मोहम्मद आलम
पटना, 21 अक्टूबर।बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण की नामांकन प्रक्रिया सोमवार को पूरी हो गई — लेकिन इसके साथ ही विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन की एकता की परतें भी खुलने लगीं।कई सीटों पर सहयोगी दल अब एक-दूसरे के आमने-सामने हैं, जिससे साफ है कि अंदरखाने की सुलगती चिंगारी अब खुलकर आग बन चुकी है।
पहले चरण के बाद अब दूसरा मोर्चा गर्म
निर्वाचन आयोग के अनुसार, पहले चरण के 121 सीटों पर 6 नवंबर को मतदान होगा।वहीं दूसरे चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया अब समाप्त हो चुकी है,जांच के बाद 300 से अधिक पर्चे खारिज, और 61 उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिए हैं।
अब 11 नवंबर को दूसरे चरण का रण होगा, और असली परीक्षा गठबंधन की एकजुटता की होगी।
राजद की देरी और कांग्रेस से सीधा टकराव
मुख्य विपक्षी दल राजद ने अपने 143 उम्मीदवारों की सूची देर रात जारी की, जिससे कई जिलों में भ्रम की स्थिति बन गई।कांग्रेस से टकराव टालने की कोशिश के बावजूद लालगंज, वैशाली और कहलगांव जैसी सीटों पर दोनों दल अब आमने-सामने हैं।राजद के अंदर भी टिकट वितरण को लेकर असंतोष है — पारिवारिक दबाव में टिकट बांटने के आरोप खुलेआम लगाए जा रहे हैं।
वीआईपी की बगावत, बीजेपी को मिला फायदा
गठबंधन की सबसे बड़ी दरार विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के साथ देखने को मिली।तारापुर सीट से वीआईपी उम्मीदवार सकलदेव बिंद ने राजद से नाराज़ होकर नामांकन वापस लिया और बीजेपी में शामिल हो गए।यह कदम सीधे-सीधे इंडिया गठबंधन के लिए झटका माना जा रहा है।
दरभंगा में दो-दो उम्मीदवार, परिहार में खुली बगावत
दरभंगा की गौडाबौराम सीट पर राजद के अंदर ही गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है,एक उम्मीदवार को लालू प्रसाद का समर्थन, जबकि दूसरा हटने को तैयार नहीं।वहीं परिहार सीट से महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष रितु जायसवाल ने पार्टी लाइन तोड़ते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।उन्होंने साफ कहा,राजद में टिकट अब परिवार और प्रभाव के हिसाब से बंट रहे हैं, मेहनतकश कार्यकर्ताओं की कोई सुनवाई नहीं।”
‘इंडिया’ गठबंधन की कमजोर कड़ी: सीटों पर सीटें टकराईं
बछवारा, राजापाकर जैसी सीटों पर कांग्रेस और भाकपा के बीच सीधी भिड़ंत है।यह टकराव सिर्फ सहयोगी दलों के बीच नहीं, बल्कि वोट बैंक के विभाजन का भी संकेत है।
कांग्रेस इस बार 61 सीटों पर लड़ रही है, 2020 के मुकाबले 5 सीटें कम, लेकिन अंदरखाने असंतोष पहले से ज्यादा।
छोटी पार्टियों की नाराज़गी भी सतह पर
गठबंधन में शामिल विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को सिर्फ 16 सीटें मिली हैं,जबकि पार्टी ने पहले 40 से 50 सीटों और उपमुख्यमंत्री पद की मांग की थी।भाकपा(माले) को 20, भाकपा को 9 और माकपा को 4 सीटें मिली हैं।गठबंधन में छोटी पार्टियां अब खुद को ‘सिर्फ संख्या पूरी करने वाला मोहरा’ बताने लगी हैं।
उम्मीदवार की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप
नामांकन के अंतिम दिन माहौल तब और गरमा गया जब सासाराम से राजद प्रत्याशी सत्येंद्र साह को झारखंड पुलिस ने एक पुराने बैंक लूट मामले में गिरफ्तार कर लिया।
यह ‘इंडिया’ गठबंधन के प्रत्याशियों की तीसरी गिरफ्तारी थी।भाकपा (माले) ने इसे राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई बताया है, और एनडीए पर “डर की राजनीति” का आरोप लगाया है।
निष्कर्ष: एकता के नारे में दरार की हकीकत
दूसरे चरण के नामांकन के साथ ही यह साफ हो गया है कि
इंडिया’ गठबंधन एकजुट कम, असहमत ज्यादा है।जहां एक ओर भाजपा और एनडीए अपने प्रचार अभियान को आक्रामक बना रहे हैं,
वहीं दूसरी ओर विपक्षी मोर्चे में टिकट से लेकर वफादारी तक की जंग जारी है।अब देखना यह होगा कि 11 नवंबर को जनता किसे मौका देती है,वादा निभाने वालों को या वादा तोड़ने वालों को।