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Bihar Tourism Masterplan: गया-बोधगया राजगीर नालंदा ट्वीन सिटी योजना, इको टूरिज्म विकास

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बिहार सरकार गया, बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली के लिए टूरिज्म मास्टरप्लान तैयार कर रही है। गया-बोधगया और राजगीर-नालंदा को ट्वीन सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा।

पटना/आलम की खबर:बिहार सरकार ने राज्य के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक व्यापक मास्टरप्लान तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस योजना के तहत राज्य के पांच प्रमुख पर्यटन स्थलों गया, बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली को एक संगठित पर्यटन नेटवर्क के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधा, अधिक समय तक ठहरने का अवसर और एक समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव मिल सके।

सरकार की इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा गया-बोधगया और राजगीर-नालंदा को ट्वीन सिटी के रूप में विकसित करना है, जिससे ये क्षेत्र एक-दूसरे से जुड़कर एक बड़े पर्यटन सर्किट का निर्माण करेंगे। इस मॉडल के जरिए पर्यटकों को एक ही यात्रा में कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का अनुभव मिल सकेगा।

पर्यटन विभाग का उद्देश्य स्पष्ट है कि बिहार में आने वाले देशी और विदेशी पर्यटक केवल कुछ घंटों या एक-दो दिन की यात्रा तक सीमित न रहें, बल्कि अधिक समय तक यहां रुकें और राज्य की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर को गहराई से समझ सकें। वर्तमान में बोधगया और राजगीर जैसे स्थलों पर बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं, लेकिन उनकी ठहरने की अवधि अपेक्षाकृत कम रहती है, जिसे बढ़ाने के लिए यह मास्टरप्लान तैयार किया गया है।

इको-टूरिज्म और स्थानीय कला को बढ़ावा

इस योजना में इको-टूरिज्म को विशेष प्राथमिकता दी गई है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन विकास को भी बढ़ावा मिले। इसके अलावा स्थानीय हस्तशिल्प (हैंडीक्राफ्ट) और हथकरघा (हैंडलूम) उद्योगों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा, जिससे स्थानीय कारीगरों और कलाकारों को नए अवसर प्राप्त होंगे।

सरकार का मानना है कि यदि पर्यटन को स्थानीय कला और संस्कृति से जोड़ा जाए तो इससे न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

पर्यटन स्थलों का नेटवर्क और कनेक्टिविटी सुधार

इस मास्टरप्लान के तहत सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों को आपस में बेहतर सड़क और परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि पर्यटक एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से पहुंच सकें और उन्हें यात्रा में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

इसके साथ ही इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जाएगा, जिसमें बेहतर सड़कें, सूचना केंद्र, पार्किंग सुविधा और डिजिटल गाइड सिस्टम शामिल होंगे। सरकार बजट होटल, धर्मशालाओं और स्थानीय भोजनालयों को भी इस योजना में शामिल करने की तैयारी कर रही है ताकि पर्यटकों को सस्ती और बेहतर सुविधा मिल सके।

वैशाली के लिए अलग कार्ययोजना

जहां गया-बोधगया और राजगीर-नालंदा को ट्वीन सिटी मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा, वहीं वैशाली के लिए एक अलग और विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। वैशाली को एक स्वतंत्र सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां बौद्ध और जैन इतिहास को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल का दौरा

इसी बीच दक्षिण एशियाई देशों के 22 इंफ्लूएंसर्स का एक प्रतिनिधिमंडल चार दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचा है। इस दल में भूटान, कोलंबिया, जापान, मलेशिया, मंगोलिया, म्यांमार, नेपाल और सिंगापुर सहित कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

यह प्रतिनिधिमंडल राजगीर, नालंदा और बोधगया का भ्रमण करेगा और वहां की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का अध्ययन करेगा। इसके बाद यह दल भारत के अन्य राज्यों का भी दौरा करेगा ताकि बिहार की पर्यटन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट किया जा सके।

बिहार पर्यटन का नया चेहरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मास्टरप्लान बिहार के पर्यटन उद्योग के लिए एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। इससे न केवल विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि राज्य की वैश्विक पहचान भी मजबूत होगी।

सरकार की यह पहल बिहार को एक प्रमुख आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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