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समस्तीपुर से चुनावी शंखनाद: पीएम मोदी की सभा के बहाने विकास, उम्मीद और सवालों का संगम

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मोहम्मद आलम

समस्तीपुर, बिहार — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अक्टूबर को समस्तीपुर जिले के कर्पूरीग्राम से बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार का शुभारंभ करेंगे।वे जननायक एवं भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के पैतृक गांव में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे और इसके बाद दूधपुरा हवाई अड्डा मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे।दूधपुरा वही मैदान है, जहां वर्षों से हवाई अड्डा चालू करने की मांग अधूरी पड़ी है।
अब प्रधानमंत्री का हेलीकॉप्टर उसी भूमि पर उतरेगा,यह दृश्य अपने आप में प्रतीकात्मक और राजनीतिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण होगा।लोगों के मन में यह सवाल जरूर उठेगा कि क्या यह ऐतिहासिक आगमन समस्तीपुर के हवाई अड्डे को पुनर्जीवित करने की शुरुआत बनेगा?

कर्पूरीग्राम से संदेश: जननायक कौन?
राजनीतिक दृष्टि से यह आयोजन बेहद रणनीतिक है।
बीजेपी ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत जननायक कर्पूरी ठाकुर की धरती से करने का फैसला कर यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग को अपने पक्ष में मजबूत संदेश देना चाहती है।
यह वही वर्ग है जो बिहार की सामाजिक-राजनीतिक दिशा तय करता है,और जिसकी हिस्सेदारी एनडीए के टिकट वितरण में भी प्रमुख रही है।दूसरी ओर, महागठबंधन भी इसे राजनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है।
तेजस्वी यादव पहले ही कह चुके हैं कि “कर्पूरी ठाकुर की विरासत किसी एक दल की नहीं, बिहार के हर गरीब और नौजवान की है।”महागठबंधन का मानना है कि जननायक की भूमि पर सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, उनके सपनों को साकार करने की ठोस योजना भी दिखनी चाहिए।

समस्तीपुर: शिक्षा की रोशनी, उद्योग की अंधियारी

राजनीति के शोर के बीच समस्तीपुर का सबसे बड़ा मुद्दा विकास की कमी है।राज्य और केंद्र सरकारों की तमाम घोषणाओं के बावजूद यह जिला आज भी औद्योगिक रूप से पिछड़ा है।यहाँ कभी गूंजने वाली चीनी मिलें और राइस मिलें अब बंद पड़ी हैं। और जूट मिल की हालत खराब है।न कोई बड़ा उद्योग है, न कोई रोज़गार का स्थायी साधन।
प्रधानमंत्री का सपना “डिजिटल इंडिया” हो या “मेक इन इंडिया” समस्तीपुर में यह सपना अभी अधूरा है।यहाँ के युवाओं के पास रोज़गार से ज़्यादा पलायन की कहानियाँ हैं।
राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा भले राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थान है,
लेकिन इसके अलावा जिले में कोई उच्च तकनीकी शिक्षा केंद्र नहीं है।
२००१ की जनगणना के अनुसार साक्षरता दर मात्र ४५.६७% थी। और आज भी ग्रामीण शिक्षा की स्थिति बहुत बेहतर नहीं मानी जाती।
हालाँकि पूसा, बिरौली,दलसिंहसराय और समस्तीपुर में कई महाविद्यालय हैं।जैसे आचार्य नरेन्द्रदेव महाविद्यालय, महिला महाविद्यालय, आर.बी. कॉलेज और ग्रामीण शिक्षा प्रतिष्ठान बिरौली लेकिन रोज़गार उन्मुख शिक्षा और उद्योगों का अभाव आज भी सबसे बड़ी चुनौती है।
धार्मिक,सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरें
समस्तीपुर केवल राजनीति या पिछड़ेपन की कहानी नहीं, यह संस्कृति और आस्था का भी केंद्र है।
किशनपुर बैकुंठ का बाबा बैकुंठनाथ महादेव मंदिर, पूसा का चैती नवरात्र मेला,और अख्तियारपुर का हिंदू-मुस्लिम एकता का ताजिया जुलूस यह सब इस जिले की गंगा-जमनी तहज़ीब का प्रतीक हैं।

संपादकीय सवाल

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा सिर्फ चुनावी सभा नहीं, बल्कि एक संकेत है।क्या कर्पूरीग्राम की धरती से बिहार के विकास का नया अध्याय शुरू होगा?क्या दूधपुरा का हवाई अड्डा फिर से उड़ान देखेगा?
और क्या समस्तीपुर, जो आज भी विकास की दौड़ में पीछे है,
वह सच में “जननायक के सपनों का बिहार” बन पाएगा?

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