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बिहार में लेटलतीफी पर सख्ती: समय पर नहीं पहुंचे तो कटेगा वेतन, मुख्य सचिव का सख्त आदेश

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बिहार के मुख्य सचिव ने सरकारी कार्यालयों में लेटलतीफी पर सख्त रुख अपनाया है। समय पर उपस्थिति नहीं होने पर वेतन कटौती और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

छपरा/आलम की खबर:बिहार में सरकारी कार्यालयों की कार्यसंस्कृति को लेकर अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। लंबे समय से चल रही लेटलतीफी और कार्य में सुस्ती की शिकायतों के बीच राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब दफ्तरों में अनुशासन से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। इस दिशा में मुख्य सचिव Pratyaya Amrit ने सभी विभागों और जिलों के अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

जारी आदेश में कहा गया है कि सभी सरकारी कर्मियों को निर्धारित समय पर कार्यालय पहुंचना अनिवार्य होगा और कार्य अवधि के दौरान पूरी निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा। यह कदम सरकारी कामकाज की गति और पारदर्शिता को सुधारने के उद्देश्य से उठाया गया है।

औचक निरीक्षण से बढ़ेगी जवाबदेही

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब कार्यालयों में औचक निरीक्षण की व्यवस्था को और सक्रिय किया जाएगा। यदि किसी कर्मचारी को बिना अनुमति अनुपस्थित पाया जाता है या वह समय से कार्यालय नहीं पहुंचता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने विभागों में उपस्थिति और कार्य प्रणाली की नियमित निगरानी करें। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी कार्य समय पर और प्रभावी ढंग से पूरा हो सके।

देर से आने पर वेतन कटौती

इस आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब लेटलतीफी सीधे वेतन पर असर डालेगी। जिन कर्मचारियों के अवकाश खाते में छुट्टी उपलब्ध नहीं होगी और वे देर से कार्यालय पहुंचेंगे, उनकी अनुपस्थिति की अवधि के अनुसार वेतन में कटौती की जाएगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम कर्मचारियों को अनुशासन में लाने और समय की पाबंदी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। इससे पहले कई बार चेतावनी दी जा चुकी थी, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू किया जाएगा।

उपस्थिति के आधार पर बनेगा वेतन बिल

निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे कर्मचारियों की उपस्थिति विवरणी के आधार पर ही वेतन विपत्र तैयार करें। यदि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी भी जिम्मेदार माने जाएंगे।

इस व्यवस्था से न केवल कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता भी आएगी।

कार्यालय समय की नई सख्त गाइडलाइन

मुख्य सचिव ने कार्यालय समय को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे। पांच दिवसीय कार्य सप्ताह वाले कार्यालयों में समय सुबह 09:30 बजे से शाम 06:00 बजे तक निर्धारित किया गया है, जिसमें दोपहर के भोजन के लिए एक घंटे का समय दिया गया है।

महिला कर्मियों के लिए कार्य अवधि में आंशिक छूट देते हुए समय सुबह 09:30 बजे से शाम 05:00 बजे तक रखा गया है। वहीं, क्षेत्रीय कार्यालयों में छह दिवसीय कार्य प्रणाली लागू रहेगी, जहां समय सुबह 10:00 बजे से शाम 05:00 बजे तक तय किया गया है। सर्दियों के महीनों में इसमें आंशिक बदलाव किया जाता है।

बायोमेट्रिक उपस्थिति पर विशेष जोर

राज्य सरकार पहले ही वर्ष 2022 से बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लागू कर चुकी है, लेकिन अब इसे और सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सभी कर्मचारी नियमित रूप से बायोमेट्रिक मशीन में अपनी उपस्थिति दर्ज करें।

इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि उपस्थिति रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी और सटीक हो। साथ ही, किसी प्रकार की हेरफेर की संभावना भी कम होगी।

कार्यसंस्कृति सुधारने की कोशिश

सरकार का मानना है कि समय पर उपस्थिति और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना किसी भी प्रशासन की आधारशिला होती है। यदि कर्मचारी समय का पालन नहीं करते हैं, तो इसका सीधा असर सरकारी योजनाओं और सेवाओं पर पड़ता है।

इसलिए यह कदम केवल अनुशासन लागू करने के लिए नहीं, बल्कि पूरी कार्यसंस्कृति को सुधारने के लिए उठाया गया है। इससे आम जनता को भी बेहतर सेवाएं मिलने की उम्मीद है।

आगे क्या असर होगा

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस सख्ती का वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो सरकारी दफ्तरों में कामकाज की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सकता है।

फिलहाल, सरकार का यह संदेश साफ है कि अब लापरवाही और देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हर कर्मचारी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

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