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बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला: सारण से गोपालगंज तक 73.51 किमी फोरलेन ग्रीनफील्ड सड़क को मंजूरी, 63 प्रस्तावों पर मुहर

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बिहार कैबिनेट ने सारण से गोपालगंज तक 73.51 किमी फोरलेन ग्रीनफील्ड सड़क, पटना में NIFT के लिए जमीन, साइबर यूनिट भवन और आकस्मिकता निधि बढ़ाने सहित 63 प्रस्तावों को मंजूरी दी।

पटना/आलम की खबर:बिहार सरकार ने विकास के विभिन्न क्षेत्रों को गति देने के उद्देश्य से एक साथ कई अहम फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 63 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें सबसे प्रमुख निर्णय सारण से गोपालगंज के बीच नई फोरलेन ग्रीनफील्ड सड़क के निर्माण का है। यह निर्णय राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

बैठक में लिए गए फैसलों के अनुसार सारण जिले के दरिहारा (कोन्हुआ) से गोपालगंज के डुमरिया घाट तक 73.51 किलोमीटर लंबी चार लेन ग्रीनफील्ड सड़क का निर्माण किया जाएगा। यह सड़क पूरी तरह नए रूट पर विकसित की जाएगी, जिससे वर्तमान मार्गों पर दबाव कम होगा और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। इस परियोजना को पीपीपी (DBFOT टोल) मॉडल पर लागू किया जाएगा, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी से निर्माण, संचालन और रखरखाव किया जाएगा। परियोजना के लिए बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को जिम्मेदारी सौंपी गई है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तथा तकनीकी परामर्श सेवाएं भी ली जाएंगी।

इस सड़क के निर्माण से सारण और गोपालगंज के बीच आवागमन सुगम होगा और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। कृषि उत्पादों के परिवहन में तेजी आएगी, जिससे किसानों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। सीमावर्ती क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी बनने से क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

कैबिनेट ने बक्सर, आरा और मनेर को जोड़ने वाले लगभग 90 किलोमीटर लंबे गंगा पथ परियोजना को भी मंजूरी दी है। इसे भी पीपीपी मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। यह परियोजना गंगा नदी के किनारे आधुनिक सड़क नेटवर्क तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे यातायात के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने पटना के सदर अंचल में राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना के लिए दो एकड़ से अधिक भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यह भूमि मात्र 10 रुपये की प्रतीकात्मक राशि पर 30 वर्षों की लीज पर दी जाएगी, जिसमें आगे नवीनीकरण का विकल्प भी रहेगा। इस फैसले से राज्य के युवाओं को फैशन और डिजाइन के क्षेत्र में उच्च शिक्षा का अवसर स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगा।

डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से पटना में साइबर अपराध इकाई और विशेष शाखा के लिए आधुनिक भवन और बुनियादी ढांचा विकसित करने की मंजूरी दी गई है। इस पर लगभग 51 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा वित्त विभाग में साइबर कोषागार की स्थापना और उसके संचालन के लिए 23 पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी गई है। यह कदम सरकारी वित्तीय लेनदेन को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में सहायक होगा।

वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए बिहार आकस्मिकता निधि की सीमा में भी बड़ा इजाफा किया गया है। इसे 350 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 13,900 करोड़ रुपये करने का निर्णय लिया गया है, जो वित्तीय वर्ष 2026-27 से प्रभावी होगा। इस बदलाव से आपातकालीन परिस्थितियों में सरकार को त्वरित वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।

कैबिनेट ने पटना स्थित संजय गांधी जैविक उद्यान का नाम बदलकर पटना जू करने का निर्णय भी लिया है। इसके साथ ही उद्यान के संचालन के लिए गठित प्रबंधन एवं विकास समिति का नाम भी परिवर्तित किया गया है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से इस प्रमुख पर्यटन स्थल की पहचान और अधिक सरल और व्यापक होगी।

कुल मिलाकर कैबिनेट के ये फैसले दर्शाते हैं कि सरकार एक साथ कई मोर्चों पर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। सड़क, शिक्षा, सुरक्षा और वित्तीय सुधार जैसे क्षेत्रों में लिए गए ये निर्णय आने वाले समय में राज्य की अर्थव्यवस्था और आधारभूत संरचना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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