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सत्ता के सूरमाओ पर जनता का प्रहार सुशासन बाबू के खासमखास मंत्रियों को लोगों ने दिखाया रास्ता

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मोहम्मद आलम

बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार नजारा बदला-बदला है। सत्ता के सिपहसालार, जो कभी ‘सुशासन बाबू’ के नाम पर जनता से वाहवाही लूटते थे, अब उन्हीं गलियों में जनता का गुस्सा झेल रहे हैं।समस्तीपुर ज़िले में हालात कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। सारायरंजन विधानसभा से एनडीए प्रत्याशी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले विजय चौधरी, जब जनता के बीच पहुंचे तो नारे नहीं, विरोध सुनने को मिला। लोगों ने सवाल दागे “कहां है वो विकास, जो हर भाषण में गूंजता है?”इसी तरह, हायघाट विधानसभा में भी एनडीए प्रत्याशी और मंत्री को जनता ने करारा जवाब दिया। भीड़ ने उनका स्वागत नारों से नहीं, बल्कि नाराज़गी से किया। मंच से ‘विकास हुआ है’ की बात उठी, तो भीड़ ने कहा  “विकास नहीं, विश्वास टूटा है!”
वही रोसड़ा में तो एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। अंदरुनी गुट बाजी ने एनडीए समर्थित बीजेपी के सिटिंग विधायक वीरेंद्र कुमार के परेशानी को बढ़ा दिया है। दूसरी तरफ इनके प्रति लोगों में नाराजगीा देखने को मिल रही है।बीजेपी हो या जदयू, चाहे हम पार्टी या जद (एस), जनता का मूड साफ़ है ।अब भाषण नहीं, हिसाब चाहिए।सवाल उठ रहा है।अगर बिहार में वाकई सुशासन है, तो फिर जनता सत्ता के चेहरों को दरवाज़े से वापस क्यों भेज रही है? वैसे बताते चलें कि समस्तीपुर जिले में सभी सिटिंग विधायकों का लगभग वही हाल है। आम लोगों के गुस्से के शिकार होना पड़ रहा है।

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