बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जातीय समीकरणों के बीच महागठबंधन ने मंगलवार को अपने “संकल्प पत्र” के जरिए अति पिछड़ी जातियों (EBC) को साधने की बड़ी रणनीति सामने रखी है।राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, भाकपा माले और वीआईपी के साझा घोषणापत्र में इस बार नारा साफ है,वंचितों का अधिकार, सम्मान के साथ विकास।”
तेजस्वी यादव ने कहा,हम सिर्फ सत्ता नहीं, समाज बदलने निकले हैं। अति पिछड़ों, दलितों और वंचितों को बराबरी का हक दिलाना ही हमारा असली संकल्प है। अति पिछड़ा अत्याचार निवारण अधिनियम बनेगा कानू
महागठबंधन ने सबसे बड़ा ऐलान किया अति पिछड़ा अत्याचार निवारण अधिनियम” लागू किया जाएगा।यह अधिनियम EBC समुदायों के सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक उत्पीड़न के खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करेगा।
आरक्षण सीमा बढ़ाने और नौवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव
संकल्प पत्र में कहा गया है कि आरक्षण की 50% सीमा अब बाधा नहीं बनेगी।महागठबंधन ने वादा किया कि आरक्षण बढ़ाने वाले कानून को संसद की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की सिफारिश की जाएगी, जिससे अदालतों में उसे चुनौती न दी जा सके।
पंचायत और निकायों में आरक्षण बढ़ेगा
अतिपिछड़ा वर्ग का आरक्षण 20% से बढ़ाकर 30% किया जाएगा।
अनुसूचित जातियों के लिए 16% से बढ़ाकर 20%।
अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण में भी आनुपातिक बढ़ोतरी का वादा।
शिक्षा में पिछड़ों और दलितों के लिए बड़ा कदम
निजी स्कूलों में शिक्षा अधिकार कानून के तहत आरक्षित सीटों का आधा हिस्सा पिछड़े, दलित और जनजातीय बच्चों के लिए तय होगा।
सभी निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू होगा।
सभी दलित और ओबीसी छात्रों को फ्री ड्रेस, किताबें, छात्रवृत्ति और छात्रावास सुविधा दी जाएगी।
भूमिहीनों को जमीन, और सामूहिक खेती का हक
शहरी क्षेत्रों में 3 डिसमिल और ग्रामीण इलाकों में 5 डिसमिल जमीन हर भूमिहीन को दी जाएगी महादलित, अतिपिछड़े और भूमिहीन वर्गों को सामूहिक खेती के लिए सरकारी पट्टा दिया जाएगा।
निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू करने का दबाव
महागठबंधन ने कहा कि अब आरक्षण सिर्फ सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं रहेगा।निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू करने के लिए विधानसभा प्रस्ताव पारित किया जाएगा और केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।
Not Found Suitable’ जैसी व्यवस्था होगी खत्म
भर्ती प्रक्रिया में “NFS” (Not Found Suitable) जैसी मनमानी को अवैध घोषित किया जाएगा, ताकि योग्य उम्मीदवारों के साथ भेदभाव न हो।
पसमांदा मुसलमानों को मिलेगा ‘न्याय का हिस्सा’
घोषणापत्र में कहा गया है कि पसमांदा मुस्लिम समाज की आर्थिक और शैक्षिक प्रगति के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि उन्हें भी वंचित न्याय की मुख्यधारा में शामिल किया जा सके।
ठेकेदारी में 50% आरक्षण
25 करोड़ तक के सभी सरकारी ठेकों में SC/ST, OBC और EBC समुदायों के लिए 50% आरक्षण देने का ऐलान।
मछुआरों और निषाद समाज के लिए राहत पैकेज
तीन महीने के प्रतिबंध काल में प्रति परिवार ₹5,000 की सहायता।
हर प्रखंड में मछली बाज़ार, प्रशिक्षण केंद्र और बीमा योजना।
नदियों-तालाबों के पुनर्जीवन में पारंपरिक मछुआरों को प्राथमिकता।
वन अधिकार और आदिवासी स्वशासन
वनाधिकार कानून 2006 और पेसा कानून के तहत आदिवासियों को प्रखंड और पंचायत स्तर पर स्वशासन का अधिकार दिया जाएगा।वन (संरक्षण) संशोधन कानून 2023 वापस लेने की मांग की जाएगी।टाइगर प्रोजेक्ट के नाम पर आदिवासियों के विस्थापन पर रोक।
तेजस्वी बोले “अब ‘भेदभाव का बिहार’ नहीं, ‘बराबरी का बिहार’ बनेगा”
तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार अब “जातियों की लड़ाई नहीं, अधिकारों की लड़ाई” लड़ेगा। “महागठबंधन की सरकार बनी तो अतिपिछड़े, दलित, आदिवासी और पसमांदा समाज को मिलेगा उनका पूरा हक। यही असली सामाजिक न्याय की परिभाषा है। गौरतलब है की,
तेजस्वी यादव का यह घोषणापत्र सिर्फ चुनावी वादा नहीं, बल्कि जातीय असमानता के खिलाफ राजनीतिक दस्तावेज बनकर उभरा है।महागठबंधन ने 24 वादों के जरिए बिहार के अति पिछड़ों, दलितों और वंचित तबकों को सीधे अपने पाले में खींचने की कोशिश की है।
अब सवाल है, जनता इस “वंचित न्याय के एजेंडे” को कितना वोट में बदलती है।