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर नई चर्चा शुरू हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले चुनावों में महिला आरक्षण एक बड़ा मुद्दा बन सकता है और सभी राजनीतिक दल इसे अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश करेंगे। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बहस का अंतिम परिणाम क्या निकलता है।
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