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छठ के बाद बिहार में सियासी विस्फोट,शाह-राजनाथ बनाम राहुल-तेजस्वी, मैदान में उतरे बड़े चेहरे

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मोहम्मद आलम

पटना।छठ महापर्व के शांत समापन के साथ ही बिहार की सियासत अब उबाल पर है।चार दिन तक आस्था के गीत गूंजते रहे, अब वही मंच राजनीतिक नारों से भरने लगे हैं।
बुधवार का दिन बिहार की राजनीति के लिए विस्फोटक साबित हो रहा है, क्योंकि एक ओर अमित शाह और राजनाथ सिंह मैदान में हैं,
तो दूसरी ओर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की जोड़ी विपक्षी खेमे में जोश भरने उतरी है।छठ की आरती के बाद अब चुनावी घमासान की घंटी बज चुकी है।

 एनडीए के मैदान में शाह और राजनाथ की एंट्री

गृहमंत्री अमित शाह आज तीन जिलों में रैलियों का बिगुल फूंकेंगे —
दरभंगा, समस्तीपुर (रोसड़ा) और बेगूसराय।तीनों जगह मंच सजा है, भीड़ जुटी है, नारे गूंज रहे हैं।
शाह के साथ-साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मुजफ्फरपुर में दो बड़ी जनसभाएं करेंगे।भाजपा ने इसे “पहले चरण की चुनावी चाल” बताया है,जहां हर भाषण में लालू-तेजस्वी पर निशाना और “डबल इंजन सरकार” की दुहाई होगी।
शाम को शाह पटना में ठहरेंगे और पार्टी नेताओं संग रणनीतिक बैठक में आगे की चाल तय करेंगे।

 महागठबंधन का पलटवार" राहुल और तेजस्वी की साझा रैली

वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी और तेजस्वी यादव एक मंच पर आने वाले हैं।यह पहली बार है जब दोनों नेता एक साथ बिहार की जनता के बीच उतर रहे हैं।विपक्ष इसे “बदलाव की पुकार” बता रहा है।राहुल-तेजस्वी की साझा सभा से महागठबंधन खेमे में नया जोश देखने को मिल रहा है।कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता भी बिहार दौरे पर हैं,
जबकि प्रियंका गांधी की रैली का कार्यक्रम जल्द तय होने वाला है।

 चुनावी हवा में अब सिर्फ नारे नहीं, फैसला तैर रहा है,

छठ और दीवाली के बाद अब बिहार का हर चौक-चौराहा राजनीतिक जंग का मैदान बन चुका है।
गांवों में चौपाल, शहरों में नुक्कड़ — हर जगह सिर्फ एक ही चर्चा:
“कौन बनेगा बिहार का मालिक?”
एनडीए अपनी उपलब्धियों और मोदी ब्रांड पर दांव लगा रहा है,
वहीं महागठबंधन बेरोज़गारी, महंगाई और बदहाली को मुद्दा बना रहा है।
 आज से शुरू ‘बड़ी जंग’

आज का दिन बिहार की सियासत के लिए सिर्फ तारीख नहीं,
बल्कि 2025 के चुनावी महासंग्राम की औपचारिक शुरुआत है।
एक तरफ मोदी सरकार के सबसे बड़े चेहरे जनता से वोट मांग रहे हैं,
दूसरी ओर विपक्ष “बदले हुए बिहार” की तस्वीर दिखा रहा है।अब देखना यह है कि,छठ की आस्था के बाद उठी यह सियासी लहर,किसे किनारे लगाती है और किसे डुबो देती है,बिहार में मौसम ठंडा हुआ है,
पर राजनीति फिर तपने लगी है,
शाह की रणनीति या तेजस्वी की जोड़ी,देखना होगा जनता किसे सिरमौर बनाती है।”

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