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बिहार में जनगणना 2027 के स्व–गणना अभियान को मिली रफ्तार, 3.69 लाख परिवार जुड़े, वैशाली–खगड़िया–मधुबनी में सबसे ज्यादा भागीदारी

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बिहार में जनगणना 2027 के तहत स्व–गणना अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। 20 अप्रैल तक 3.69 लाख परिवार जुड़ चुके हैं, जिनमें 3.23 लाख ने प्रक्रिया पूरी कर ली है।

पटना/आलम की खबर:भारत की आगामी जनगणना 2027 को लेकर बिहार में स्व–गणना (Self Enumeration) अभियान को जबरदस्त शुरुआत मिली है। 17 अप्रैल से शुरू हुई इस डिजिटल प्रक्रिया में राज्य के लोग तेजी से भाग ले रहे हैं और ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर रहे हैं। 20 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार बिहार में कुल 3,69,779 परिवार इस अभियान से जुड़ चुके हैं, जिनमें से 3,23,879 परिवारों ने अपनी प्रक्रिया को पूरा कर लिया है, जबकि 45,900 परिवार अभी प्रारंभिक चरण में हैं।

यह अभियान भारत की जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल, सरल और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि नागरिक स्वयं अपने डेटा को सुरक्षित और सटीक तरीके से दर्ज करें, जिससे भविष्य की योजनाएं और नीतियां अधिक प्रभावी बनाई जा सकें।

डिजिटल जनगणना की दिशा में बड़ा कदम

स्व–गणना अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को तकनीक के माध्यम से जनगणना प्रक्रिया से जोड़ना है। इसके लिए विशेष ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध कराया गया है, जहां लोग मोबाइल या लैपटॉप के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे लोगों में जागरूकता बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस अभियान की गति भी तेज हो रही है। आने वाले दिनों में और अधिक परिवार इसके साथ जुड़ेंगे।

जिलों में अलग-अलग भागीदारी

राज्य के विभिन्न जिलों में स्व–गणना को लेकर अलग-अलग स्तर की भागीदारी देखने को मिल रही है। कुछ जिलों में यह प्रक्रिया बेहद तेज है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी शुरुआती स्तर पर ही भागीदारी दर्ज की गई है।

विशेष रूप से वैशाली, खगड़िया और मधुबनी जैसे जिलों में लोगों की भागीदारी सबसे अधिक देखी गई है। वहीं अन्य जिलों में भी धीरे-धीरे इस अभियान को लेकर रुचि बढ़ रही है।

कुछ प्रमुख जिलों के आंकड़े इस प्रकार हैं—

खगड़िया में 50,222 परिवार, वैशाली में 87,609 परिवार और मधुबनी में 49,714 परिवार इस अभियान से जुड़ चुके हैं। इसके अलावा समस्तीपुर, पटना, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जैसे जिलों में भी अच्छी भागीदारी दर्ज की गई है।

आने वाले चरण की तैयारी

जनगणना प्रक्रिया केवल स्व–गणना तक सीमित नहीं है। इसके बाद अगले चरण में मकान सूचीकरण और आवास गणना का कार्य शुरू होगा। यह चरण 02 मई से 31 मई 2026 तक चलेगा।

इस दौरान सरकारी प्रगणक प्रत्येक घर का दौरा करेंगे और पहले से भरे गए डेटा का मिलान करेंगे। जिन परिवारों ने स्व–गणना पूरी कर ली है, उन्हें अपनी SE ID दिखानी होगी, जिससे प्रक्रिया आसान और तेज हो सके।

पारदर्शी और सटीक डेटा का लक्ष्य

सरकार का मानना है कि डिजिटल जनगणना से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि डेटा अधिक सटीक और पारदर्शी भी होगा। इससे भविष्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।

अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया में जनता की भागीदारी जितनी अधिक होगी, परिणाम उतने ही बेहतर और सटीक होंगे।

लोगों में बढ़ती जागरूकता

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग इस अभियान को लेकर धीरे-धीरे जागरूक हो रहे हैं। मोबाइल और इंटरनेट की सुविधा के कारण अब लोग घर बैठे ही अपनी जानकारी दर्ज कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल बदलाव भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा सुधार साबित होगा।

निष्कर्ष

बिहार में जनगणना 2027 के तहत चल रहा स्व–गणना अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। लाखों परिवारों की भागीदारी यह दिखाती है कि लोग अब डिजिटल प्रक्रियाओं को अपनाने लगे हैं। आने वाले दिनों में यह अभियान और गति पकड़ने की उम्मीद है, जिससे देश की जनगणना प्रक्रिया और अधिक आधुनिक और प्रभावी बन सकेगी।

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