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Bihar Politics: सम्राट चौधरी सरकार ने विधानसभा में जीता विश्वासमत, प्रशांत किशोर ने लगाया ‘खरीदा हुआ बहुमत’ का आरोप

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बिहार में सम्राट चौधरी सरकार ने विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर लिया है। हालांकि प्रशांत किशोर ने इसे ‘खरीदा हुआ बहुमत’ बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पटना/आलम की खबर:बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां नई सरकार के गठन के बाद विधानसभा में विश्वासमत को लेकर चर्चा तेज हो गई है, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने 24 अप्रैल 2026 को विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर लिया, जिससे सरकार ने सदन में अपना बहुमत साबित कर दिया, हालांकि इस पूरी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक हलकों में गंभीर बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, विपक्षी खेमे के साथ-साथ कई राजनीतिक विश्लेषकों ने भी इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त की है, जिससे राज्य की सियासत और अधिक गरमा गई है।

विशेष सत्र के दौरान विधानसभा में पेश किए गए विश्वास प्रस्ताव पर करीब 90 मिनट तक चर्चा हुई, जिसके बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, इस प्रक्रिया में मतदान की नौबत नहीं आई और प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई, सरकार की ओर से इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत एक सामान्य राजनीतिक कदम बताया गया है, वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि उनके पास पर्याप्त समर्थन है और यह सरकार स्थिरता के साथ काम करेगी, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों ने सरकार की वैधता और समर्थन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इसी बीच राजनीतिक रणनीतिकार और जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, उन्होंने खगड़िया में मीडिया से बातचीत के दौरान सरकार के बहुमत को वास्तविक जनसमर्थन नहीं बताया और इसे “खरीदा हुआ बहुमत” करार दिया, उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है, उन्होंने आरोप लगाया कि यह बहुमत जनता के वास्तविक समर्थन से नहीं बल्कि राजनीतिक समीकरणों और संसाधनों के प्रभाव से बनाया गया है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।

प्रशांत किशोर ने अपने बयान में यह भी कहा कि यह बहुमत किसी प्राकृतिक जनादेश का परिणाम नहीं है, बल्कि सत्ता और प्रशासनिक तंत्र के उपयोग से तैयार किया गया है, उन्होंने दावा किया कि जिन राजनीतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से यह समर्थन हासिल किया गया है, वह पारदर्शी नहीं हैं, उनके अनुसार इस तरह की राजनीति से लोकतंत्र की मूल भावना प्रभावित होती है और जनता का विश्वास कमजोर होता है, उनके बयान ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर भी प्रशांत किशोर ने तीखी टिप्पणी की और उनके राजनीतिक सफर पर सवाल उठाए, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का यह पद केवल व्यक्तिगत राजनीतिक क्षमता का परिणाम नहीं है, बल्कि यह शीर्ष नेतृत्व के समर्थन और राजनीतिक समीकरणों का नतीजा है, साथ ही उन्होंने उनके अतीत और कानूनी मामलों को लेकर भी सवाल उठाए, जिससे सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है, हालांकि सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बयानबाजी बताया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है, जहां एक ओर सरकार अपने बहुमत को स्थिरता और विकास के लिए जरूरी बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और अन्य राजनीतिक समूह इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल के रूप में देख रहे हैं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है और राज्य की सियासत में नई रणनीतियों को जन्म दे सकता है।

विधानसभा में हुए इस विश्वासमत के बाद अब सभी की नजरें सरकार की आगामी नीतियों और फैसलों पर टिकी हैं, क्योंकि बहुमत हासिल करने के बाद जनता की अपेक्षाएं और बढ़ जाती हैं, ऐसे में सरकार के सामने विकास कार्यों और राजनीतिक स्थिरता को संतुलित रखने की बड़ी चुनौती होगी, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाकर सरकार को घेरने की रणनीति अपना सकता है, जिससे आने वाले समय में बिहार की राजनीति और अधिक दिलचस्प होने की संभावना है।

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