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बिहार में सड़क हादसों पर बड़ा फैसला: सामूहिक दुर्घटनाएं फिर बनीं विशेष आपदा, मिलेगा तुरंत मुआवजा

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बिहार सरकार ने सामूहिक सड़क दुर्घटनाओं को फिर से विशेष स्थानीय आपदा घोषित किया है। अब मृतकों के परिजनों और घायलों को तुरंत अनुग्रह अनुदान मिलेगा।

पटना/आलम की खबर:बिहार में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के बीच राज्य सरकार ने पीड़ितों को त्वरित राहत देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब सामूहिक सड़क हादसों को एक बार फिर ‘विशेष स्थानीय आपदा’ की श्रेणी में शामिल कर दिया गया है। इस फैसले को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है और इसके लागू होते ही दुर्घटना पीड़ित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का यह कदम उन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर उठाया गया है, जहां हादसे के बाद पीड़ितों को लंबे समय तक मुआवजे का इंतजार करना पड़ता था।

पहले भी लागू थी व्यवस्था, फिर हटाई गई

राज्य में यह व्यवस्था पहली बार वर्ष 2015 में लागू की गई थी, जब आपदा प्रबंधन विभाग ने सामूहिक सड़क दुर्घटनाओं को विशेष आपदा मानते हुए अनुग्रह अनुदान देने की शुरुआत की थी। उस समय इसका उद्देश्य यह था कि दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों और गंभीर रूप से घायलों को बिना देरी आर्थिक सहायता दी जा सके।

हालांकि, वर्ष 2021 में परिवहन विभाग द्वारा मोटर वाहन नियमों में संशोधन किए जाने के बाद इस प्रावधान को समाप्त कर दिया गया। इसके स्थान पर मुआवजा देने की प्रक्रिया को मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के माध्यम से संचालित किया जाने लगा, जिससे सहायता मिलने में देरी होने लगी।

देरी ने बढ़ाई परेशानी, सरकार ने लिया संज्ञान

नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि न्यायाधिकरण के माध्यम से मुआवजा प्राप्त करने में लंबा समय लग रहा है। इस दौरान पीड़ित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता नहीं मिल पाती थी, जिससे उनकी समस्याएं और बढ़ जाती थीं।

इसी स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने मामले की समीक्षा की और यह महसूस किया कि त्वरित राहत के लिए पुरानी व्यवस्था अधिक प्रभावी थी। इसके बाद सामूहिक दुर्घटनाओं को फिर से विशेष आपदा घोषित करने का निर्णय लिया गया।

अब तुरंत मिलेगा अनुग्रह अनुदान

सरकार के इस नए फैसले के तहत सामूहिक सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों के निकटतम परिजनों और गंभीर रूप से घायलों को राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के मानकों के अनुसार अनुग्रह अनुदान दिया जाएगा। इससे पीड़ित परिवारों को तुरंत आर्थिक सहायता उपलब्ध हो सकेगी और उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलेगी।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य राहत प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना है, ताकि संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों को समय पर मदद मिल सके।

अंतरिम अवधि के मामलों को भी राहत

सरकार ने केवल वर्तमान मामलों पर ही नहीं, बल्कि अतीत के कुछ लंबित मामलों पर भी ध्यान दिया है। विशेष रूप से 15 सितंबर 2021 से 31 मार्च 2022 के बीच हुई सामूहिक दुर्घटनाओं के मामलों में मुआवजे को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।

इस अवधि में पुरानी व्यवस्था समाप्त हो चुकी थी और नई व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो पाई थी, जिसके कारण कई पीड़ित परिवार सहायता से वंचित रह गए थे। अब सरकार ने निर्णय लिया है कि इस अंतरिम अवधि के मामलों में भी वर्ष 2015 के मानकों के आधार पर अनुग्रह अनुदान दिया जाएगा।

किन्हें मिलेगा लाभ, क्या हैं शर्तें

सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि यह सहायता केवल उन्हीं पीड़ितों या उनके परिजनों को दी जाएगी, जिन्हें किसी अन्य माध्यम से मुआवजा प्राप्त नहीं हुआ है। इसका उद्देश्य दोहरे लाभ को रोकना और वास्तविक जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाना है।

इसके अलावा, जिला स्तर पर प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे मामलों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा।

सड़क सुरक्षा पर भी जोर जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि राहत और मुआवजा जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ सड़क सुरक्षा के उपायों को भी मजबूत करना उतना ही आवश्यक है। बिहार में हर साल बड़ी संख्या में सड़क हादसे होते हैं, जिनमें कई लोगों की जान चली जाती है और कई गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं।

ऐसे में यातायात नियमों का पालन, बेहतर सड़क संरचना और जागरूकता अभियान जैसे कदम भी जरूरी हैं, ताकि दुर्घटनाओं की संख्या को कम किया जा सके।

सरकार का संतुलित दृष्टिकोण

राज्य सरकार का यह निर्णय राहत और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर जहां पीड़ितों को तत्काल सहायता देने पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर मुआवजा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की भी बात कही गई है।

यह कदम उन परिवारों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है, जो दुर्घटना के बाद आर्थिक संकट से जूझते हैं और उन्हें तुरंत मदद की आवश्यकता होती है।

आगे की राह

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस निर्णय का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है। यदि इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।

फिलहाल, इस फैसले से यह स्पष्ट है कि सरकार सड़क दुर्घटनाओं को लेकर गंभीर है और पीड़ितों को समय पर राहत देने के लिए ठोस कदम उठा रही है।

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