मोहम्मद आलम
रोसड़ा/समस्तीपुर:बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में अब मुकाबला तेज़ी से दिलचस्प होता जा रहा है — और रोसड़ा (आरक्षित) विधानसभा क्षेत्र में माहौल सबसे गरम है।
जहां एक ओर पोस्टर-बैनर की चमक है, वहीं दूसरी ओर विकास के नाम पर गहराती नाराज़गी भी साफ महसूस की जा रही है।
विकास के वादे कागज़ पर, जमीनी हकीकत में जाम और जनाक्रोश
रोसड़ा की गलियां और चौक इस वक्त चुनावी नारों से गूंज रहे हैं,
मगर लोगों की जुबान पर सवाल वही पुराने हैं,सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और जाम की समस्या।शहर के मुख्य बाजार से लेकर प्रखंड कार्यालय तक ट्रैफिक जाम अब रोज़ की कहानी बन चुका है।लोगों का कहना है कि “विकास के नाम पर वादे हुए बहुत, पर काम अभी तक सड़क किनारे पोस्टरों में ही अटका है।
सत्ता पक्ष के खिलाफ अंदरूनी सन्नाटा
एनडीए से मौजूदा विधायक वीरेंद्र पासवान दोबारा मैदान में हैं,मगर इस बार माहौल उतना सहज नहीं है।
जनता ही नहीं, खुद बीजेपी के कार्यकर्ताओं में भी अंदरूनी असंतोष की फुसफुसाहट सुनाई दे रही है।लोगों का कहना है कि पांच सालों में विधायक जनता के बीच उतनी बार नहीं दिखे,जितनी बार सरकारी दावों के फोटो सोशल मीडिया पर दिखे।
महागठबंधन का दांव: अनुभव बनाम जुड़ाव की जंग
महागठबंधन ने इस सीट से बी.के. रवि को मैदान में उतारा है।जो तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी रह चुके हैं।उनका प्रशासनिक अनुभव भले मजबूत हो, लेकिन स्थानीय जुड़ाव को लेकर मतदाताओं में सवाल हैं।
जनता उन्हें “बाहर से आए नए चेहरे” के रूप में देख रही है,
और अब यही सबसे बड़ा इम्तिहान होगा कि उनका अनुभव
रोसड़ा की जमीनी हकीकत से कितनी जल्दी तालमेल बैठा पाता है।
वोटर साफ कह रहे हैं।“सिर्फ रैंक और पद नहीं, ज़रूरत है स्थानीय समझ और हाजिरी की।
तीखी टक्कर, कई छोटे दलों ने बढ़ाई मुश्किलें
इस सीट से जन सुराज पार्टी के रोहित कुमार,बहुजन समाज पार्टी के अमित कुमार बैठा,भारतीय महासंघ पार्टी के देवेंद्र कुमार पासवान
और निर्दलीय उम्मीदवार राजेश कुमार पासवान भी मैदान में हैं।
इन उम्मीदवारों की मौजूदगी ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है।छोटे दलों और निर्दलीयों की सक्रियता इस बार “कटाव फैक्टर” का बड़ा असर दिखा सकती है।
जनता के सवाल और नेताओं की चुप्पी
चुनावी सभाओं में नेता मुद्दों से ज़्यादा एक-दूसरे पर तंज कसने में व्यस्त हैं।वहीं जनता के सवाल लगातार गूंज रहे हैं।
“कब सुधरेगी सड़क? कब खत्म होगा जाम? कब मिलेगा अस्पताल में डॉक्टर?”रोसड़ा की सियासत इन सवालों से बच नहीं सकती,
क्योंकि यही वो सवाल हैं जो हर घर की बातचीत में मौजूद हैं।
निष्कर्ष: रोसड़ा का मूड अब बदलते मौसम जैसा
रोसड़ा विधानसभा इस बार एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है।
यहां का चुनाव अब सिर्फ विचारों का नहीं, भरोसे का भी इम्तिहान बन गया है।जनता मौजूदा नेतृत्व से जवाब मांग रही है,और नए चेहरों को अवसर देने के मूड में दिखाई दे रही है।6 नवंबर को जब बटन दबेगा, तो फैसला सिर्फ उम्मीदवारों का नहीं,
बल्कि रोसड़ा के विकास बनाम वादों की राजनीति का भी होगा।